ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग
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ऑटो कंपोनेंट उद्योग पर होगा ज्यादा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय ऑटो कंपनियां अमेरिका को तैयार वाहन निर्यात नहीं करती हैं, इसलिए उन पर इसका असर सीमित रहेगा। हालांकि, भारतीय ऑटो कंपोनेंट उद्योग अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करता है, जिससे यह नया टैरिफ उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। वित्त वर्ष 2024 में भारत से अमेरिका को 6.79 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स निर्यात किए गए, जबकि अमेरिका से भारत को 1.4 अरब डॉलर के कंपोनेंट्स 15% ड्यूटी पर आयात किए गए थे। पहले तक अमेरिका भारतीय ऑटो पार्ट्स पर शून्य शुल्क लगाता था, लेकिन अब यह नीति बदल गई है।
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इंडस्ट्री को टैरिफ वॉर से मिल सकता है फायदा
जाटो डायनामिक्स इंडिया (JATO Dynamics India) के प्रेसिडेंट और डायरेक्टर रवि जी भाटिया का कहना है कि भारत अकेला ऐसा देश नहीं है, जिस पर यह टैरिफ लागू हुआ है। उन्होंने कहा, "हालांकि, यह झटका जरूर है, लेकिन इसे ‘सुनामी’ नहीं कहा जा सकता। भारतीय आपूर्तिकर्ता अमेरिकी बाजार में अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए रणनीतियां विकसित करेंगे।"
भाटिया ने यह भी कहा कि भारत की सस्ती मैन्युफैक्चरिंग लागत अमेरिकी बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रखने में मदद करेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह कदम उन भारतीय वाहन निर्माताओं की योजनाओं को प्रभावित कर सकता है, जो अमेरिकी बाजार में विस्तार की सोच रहे थे, खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ।
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ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, कुछ प्रमुख ऑटो कंपोनेंट निर्माता जैसे मदरसन ग्रुप पहले से ही मैक्सिको और कनाडा में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित कर चुके हैं, जिससे उन्हें नॉर्थ अमेरिका फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (NAFTA) का लाभ मिलता है।
समवर्धना मदरसन इंटरनेशनल लिमिटेड के निदेशक लक्ष वामन सहगल ने अपनी पिछली तिमाही की अर्निंग रिपोर्ट में कहा था कि कंपनी का ‘ग्लोबली लोकल’ दृष्टिकोण है और उसके निर्माण संयंत्र ग्राहक स्थान के पास स्थित हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की टैरिफ बढ़ोतरी का असर ग्राहकों पर ट्रांसफर किया जाएगा, जिससे कंपनी को ज्यादा नुकसान नहीं होगा।