E20 पेट्रोल डिस्पेंसर (सांकेतिक तस्वीर)
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केंद्र सरकार और मंत्रालय का इस पर क्या रुख है?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस मुद्दे पर "रोडमैप फॉर एथेनॉल ब्लेंडिंग इन इंडिया 2020-25" का हवाला दिया है, जिसे एक अंतर-मंत्रालयी समिति ने तैयार किया है।
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इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मूल रूप से E10 फ्यूल के लिए बनी कारों में E20 ईंधन डालने पर माइलेज में केवल बहुत मामूली कमी आती है।
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सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने समिति को सूचित किया है कि इंजन के हार्डवेयर और कैलिब्रेशन में सुधार करके इस मामूली नुकसान को भी और कम किया जा सकता है।
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E20 ईंधन के परीक्षणों के दौरान गाड़ी के परफॉर्मेंस, इंजन के घिसने या इंजन ऑयल के खराब होने जैसी कोई बड़ी समस्या नहीं पाई गई है।
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सरकार इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा क्यों दे रही है?
केंद्र सरकार देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग को अपनी एक खास रणनीति के तहत बढ़ावा दे रही है, जिसके तीन मुख्य उद्देश्य हैं:
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कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के आयात को कम करना।
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कार्बन उत्सर्जन में कटौती करना।
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भारत की बायोफ्यूल अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना।
हालांकि, इन फायदों के बावजूद वाहन मालिकों, विशेषकर पुराने वाहनों का इस्तेमाल करने वालों के मन में माइलेज और इंजन की लंबी उम्र को लेकर चिंताएं बनी हुई थीं। जिन्हें अब कंपनी और सरकार ने स्पष्ट कर दिया है।