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Electric Vehicles: ईवी का सपना पड़ रहा है फीका, वैश्विक स्तर पर वाहन निर्माताओं ने लगा दिया है ब्रेक

Mon, 05 Aug 2024 03:03 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कुछ साल पहले तक कई कार निर्माता एक दशक के भीतर इंटरनल कंब्शन इंजन (ICE) को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने और ईवी क्रांति की शुरुआत करने का वादा कर रहे थे। हालांकि अब यह आशावादी पूर्वानुमान आलोचना के घेरे में है।
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Electric Car - फोटो : istock
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विस्तार
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ऑटोमोबाइल उद्योग एक बड़े बदलाव से गुजर रही है। क्योंकि कार निर्माता इलेक्ट्रिक भविष्य की ओर एक रास्ता तय करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इलेक्ट्रिफिकेशन को लेकर जो कभी महत्वाकांक्षी लक्ष्य थे। अब उपभोक्ता व्यवहार, बुनियादी ढांचे की सीमाओं और आर्थिक दबावों द्वारा वास्तविकता में बदल दिए गए हैं।
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कुछ साल पहले तक कई कार निर्माता एक दशक के भीतर इंटरनल कंब्शन इंजन (ICE) को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने और ईवी क्रांति की शुरुआत करने का वादा कर रहे थे। हालांकि अब यह आशावादी पूर्वानुमान आलोचना के घेरे में है।

इंटरनल कंब्शन इंजन वाहनों की जिंदगी अभी थोड़ी बची हुई है। प्रीमियम ईवी सेगमेंट में अग्रणी के रूप में देखी जाने वाली ऑडी अब इस बात को महसूस करने वाली लेटेस्ट कार निर्माता बन गई है। 2033 तक फुल इलेक्ट्रिक होने के अपने पिछले लक्ष्य से, कंपनी ने इस पूर्व प्रतिबद्धता की समीक्षा करने और उस तारीख से आगे अपने लाइनअप में ICE बनाए रखने की बात कही है। यह बात इस फैक्ट से निकली है कि 2035 तक नई ICE कारों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की यूरोपीय संघ की योजना के कार्यान्वयन में देरी हो सकती है।

यहां तक कि ऑडी की मूल कंपनी, फॉक्सवैगन ग्रुप भी ऐसे दबावों से अछूता नहीं है। अल्ट्रा-परफॉर्मेंस कार बनाने वाली, पोर्शे ने स्वीकार किया है कि ईवी की ओर जाने वाला रोडमैप उम्मीद से थोड़ा लंबा हो रहा है। निश्चित रूप से, यह अभी भी इलेक्ट्रिक वाहनों के भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन पोर्शे कायेन अभी भी 2030 के दशक में अपने V8 से लैस रहेगा। फॉक्सवैगन की एक अन्य कंपनी बेंटले ने अपनी ईवी ऑन-सेल तारीख में देरी की है और ICE उत्पादन को बढ़ा दिया।

इंडस्ट्री के बडे़ ट्रेंड
इलेक्ट्रिफिकेशन में देरी की यह ट्रेंड लग्जरी ब्रांडों के साथ खत्म नहीं होती है। ईवी की पहले खुलकर वकालत करने वाली, वोल्वो ने कहा कि वह इस संभावना को खारिज नहीं करेगा कि ICE वाहन 2030 के बाद भी जिंदा रहेंगे। मर्सिडीज-बेंज ने भी अपनी इलेक्ट्रिफिकेशन महत्वाकांक्षाओं को कम कर दिया,। यह कहते हुए कि ज्यादा सतर्क बदलाव की जरूरत है।

अब यहां तक कि टॉप मास-मार्केट निर्माताओं में से एक फोर्ड ने भी स्वीकार किया है कि 2030 तक यूरोप में सिर्फ इलेक्ट्रिक यात्री कारों की बिक्री का पिछला मकसद अवास्तविक था। दुनिया की सबसे बड़ी कार निर्माता, फॉक्सवैगन कथित तौर पर गोल्फ की मौजूदा पीढ़ी को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है। वह भी इंटरनल कंब्शन इंजन के साथ।

ईवी की पहेली
कार निर्माताओं के सामने चुनौतियां कई तरह ही हैं। नियामक दबाव और स्थायी गतिशीलता के लिए उपभोक्ता मांग उन्हें इलेक्ट्रिफिकेशन की ओर ले जाती है। जबकि दूसरी ओर, ईवी के लिए उच्च लागत, एक सीमित चार्जिंग बुनियादी ढांचा और पारंपरिक कारों के लिए स्पष्ट उपभोक्ता वरीयता चीजों को लागू करना मुश्किल बनाती है।

टोयोटा आक्रामक ईवी अपनाने, हाइब्रिड वाहनों का बखान करने और कार्बन-न्यूट्रल ईंधन के बारे में मुखर रहा है। वास्तव में, वह मानता है कि ईवी कभी भी मुख्यधारा का उत्पाद नहीं होगाष और स्थिरता लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कई नजरियों को अपनाने की जरूरत है।

कैसा बनेगा संतुलन
चूंकि कार निर्माता इस जटिल परिदृश्य के जरिए संतुलन बनाने की कोशिश में जुटे हैं। वे भविष्य के लिए इलेक्ट्रिक तकनीक में निवेश करने और वर्तमान में कंपनियों को लाभदायक रखने के बीच खुद को बंटा हुआ पाते हैं। ICE उत्पादन टाइमलाइन का विस्तार कुछ लचीलापन प्रदान करेगा। जो संसाधन पुन: ओरिएंटेशन और जोखिम शमन को ज्यादा प्रभावी ढंग से सक्षम कर सकता है।

हालांकि, दीर्घकालिक दृष्टि साफ है। और वह यह कि इलेक्ट्रिफिकेशन एक पूर्ण तथ्य है। यह कितना तेज और सहज होगा, यही सवाल है। इसलिए, कार निर्माताओं की तत्काल प्राथमिकता अल्पकालिक उत्तरजीविता (शॉर्ट टर्म सर्वाइवल) और दीर्घकालिक स्थिरता (लॉन्ग टर्म सस्टेनबिलिटी) के बीच एक नाजुक संतुलन बनाना होगी।
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आखिरकार, विद्युतीकरण की रफ्तार तकनीकी विकास और सरकारी नीतियों के मिश्रण पर आधारित होगी। जो उपभोक्ता स्वीकृति के प्रति प्रतिक्रिया में क्रमिक रूप से विकसित की जाती हैं। लेकिन शायद सबसे महत्वपूर्ण बात है आर्थिक कारक। शून्य उत्सर्जन (जीरो एमिशन) का रास्ता निश्चित रूप से शुरुआत में सोचे गए की तुलना में ज्यादा कठिन और जटिल होने वाला है क्योंकि उद्योग का लगातार विकसित हो रहा है।
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