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ई20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित: केवल पुरानी गाड़ियों के माइलेज में आ सकती है गिरावट- FADA अध्यक्ष का एलान

Tue, 01 Sep 2026 08:13 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों के बीच चल रही चिंताओं पर फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष साई गिरीधर ने का कहना है कि E20 पेट्रोल से वाहनों को किसी तरह की बड़ी समस्या नहीं है। हालांकि 10 से 15 साल पुरानी कुछ कारों के माइलेज में कमी देखी जा सकती है।
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E20 Petrol - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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देश में E20 ईंधन (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) के इस्तेमाल को लेकर बनी आशंकाओं को दूर करते हुए 'फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन' (FADA) के अध्यक्ष साईं गिरिधर ने स्पष्ट किया है कि यह ईंधन वाहनों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। 
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FADA के 8वें ऑटो रिटेल कॉन्क्लेव के दौरान एएनआई से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि E20 कोई नई या अनजान चीज नहीं है। बल्कि यह सामान्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाकर तैयार किया गया एक आजमाया हुआ और परीक्षण किया गया ईंधन है। जिसे सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रमाणित किया गया है।

E20 ईंधन का पुरानी और नई गाड़ियों के प्रदर्शन और माइलेज पर क्या असर पड़ेगा?

फाडा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि 2023 से भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में आने वाली सभी नई गाड़ियां पूरी तरह से ई20 अनुकूल हैं। 
  • पुराने वाहनों पर प्रभाव: E20 ईंधन के प्रयोग से केवल पुरानी या लिगेसी कारों (जो 10, 12 या 15 साल पुरानी हैं) के माइलेज में थोड़ी गिरावट आ सकती है। लेकिन इससे वाहनों में कोई बड़ी तकनीकी समस्या या खराबी आने की संभावना नहीं है।
  • ग्राहकों की शंकाओं का समाधान: साईं गिरिधर ने स्वीकार किया कि शुरुआत में डीलर्स ग्राहकों के सवालों के जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं थे। हालांकि, अब सभी प्रमुख वाहन निर्माताओं ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर साझा किए हैं। जिससे डीलरशिप अब वैज्ञानिक और पेशेवर तरीके से ग्राहकों की सभी शंकाओं का समाधान कर रही हैं।

FADA President Sai Giridhar - फोटो : ANI

भारतीय ऑटो उद्योग की भावी ग्रोथ में ग्रामीण बाजार की क्या भूमिका होगी?

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के रुझानों पर बात करते हुए FADA अध्यक्ष ने कहा कि आगामी त्यौहारी सीजन से पहले ग्रामीण भारत वाहनों की मांग का मुख्य चालक बनकर उभर रहा है:
  • ग्रामीण मांग में उछाल: पिछले छह महीनों के दौरान ग्रामीण बाजारों में महीने दर महीने मजबूत वृद्धि देखी गई है।
  • शहरी बाजार बनाम ग्रामीण भारत: उन्होंने कहा कि ऑटो उद्योग के विकास की अगली कहानी शहरों में नहीं, बल्कि 'भारत' (ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों) में लिखी जाएगी। नीतिगत फैसलों जैसे ब्याज दरों में कटौती और टैक्स सुधारों से भी इस मांग को काफी बल मिला है।

क्या भारत 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक व्हीकल अपनाने के लक्ष्य को हासिल कर पाएगा?

भारत के ईवी अपनाने की दर पर अपनी राय बदलते हुए साईं गिरिधर ने काफी सकारात्मक दृष्टिकोण पेश किया:
  • लक्ष्य से आगे निकलने की उम्मीद: उन्होंने कहा कि देश जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उससे लगता है कि भारत 2030 तक 30 प्रतिशत ईवी अपनाने के सरकारी लक्ष्य को समय से पहले ही पार कर लेगा।
  • बदलता नजरिया: उन्होंने स्वीकार किया कि अगर चार-पांच महीने पहले उनसे यह सवाल पूछा जाता, तो वह इसे असंभव बताते। लेकिन वर्तमान में इंफ्रास्ट्रक्चर और मांग को देखते हुए यह लक्ष्य पूरी तरह से व्यावहारिक और हासिल करने योग्य लग रहा है। 
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Car Showroom - फोटो : AI

ऑटो डीलर्स और रिटेल इकोसिस्टम के लिए FADA ने सरकार से क्या मांगें की हैं?

फाडा अध्यक्ष ने बताया कि बदलती उपभोक्ता अपेक्षाओं, एआई (AI), तकनीक और सेकंड-हैंड कार बाजार के तेजी से बढ़ने के कारण ऑटो रिटेल का स्वरूप बदल रहा है। इस व्यवस्था को और सुचारू बनाने के लिए उन्होंने ये सिफारिशें की हैं:
  • डिजिटल रजिस्ट्रेशन: वाहन पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह से कागज रहित बनाया जाए।
  • यूज्ड कार ट्रांसफर: पुरानी गाड़ियों के मालिकाना हक के हस्तांतरण की प्रक्रिया को और सरल किया जाए।
  • ट्रेड सर्टिफिकेट: राज्यों में व्यापार को आसान बनाने के लिए "वन स्टेट, वन ट्रेड सर्टिफिकेट" की नीति लागू की जाए। ताकि छोटे शहरों और कस्बों तक ऑटो रिटेल का विस्तार तेजी से हो सके। 
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