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E20 Fuel: क्या E20 पेट्रोल से घबराईं देश की बड़ी कार कंपनियां? रिपोर्ट में सामने आया ईमेल्स का सच, जानें मामला

Fri, 14 Aug 2026 10:17 AM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

E20 petrol: देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल लागू होने के बाद, जहां एक तरफ आम जनता के मन में सवाल खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ टाटा, मारुति और महिंद्रा जैसी दिग्गज ऑटो कंपनियां भी इसके असर को लेकर डरी हुई हैं। हाल ही में लीक हुई एक रिपोर्ट और आंतरिक ईमेल्स के खुलासे से हड़कंप मच गया है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला...
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
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E20 petrol controversy: भारत में ई20 को लेकर चल रही बहस के बीच एक नई लीक रिपोर्ट ने ऑटो इंडस्ट्री की अंदरूनी चिंता को जाहिर किया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट की मानें तो टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी और महिंद्रा के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल वाले E20 ईंधन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए थे।

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खास तौर पर कुछ फ्यूल सैंपल में क्लोराइड और नमी की ज्यादा मात्रा मिलने को लेकर चिंता जताई गई है। हालांकि एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि बाद में ऑटो उद्योग की संस्था SIAM ने सरकार को भेजी अपनी शिकायत वापस ले ली और कहा कि इस्तेमाल किए गए आंकड़ों की और जांच तथा वैलिडेशन जरूरी है।

E20 पेट्रोल को लेकर क्या था डर?

  • सरकार का कहना है कि ई20 पेट्रोल से प्रदूषण कम होगा और पेट्रोल के आयात पर निर्भरता घटेगी। इसीलिए एक अप्रैल से देशभर में ई 20 लागू कर दिया गया, लेकिन लेकिन रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ऑटो कंपनियों के अधिकारियों के बीच ईमेल बातचीत में E20 फ्यूल की गुणवत्ता को लेकर चिंता सामने आई।
  • अधिकारियों का ध्यान खास तौर पर क्लोराइड और मॉइस्चर यानी नमी की मात्रा पर था। कंपनियों की चर्चा में चिंता यह थी कि अगर इनकी मात्रा तय सीमा से ज्यादा हो, तो वाहन के कुछ हिस्सों में समस्या पैदा हो सकती है।

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21 राज्यों के 250 से ज्यादा पेट्रोल पंपों से लिए सैंपल

  • रॉयटर्स के अनुसार, कई ऑटोमेकर्स ने करीब एक साल में 21 राज्यों के 250 से ज्यादा पेट्रोल पंप से फ्यूल सैंपल इकट्ठा करके उनकी जांच की। इसके बाद रिपोर्ट में इनमें से 18 राज्यों के कई सैंपल में क्लोराइड और नमी की मात्रा काफी ज्यादा पाई गई थी।
  • यही आंकड़े ऑटो कंपनियों के बीच हुई आंतरिक बातचीत और सरकार को भेजी गई SIAM की शिकायत में चिंता का आधार बने थे।


क्लोराइड और नमी से क्यों बढ़ी चिंता?

  • ऑटो इंडस्ट्री की चर्चा में क्लोराइड की अधिक मात्रा को वाहन के कुछ हिस्सों में जंग और घिसाव से जोड़ा गया। वहीं नमी को ईंधन की गुणवत्ता से जुड़ी संभावित समस्या माना जा रहा है।
  • यानी कंपनियों की चिंता सिर्फ इथेनॉल की मात्रा को लेकर नहीं थी, बल्कि सवाल यह भी था कि E20 पेट्रोल में contamination कितना है और इसका वाहन के पार्ट्स पर वास्तविक असर क्या हो सकता है।
  • हालांकि, अभी यह निष्कर्ष नहीं निकाला गया है कि हर जगह मिलने वाला E20 पेट्रोल इस तरह की समस्या पैदा कर रहा है।


सार्वजनिक तौर पर E20 का समर्थन, अंदर से चिंता?

  • रिपोर्ट में एक पहलू यह भी बताया जा रहा है कि ऑटो कंपनियां सार्वजनिक तौर पर E20 फ्यूल को लेकर समर्थन करती दिख रही हैं, लेकिन अंदरूनी ईमेल बातचीत में फ्यूल की गुणवत्ता से जुड़ी चिंता सामने आई।
  • यानी बहस सिर्फ यह नहीं है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जा रहा है, बल्कि यह भी है कि ईंधन की क्वालिटी तय मानकों के मुताबिक बनी हुई है या नहीं।


सरकार की जांच में क्या सामने आया?

  • दूसरी ओर सरकार और सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि बड़े स्तर पर किए गए परीक्षणों में चिंता की कोई बड़ी वजह नहीं मिली।
  • पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि SIAM का पत्र मिलने से करीब दो सप्ताह पहले ही तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों पर ईंधन की जांच शुरू कर दी थी। उनके अनुसार इस जांच में सिर्फ चार मामले मिले।
  • सरकारी तेल कंपनियों ने भी कहा कि रैंडम और वैज्ञानिक परीक्षणों में E20 फ्यूल को लेकर ऐसी कोई बड़ी समस्या नहीं मिली, जिससे चिंता करने की जरूरत हो।


महिंद्रा ने रिपोर्ट के निष्कर्ष को गलत बताया

  • हालांकि इसके बाद महिंद्रा कंपनी की भी बात सामने आई। रॉयटर्स की रिपोर्ट पर महिंद्रा ने कहा कि उसके अधिकारियों की ईमेल बातचीत के आधार पर निकाले गए निष्कर्ष पूरी तरह गलत हैं।
  • कंपनी का कहना है कि इस तरह की व्याख्या उसके रुख को सही तरीके से नहीं दर्शाती। वहीं मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स ने इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया।


E20 पर कंपनियों की चिंता क्यों अहम है?

  • E20 का इस्तेमाल देशभर में बढ़ने के बाद कार मालिकों के बीच भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में अगर ऑटो कंपनियों के अधिकारी भी फ्यूल क्वालिटी को लेकर चिंता जता रहे थे, तो यह मामला निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण हो सकता है।
  • हालांकि, इसे E20 के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष मानना जल्दबाजी हो सकती है, क्योंकि जब तक ज्यादा बड़े स्तर की वैज्ञानिक जांच और स्वतंत्र परीक्षणों के परिणाम सामने नहीं आते, तब तक तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं होगी। 
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