शाम के टूर पर रहेगा खास फोकस
यह सेवा मुख्य रूप से ईवनिंग टूर के लिए तैयार की गई है।
एक अधिकारी के मुताबिक, "क्योंकि संग्रहालय शाम 6 बजे बंद हो जाते हैं, इसलिए टूर 6 बजे के बाद शुरू होगा और फिर अन्य प्रमुख स्थलों तक जाएगा।"
इससे उन पर्यटकों को फायदा मिलेगा जो शाम के समय शहर घूमना पसंद करते हैं।
डबल-डेकर बस का रूट और प्रमुख स्थल
पर्यटन विभाग की योजना के अनुसार, बस सेवा की शुरुआत प्रधानमंत्री संग्रहालय से होगी और यह सेंट्रल दिल्ली के कई अहम स्थलों को कवर करेगी।
प्रस्तावित रूट
प्रधानमंत्री संग्रहालय -- भारत मंडपम -- राष्ट्रीय युद्ध स्मारक -- नया संसद भवन परिसर -- दिल्ली हाटइस रूट के जरिए पर्यटकों को राजधानी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व के स्थलों का अनुभव एक ही यात्रा में मिल सकेगा।
इलेक्ट्रिक बस, CSR के तहत मिली सुविधा
यह डबल-डेकर बस इलेक्ट्रिक है और इसका निर्माण अशोक लेलैंड द्वारा किया गया है।
बस को कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहल के तहत उपलब्ध कराया गया है।
पहले यह बस परिवहन विभाग के ओखला डिपो में थी, जिसे अब पर्यटन विभाग को सौंप दिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि यह बस लुटियंस दिल्ली में बिना किसी तकनीकी दिक्कत के आराम से चल सकती है। जहां ओवरहेड तार या पेड़ों की निचली शाखाओं से कोई बाधा नहीं होगी।
क्षमता, साज-सज्जा और ऑनबोर्ड गाइड
डबल-डेकर बस में ड्राइवर के अलावा 63 से अधिक यात्रियों के बैठने की क्षमता है।
बस को इंडिया गेट, सिग्नेचर ब्रिज, भारत मंडपम जैसे दिल्ली के प्रमुख स्थलों की तस्वीरों से सजाया जाएगा।हर यात्रा में एक टूर गाइड भी मौजूद रहेगा, जो यात्रियों को हर पड़ाव का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व समझाएगा।
किराया और आयु वर्ग
- वयस्कों के लिए किराया: 500 रुपये
- 6 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए किराया: 300 रुपये
यह शुल्क पूरे टूर अनुभव, गाइड सेवा और दर्शनीय स्थलों की जानकारी को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है।
हेरिटेज टूर पर जोर, शॉपिंग ज़ोन नहीं प्राथमिकता
अधिकारियों ने बाज़ारों और शॉपिंग हब्स पर आधारित टूर की संभावना पर भी चर्चा की, लेकिन फिलहाल फोकस ऐतिहासिक और विरासत स्थलों पर रखने का फैसला किया गया है।
उनका मानना है कि डबल-डेकर बसों का अनुभव हेरिटेज टूरिज़्म के लिए ज्यादा उपयुक्त है।
1989 के बाद पहली बार लौटेंगी डबल-डेकर बसें
कभी दिल्ली की सड़कों पर आम नजर आने वाली डबल-डेकर बसें, दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की ‘सुविधा’ बसों के रूप में चलाई जाती थीं।
हालांकि, पुराना बेड़ा होने के चलते इन्हें 1989 में बंद कर दिया गया था।
अब करीब तीन दशक बाद, ये आइकॉनिक बसें नई पहचान और नए उद्देश्य के साथ दिल्ली की सड़कों पर लौटने को तैयार हैं। इस बार शहर दिखाने के लिए, न कि सिर्फ सफर कराने के लिए।