एक समय था जब डबल-डेकर बसें भारत के मेगासिटी की सड़कों पर अपनी शानदार मौजूदगी दर्ज कराती थीं। जो बड़े पैमाने पर परिवहन प्रणालियों और इन मेट्रोपोलिज की सांस्कृतिक पहचान के पीछे एक प्रमुख प्रेरक शक्ति के रूप में काम करती थीं।
एक समय था जब डबल-डेकर बसें भारत के मेगासिटी की सड़कों पर अपनी शानदार मौजूदगी दर्ज कराती थीं। जो बड़े पैमाने पर परिवहन प्रणालियों और इन मेट्रोपोलिज की सांस्कृतिक पहचान के पीछे एक प्रमुख प्रेरक शक्ति के रूप में काम करती थीं।
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हालांकि, लगभग दो दशक पहले, ये प्रतिष्ठित बसें मुंबई को छोड़कर लगभग हर शहर में बंद हो गई थीं। यह गिरावट सड़कों पर बढ़ती भीड़, माइलेज के मुद्दों और सार्वजनिक परिवहन क्षमता में उनके योगदान के बारे में बढ़ते सवालों के कारण हुई।
आज, कई भारतीय शहर सड़कों पर डबल-डेकर बसें फिर से शुरू कर रहे हैं। आमतौर पर एक आकर्षक नए इलेक्ट्रिक अवतार में। हैदराबाद और कोलकाता पहले ही इन बड़े वाहनों को सड़कों पर वापस ला चुके हैं। अहमदाबाद और बंगलूरु भी ऐसा करने की प्रक्रिया में हैं। यहां तक कि कुछ छोटे शहरों, जैसे कि तिरूपति, ने भी अपने बेड़े में डबल-डेकर बसें शामिल की हैं।
Nitin Gadkari unveiled Electric Double-Decker Bus in Mumbai
- फोटो : Twitter
हैदराबाद नगर विकास प्राधिकरण (एचएमडीए) के मेट्रोपॉलिटन कमिश्नर अरविंद कुमार कहते हैं, जिन्होंने शहर में इन बसों की शुरुआत की थी, "हमें सोशल मीडिया पर डबल-डेकर बसें शुरू करने के लिए कई अनुरोध हासिल हुए, इसलिए हमने उन्हें इलेक्ट्रिक बसों के हमारे तेजी से बढ़ते बेड़े में जोड़ने का फैसला किया। इस समय, शहर में छह डबल-डेकर बसें पहले से ही सेवा में हैं और इन्हें अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। यह तो एक शुरूआत है; हमने पहले ही अतिरिक्त 25 बसों का ऑर्डर दे दिया है।"
मुंबई देश का एकमात्र ऐसा शहर है जिसने डबल-डेकर बसों के साथ अपना रोमांस कभी खत्म नहीं किया। यह इस साल की शुरुआत में इलेक्ट्रिक एसी डबल-डेकर बसें शुरू करने वाला पहला शहर बन गया। लंदन की प्रतिष्ठित डबल-डेकर बसों की तर्ज पर बनाई गई ये बसें पहली बार 1937 में शहर में पेश की गईं थी। 1960 के दशक तक, मुंबई (तब बॉम्बे) में कम से कम 900 बसें इसकी सड़कों पर घूमती थीं।
हालांकि, अन्य शहर, भले ही कम संख्या में, इलेक्ट्रिक डबल-डेकर पेश कर रहे हैं।
बंगलूरु में, डबल-डेकर बसें, जिन्हें 1997 में सड़कों से हटा दिया गया था, इस साल के आखिर तक सिलेक्टेड हाई-डेंसिटी वाले कॉरिडोर पर चलने की संभावना है।