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India-EU: भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद यूरोपीय कारें होंगी सस्ती, लेकिन सालाना 2.5 लाख यूनिट की सीमा

Tue, 27 Jan 2026 04:05 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नई दिल्ली और यूरोपियन यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होने के बाद भारत का लंबे समय से सुरक्षित ऑटोमोबाइल मार्केट एक बड़े बदलाव के लिए तैयार है। जिससे ईयू में बनी कारों पर टैरिफ में भारी कमी आएगी।
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BMW 3 Series - फोटो : BMW
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विस्तार
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भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) (एफटीए) के पूरा होने के साथ ही भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इस समझौते के तहत यूरोप में बनी कारों पर लगने वाले भारी-भरकम आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) में बड़ी कटौती की जाएगी। हालांकि, इसका फायदा सीमित संख्या में आने वाली गाड़ियों को ही मिलेगा।
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समझौते के अनुसार, यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क को चरणबद्ध तरीके से 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत तक लाया जाएगा। लेकिन यह रियायत हर साल केवल 2.5 लाख कारों तक ही सीमित रहेगी।

 

ऊंचे इंपोर्ट टैक्स से हटकर नया कदम
दशकों से भारत का ऑटो सेक्टर दुनिया के सबसे ज्यादा संरक्षित बाजारों में गिना जाता रहा है। फिलहाल पूरी तरह आयातित कारों पर 70 से 110 प्रतिशत तक शुल्क लगता है। ताकि घरेलू ऑटो उद्योग को संरक्षण मिले और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा सके।

इन ऊंचे टैक्स को लेकर वैश्विक कार कंपनियां लंबे समय से नाराजगी जताती रही हैं। उनका कहना रहा है कि इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा सीमित होती है और उपभोक्ताओं के पास विकल्प कम रह जाते हैं। एफटीए के जरिए पहली बार यूरोपीय कार निर्माताओं को इस दीवार में नियंत्रित तरीके से दरार मिली है।

 

राहत के साथ सख्त सीमा भी तय
हालांकि यह छूट पूरी तरह खुली नहीं है। सरकार ने साफ किया है कि हर साल सिर्फ 2.5 लाख यूरोपीय कारें ही कम शुल्क का लाभ उठा सकेंगी। इससे यह सुनिश्चित किया गया है कि भारतीय बाजार में अचानक सस्ती विदेशी कारों की बाढ़ न आ जाए और घरेलू कंपनियों पर झटका न लगे।

इसके अलावा, टैरिफ में कटौती धीरे-धीरे की जाएगी, ताकि उद्योग को नए हालात के अनुसार खुद को ढालने का समय मिल सके।

 

अरबों डॉलर के व्यापार रिश्ते की पृष्ठभूमि
ऑटो टैरिफ में यह बदलाव भारत और ईयू के बीच पहले से मजबूत व्यापारिक रिश्तों की पृष्ठभूमि में हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 190 अरब डॉलर से ज्यादा का रहा।

इस दौरान भारत ने ईयू को 75.9 अरब डॉलर का सामान और 30 अरब डॉलर की सेवाएं निर्यात कीं। जबकि ईयू ने भारत को 60.7 अरब डॉलर का सामान और 23 अरब डॉलर की सेवाएं भेजीं। कारों पर शुल्क में कटौती इसी बड़े आर्थिक सहयोग का एक हिस्सा है।

 

इतना बड़ा बाजार, जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल
भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है। इसके बावजूद ऊंचे आयात शुल्क की वजह से विदेशी कार कंपनियों के लिए यहां पैर जमाना हमेशा मुश्किल रहा है।

नई व्यवस्था यूरोपीय ब्रांड्स को इस विशाल बाजार में सीमित लेकिन सुनिश्चित प्रवेश का रास्ता देती है। साथ ही, यह भारत की संरक्षणवादी नीति को एक झटके में खत्म किए बिना संतुलन बनाए रखने की कोशिश है। 
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संतुलन साधने की कोशिश
एफटीए के बाद भारतीय कार बाजार में यूरोपीय कंपनियों की मौजूदगी बढ़ने की संभावना है, लेकिन वह नियंत्रित दायरे में ही रहेगी। सरकार का मकसद उपभोक्ताओं को ज्यादा विकल्प देना, व्यापारिक रिश्ते मजबूत करना और साथ-साथ घरेलू ऑटो उद्योग के हितों की रक्षा करना है। 

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