E20 Explained By Expert: भारत में अब पेट्रोल पंपों पर आम ईंधन की जगह E20 (20% इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल मिल रहा है। प्रदूषण और कच्चे तेल के आयात को कम करने के लिए सरकार ने इसे लागू तो कर दिया है, लेकिन इसके बाद से लोगों की माइलेज और इंजन से जुड़ी समस्याएं भी सामने आने लगी हैं। खासकर आठ से 12 साल पुरानी मोटरसाइकिल, स्कूटर और कार मालिकों की शिकायत है कि इस ईंधन से उनकी गाड़ियों का माइलेज गिर रहा है और इंजन में तकनीकी खराबी आ रही है। तो आखिर E20 पेट्रोल को लेकर इतनी चर्चा क्यों हो रही है? पुरानी गाड़ियों पर इसका क्या असर पड़ सकता है और इसका समाधान क्या है? इन सवालों पर अमर उजाला ने ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा से विस्तार से बात की। आइए जानते हैं इस पर एक्सपर्ट की राय...
5 साल पहले लागू हुई योजना
पुरानी गाड़ियों पर क्यों आ रही है दिक्कत?
यहां पर ई20 पेट्रोल के आने के बाद से बाजार में गाड़ियों को दो श्रेणियों में देखा जा रहा है:
1. साल 2023 के बाद की नई गाड़ियां
जो कारें या दोपहिया वाहन साल 2023 या उसके बाद बाजार में आए हैं, वे ज्यादातर तकनीकी रूप से E20 कंपैटिबल (अनुकूल) हैं। इन नए इंजनों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे बिना किसी खराबी के इस ईंधन को झेल सकें। हालांकि, इन नए वाहनों के मालिकों ने भी शिकायत की है कि शुद्ध पेट्रोल की तुलना में E20 ईंधन के इस्तेमाल से उनके वाहनों के माइलेज (परफॉर्मेंस) में दो से तीन प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की जा रही है।
2. आठ से 12 साल पुरानी गाड़ियां
एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा का कहना है कि हमारे देश में अभी भी एक बड़ा मध्यमवर्ग और ग्रामीण आबादी आठ से दस साल या 12 साल पुरानी बाइक, स्कूटर या कार का इस्तेमाल कर रही है। इन गाड़ियों के मालिकों से सबसे गंभीर शिकायतें मिल रही हैं:
क्या बड़ी तेल कंपनियों की ब्लेंडिंग में कोई कमी है?
यह सवाल पूछने पर कि क्या इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी अलग-अलग कंपनियों के पेट्रोल की गुणवत्ता में कोई अंतर होता है? तो एक्सपर्ट ने इस पर एक बड़ी बात कही।
तो इन परेशानियों का क्या है समाधान?
इस पर विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने स्पष्ट कहा कि इस बहस से राजनीति को अलग रखकर पूरी तरह से वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का समय आ गया है, यह दो प्रकार से संभव है।