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Auto Tariff: ट्रंप की टैरिफ नीति का वाहन कंपनियों पर सीमित असर, कंपोनेंट निर्माता होंगे ज्यादा प्रभावित

Thu, 27 Mar 2025 12:37 PM IST
नीतीश कुमार ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Auto Tariff In America: अमेरिकी सरकार ने ऑटोमोबाइल आयात पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। ऐसे में भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाली गाड़ियों के महंगे होने से कंपनियों की सेल्स घट सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि टैरिफ का असर ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों पर ज्यादा होगा।
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ऑटोमोबाइल टैरिफ - फोटो : PTI
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विस्तार
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भारी टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है, जिससे भारतीय ऑटो कंपोनेंट उद्योग पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भारत से अमेरिका को निर्यात करने वाले ऑटो पार्ट्स निर्माता इस टैरिफ के कारण ज्यादा प्रभावित होंगे, जबकि वाहन निर्माता कंपनियों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।
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ट्रम्प ने बुधवार को घोषणा की कि अमेरिका में ऑटोमोबाइल के आयात पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा, जो अप्रैल से लागू होगा। इसके बाद मई तक इंजन, ट्रांसमिशन और इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स जैसी प्रमुख ऑटो पार्ट्स पर भी अतिरिक्त 25% शुल्क लगाया जाएगा। इस फैसले से भारत के ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग - फोटो : Freepik
ऑटो कंपोनेंट उद्योग पर होगा ज्यादा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय ऑटो कंपनियां अमेरिका को तैयार वाहन निर्यात नहीं करती हैं, इसलिए उन पर इसका असर सीमित रहेगा। हालांकि, भारतीय ऑटो कंपोनेंट उद्योग अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करता है, जिससे यह नया टैरिफ उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। वित्त वर्ष 2024 में भारत से अमेरिका को 6.79 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स निर्यात किए गए, जबकि अमेरिका से भारत को 1.4 अरब डॉलर के कंपोनेंट्स 15% ड्यूटी पर आयात किए गए थे। पहले तक अमेरिका भारतीय ऑटो पार्ट्स पर शून्य शुल्क लगाता था, लेकिन अब यह नीति बदल गई है।

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इंडस्ट्री को टैरिफ वॉर से मिल सकता है फायदा
जाटो डायनामिक्स इंडिया (JATO Dynamics India) के प्रेसिडेंट और डायरेक्टर रवि जी भाटिया का कहना है कि भारत अकेला ऐसा देश नहीं है, जिस पर यह टैरिफ लागू हुआ है। उन्होंने कहा, "हालांकि, यह झटका जरूर है, लेकिन इसे ‘सुनामी’ नहीं कहा जा सकता। भारतीय आपूर्तिकर्ता अमेरिकी बाजार में अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए रणनीतियां विकसित करेंगे।"
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कार प्लांट - फोटो : Freepik
भाटिया ने यह भी कहा कि भारत की सस्ती मैन्युफैक्चरिंग लागत अमेरिकी बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रखने में मदद करेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह कदम उन भारतीय वाहन निर्माताओं की योजनाओं को प्रभावित कर सकता है, जो अमेरिकी बाजार में विस्तार की सोच रहे थे, खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ।

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ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, कुछ प्रमुख ऑटो कंपोनेंट निर्माता जैसे मदरसन ग्रुप पहले से ही मैक्सिको और कनाडा में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित कर चुके हैं, जिससे उन्हें नॉर्थ अमेरिका फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (NAFTA) का लाभ मिलता है।

समवर्धना मदरसन इंटरनेशनल लिमिटेड के निदेशक लक्ष वामन सहगल ने अपनी पिछली तिमाही की अर्निंग रिपोर्ट में कहा था कि कंपनी का ‘ग्लोबली लोकल’ दृष्टिकोण है और उसके निर्माण संयंत्र ग्राहक स्थान के पास स्थित हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की टैरिफ बढ़ोतरी का असर ग्राहकों पर ट्रांसफर किया जाएगा, जिससे कंपनी को ज्यादा नुकसान नहीं होगा।


 
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