संतुलन साधने की कोशिश
एफटीए के बाद भारतीय कार बाजार में यूरोपीय कंपनियों की मौजूदगी बढ़ने की संभावना है, लेकिन वह नियंत्रित दायरे में ही रहेगी। सरकार का मकसद उपभोक्ताओं को ज्यादा विकल्प देना, व्यापारिक रिश्ते मजबूत करना और साथ-साथ घरेलू ऑटो उद्योग के हितों की रक्षा करना है।