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Manual vs Automatic Car: बढ़ती उम्र में दिमाग को तेज रखेगी मैनुअल कार, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

Fri, 03 Jul 2026 06:59 AM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ऑटोमोबाइल जगत में ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन का चलन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में कार प्रेमी मैनुअल गियरबॉक्स को पसंद करते हैं। अब एक जापानी अध्ययन ने मैनुअल कारों के पक्ष में एक दिलचस्प दावा किया है।
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Manual Gearbox Car Driving - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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पूरी दुनिया में ऑटोमैटिक गाड़ियों का चलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन आज भी ऐसे कार प्रेमियों की कमी नहीं है जो मैनुअल गियरबॉक्स (मैनुअल ट्रांसमिशन) को दिल से प्यार करते हैं। अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो मैनुअल कारों के वजूद को बचाने की वकालत करते हैं, तो आपके लिए एक बेहद शानदार खबर है। एक नई रिसर्च से पता चला है कि अगर आप बढ़ती उम्र में अपने दिमाग को तंदुरुस्त और एक्टिव रखने के लिए रोज एक बेहतरीन 'वर्कआउट' देना चाहते हैं, तो आपको मैनुअल गाड़ी चलाना जारी रखना चाहिए। जापान में हुए एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि मैनुअल गियर वाली कार चलाने से दिमाग का एक खास हिस्सा उत्तेजित होता है, जो ऑटोमैटिक कार चलाने से बिल्कुल नहीं होता। सीधे शब्दों में कहें तो मैनुअल कार चलाना आपके दिमाग की सेहत को काफी बेहतर बना सकता है।

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दिमाग के किस हिस्से पर और कैसे असर डालती है मैनुअल ड्राइविंग?

यह महत्वपूर्ण रिसर्च तोहोकू यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट, एजिंग एंड कैंसर में न्यूरोइमेजिंग का काम संभालने वाले प्रोफेसर रियूटा कावाशिमा द्वारा की गई है:

  • प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स का एक्टिव होना: प्रोफेसर कावाशिमा की रिसर्च में पाया गया कि मैनुअल कार चलाने की जो पूरी शारीरिक प्रक्रिया होती है, वह इंसानी दिमाग के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स वाले हिस्से को पूरी तरह सक्रिय कर देती है।

  • क्या काम करता है यह हिस्सा: दिमाग का यही वह क्षेत्र है जो हमारी याददाश्त, एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता को संभालता है।

  • एक साथ कई मोर्चों पर काम: जब आप एक मैनुअल कार चलाते हैं, तो आपका दिमाग एक ही समय में ट्रैफिक की रफ्तार को भांप रहा होता है, पैर से क्लच को दबाने-छोड़ने को कंट्रोल करता है, हाथ से गियर बदलता है और पैर से एक्सीलेटर का सही तालमेल बिठाता है। इन सभी चीजों के बीच लगातार संतुलन बनाए रखने के लिए एक उच्च स्तर के जुड़ाव की जरूरत होती है, जो हर पल ड्राइवर का ध्यान पूरी तरह बांध कर रखता है।

ऑटोमैटिक के मुकाबले मैनुअल कार कैसे देती है दिमागी कसरत?

दिमाग को हर दिन इन सभी कामों में एक साथ उलझाए रखना उसके लिए एक हल्के व्यायाम की तरह काम करता है:

  • न्यूरल पाथवेज का सक्रिय होना: यह दिमागी कसरत न्यूरल पाथवेज को उत्तेजित करती है, जिससे उम्र बढ़ने के साथ संज्ञानात्मक कार्यों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

  • ऑटोमैटिक गाड़ियां क्यों हैं पीछे: इसके उलट, किसी ऑटोमैटिक या सेमी-ऑटोनॉमस गाड़ी में आराम से बैठकर सफर करने या उसे चलाने में दिमाग को इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती। जिससे वह इस जरूरी कसरत से चूक जाता है। मैनुअल गाड़ी दिमाग को जिस तरह एक्टिव रखती है, उसका मुकाबला ऑटोमैटिक गाड़ियां कभी नहीं कर सकतीं।

क्या फायदे होने के बावजूद खत्म हो रही हैं मैनुअल कारें?

यह स्टडी एक ऐसे समय पर आई है जब दुनिया भर में पारंपरिक स्टिक शिफ्ट या मैनुअल कारों की लोकप्रियता ऑटोमैटिक के मुकाबले लगातार कम हो रही है:

  • दम तोड़ती नस्ल: अपने तमाम बेहतरीन फायदों के बावजूद, दुनिया भर के बाजारों से मैनुअल कारें धीरे-धीरे गायब हो रही हैं। और इन्हें एक दम तोड़ती हुई नस्ल के रूप में देखा जा रहा है।

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भारतीय ऑटो बाजार में मैनुअल और ऑटोमैटिक की क्या स्थिति है?

पूरी दुनिया में भले ही मैनुअल कारें कम हो रही हों, लेकिन भारत की कहानी अभी थोड़ी अलग है:

  • भारतीय बाजार पर दबदबा: भारत में आज भी कुल कार बिक्री में मैनुअल ट्रांसमिशन वाली गाड़ियों का ही बोलबाला है। कम शुरुआती कीमत, हाईवे पर बेहतर माइलेज और ग्रामीण बाजारों में मजबूत पकड़ के कारण भारत के कार मार्केट में मैनुअल गाड़ियों की हिस्सेदारी लगभग 55-60% बनी हुई है।

  • शहरों में बदल रहा है रुख: हालांकि, बड़े शहरों और महानगरों में ऑटोमैटिक कारों की पैठ बहुत तेजी से बढ़ रही है। भारी और घने ट्रैफिक के चलते होने वाली परेशानी से बचने के लिए शहरी खरीदार अब ऑटोमैटिक को तरजीह दे रहे हैं। आलम यह है कि देश के टॉप शहरों में बिकने वाली हर तीन नई कारों में से एक कार, अब ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन वाली होती है।
     

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