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E20 पेट्रोल पर बड़ा खुलासा: क्या ये सिर्फ एक एक्सपेरिमेंट है? अटॉर्नी जनरल की सफाई, जानिए क्या है पूरा मामला

Wed, 01 Jul 2026 07:56 PM IST
Suyash Pandey ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीे

सार

Clarification E20 Petrol Is Not an Experiment: E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल सिर्फ एक प्रयोग वाले दावे को भारत सरकार ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। अटॉर्नी जनरल ने स्पष्ट किया कि कोर्ट में ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया। जानिए E20 विवाद की असली वजह, सुप्रीम कोर्ट में क्या मामला चल रहा है और सरकार का आधिकारिक रुख क्या है।
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क्या सच में E20 पेट्रोल सिर्फ एक एक्सपेरिमेंट है? - फोटो : एआई
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विस्तार
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इन दिनों देश भर के पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल बिक रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि E20 पेट्रोल सिर्फ एक "प्रयोग" है।

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इस खबर ने कार मालिकों और नई गाड़ी खरीदने वालों की चिंता बढ़ा दी थी। लेकिन अब भारत के अटॉर्नी जनरल ने इस पर आधिकारिक सफाई दी है। आइए, समझते हैं कि सरकार ने क्या कहा है और सुप्रीम कोर्ट में असल विवाद क्या चल रहा है।


क्या सच में E20 पेट्रोल एक प्रयोग है?

इसका जवाब है बिल्कुल नहीं। भारत के अटॉर्नी जनरल ने स्पष्ट किया है कि मीडिया में चल रही खबरें पूरी तरह से झूठी हैं। सरकार की तरफ से कोर्ट में ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया है।

  • यह नेशनल पॉलिसी है: E20 पेट्रोल कोई ट्रायल नहीं है, यह भारत की एक पक्की नेशनल पॉलिसी है। इसके सभी टेस्ट पहले ही सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं।
  • भविष्य की तैयारी: हकीकत यह है कि सरकार अब E20 से भी आगे निकल चुकी है। इस समय देश में E22, E25, E27 और E30 जैसे एडवांस फ्यूल के ट्रायल चल रहे हैं, ताकि भविष्य में इन्हें लागू किया जा सके।

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तो फिर सुप्रीम कोर्ट में क्या विवाद चल रहा है?

अगर पेट्रोल सही है, तो कोर्ट में केस क्यों चल रहा है? दरअसल, यह पूरा मामला तेल कंपनियों और इथेनॉल बनाने वाली फैक्ट्रियों के बीच का है। असली समस्या इथेनॉल की कमी नहीं, बल्कि जरूरत से ज्यादा उत्पादन है। इसे ऐसे समझें:

  • बंपर उत्पादन: साल 2021-22 में जब सरकार ने 20% इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा, तो प्राइवेट कंपनियों को सस्ते लोन और सब्सिडी दी गई।
  • जगह की कमी: इसका नतीजा यह हुआ कि देश में इथेनॉल का इतना ज्यादा उत्पादन हो गया कि तेल कंपनियों के पास अब उसे खरीदने या स्टोर करने की जगह ही नहीं बची है।


दिक्कत कहां आ रही है?

  • तेल कंपनियों की मजबूरी: तेल कंपनियां सिर्फ उतना ही इथेनॉल खरीद सकती हैं, जितना पेट्रोल में मिलाना (20%) जरूरी है।
  • फैक्ट्रियों की परेशानी: इथेनॉल फैक्ट्रियों को अपना एक्स्ट्रा बना हुआ माल खुले बाजार में या किसी और को बेचने की इजाजत नहीं है।

यही वजह है कि फैक्ट्रियों ने तेल कंपनियों के खिलाफ अलग-अलग राज्यों के हाई कोर्ट में केस कर दिया था, ताकि कंपनियां उनका पूरा माल खरीदें। अब सरकार इन सभी केसों को सुप्रीम कोर्ट में एक साथ सुलझाना चाहती है।


क्या है इस समस्या का समाधान?

अक्तूबर 2026 से तेल कंपनियों और इथेनॉल फैक्ट्रियों के बीच नए कॉन्ट्रैक्ट शुरू होने हैं, इसलिए इस विवाद का जल्द सुलझना जरूरी है। इसके दो मुख्य उपाय हैं:

  • फ्लेक्स फ्यूल वाली गाड़ियां: जब इथेनॉल ज्यादा बन रहा है, तो सरकार को E85 या E100 से चलने वाली गाड़ियों के प्रोजेक्ट्स को तेजी से बाजार में उतारना होगा, ताकि एक्स्ट्रा इथेनॉल का इस्तेमाल हो सके।
  • बेहतर मैनेजमेंट सिस्टम: एक ऐसा सिस्टम बनाना होगा जिससे फैक्ट्रियों को पहले से पता हो कि तेल कंपनियों को असल में कितने माल की जरूरत है। इससे वे जरूरत से ज्यादा उत्पादन नहीं करेंगे।
  • फिलहाल क्या स्थिति है: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों को यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया है। यानी जब तक कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

आम जनता और कार मालिकों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है और यह बंद नहीं होने वाला है। कोर्ट का मामला सिर्फ कंपनियों के बीच सप्लाई और खरीद को लेकर है।

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