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Second Hand Car Scam: आप भी तो नहीं हो रहे इस स्कैम का शिकार? पुरानी कार लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

Tue, 05 May 2026 07:09 PM IST
Jagriti ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Odometer Tampering Scam: सेकंड हैंड कार मार्केट में कम किलोमीटर चली कारों की भारी डिमांड होती है, जिसका फायदा उठाकर जालसाज ओडोमीटर रोलबैक का खेल खेलते हैं। मीटर में छेड़छाड़ कर वे लाखों की चपत लगाते हैं। अगर आप भी सेकंड हैंड कार खरीदना का सोच रहे हैं, तो इस ओडोमीटर स्कैम से बचने के ये टिप्स जरूर जान लें...
 
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सैकेंड हैंड कार - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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Second Hand Car Buying Guide: सेकंड हैंड कार बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ स्कैम के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। कई विक्रेता कार के ओडोमीटर (मीटर) में छेड़छाड़ कर उसे कम चली हुई दिखाते हैं, जिससे ज्यादा पैसे वसूल सकें। ऐसे में अगर आप भी पुरानी कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
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Used Car Scams in India: कैसे होता है ओडोमीटर स्कैम?
पहले जान लेते हैं कि ओडोमीटर होता कैसे हैं। इसमें ठग कार के मीटर को पीछे कर देते हैं या डिजिटल सिस्टम में बदलाव कर देते हैं, जिससे गाड़ी कम चली हुई दिखती है। कई मामलों में फर्जी सर्विस रिकॉर्ड और नकली डॉक्यूमेंट्स भी दिखाए जाते हैं, ताकि खरीदार को किसी प्रकार का कोई शक न हो।

सर्विस हिस्ट्री जरूर चेक करें
यह स्कैम पकड़ने का सबसे पुख्ता तरीका माना जाता है। अधिकृत सर्विस सेंटर पर हर सर्विस के दौरान किलोमीटर रीडिंग दर्ज होती है। अगर रिकॉर्ड में पिछली सर्विस 50,000 किमी पर हुई है और वर्तमान मीटर 30,000 किमी दिखा रहा है, तो तुरंत सावधान हो जाएं।
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डैशबोर्ड की जांच करें
मीटर के साथ छेड़छाड़ करने के लिए अक्सर डैशबोर्ड को खोला जाता है। अगर आपको डैशबोर्ड पर खरोंच के निशान, ढीले पेंच या अनावश्यक वायरिंग या स्विच दिखें, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है।

टेस्ट ड्राइव में मीटर पर नजर 
गाड़ी चलाते समय देखें कि ओडोमीटर के अंक सही ढंग से बदल रहे हैं या नहीं। अगर रीडिंग रुक-रुक कर बढ़ रही है या मीटर का कांच हिला हुआ है, तो समझ लीजिए कुछ गड़बड़ है।

RC से मिलान करें
अगर कार 10 साल पुरानी है और रीडिंग केवल 15,000 किमी है, तो यह बहुत असामान्य बात हो सकती है। इसलिए आरसी  (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) से कार की असल उम्र जानें और टायर की घिसावट व पेडल की स्थिति से किलोमीटर का अंदाजा लगाएं।

क्यों सस्ता सौदा बन जाता है महंगा स्कैम?
जालसाज अक्सर ऑनलाइन क्लासिफाइड पोर्टल्स पर डॉक्टर ड्रिवन या सिंगल ओनर जैसे लुभावने शब्दों का इस्तेमाल कर कम चली कार का विज्ञापन डालते हैं। कम कीमत देखकर ग्राहक आकर्षित होते हैं और बिना जांच के भुगतान कर देते हैं। ऐसे में याद रखें, मीटर पीछे करने से कार का इंजन नया नहीं हो जाता। ऐसी कारें जल्द ही ब्रेकडाउन और भारी रिपेयरिंग खर्च का कारण बनती हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि हमेशा किसी पेशेवर मैकेनिक को साथ ले जाएं, क्योंकि उसकी अनुभवी नजरें वह देख सकती हैं जो आप नहीं।
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