भारतीय वाहनों की विदेश में मांग
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भारतीय मोटरसाइकिलों व कारों की विदेशी सड़कों पर धमक बढ़ती जा रही है। खास तौर पर अफ्रीका व लैटिन अमेरिका देशों के बाजार में इनकी मांग में तो बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है। यहां से विदेश जाने वाली मोटरसाइकिलों की तादाद इस साल अप्रैल से जुलाई के बीच 12.8 लाख से बढ़कर 17.9 लाख इकाई हो गई है तो वहीं छोटी यात्री कारों की तादाद 1.70 लाख से बढ़कर 2.29 लाख हो गई है। इस तरह देखें तो भारत किफायती कार, दोपहिया और महत्वपूर्ण ऑटो कंपोनेंट्स उपलब्ध कराने वाला एक तेजी से उभरता वैश्विक विनिर्माण केंद्र बन रहा है।
- कोलंबिया, श्रीलंका, नाइजीरिया, मैक्सिको, ग्वाटेमाला, केन्या, कांगो डीआर और पेरू। यह भारत के लिए सबसे ज्यादा संभावना वाले बाजार हैं।
1000 सीसी से कम इंजन क्षमता वाले छोटे यात्री वाहनों के निर्यात में उछाल:
1000 सीसी से कम इंजन क्षमता वाले छोटी यात्री कारों के निर्यात में भी तेजी आई। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, इनका निर्यात 631.5 मिलियन डॉलर से बढ़कर 780.1 मिलियन डॉलर हो गया, जबकि भेजे गए वाहनों की संख्या 1,69,832 से बढ़कर 2,38,870 इकाई हो गई।
मैक्सिको 216 मिलियन डॉलर से अधिक के निर्यात के साथ सबसे बड़ा बाजार बना रहा। श्रीलंका श्रीलंका को निर्यात लगभग चार गुना हो गया, जबकि नाइजीरिया को भेजे गए वाहनों की संख्या 43,000 से अधिक पहुंच गई। अप्रैल-जुलाई 2026-27 में छोटी कारों, 50-250 सीसी मोटरसाइकिलों और गियर बॉक्स के निर्यात में मूल्य के साथ-साथ वॉल्यूम में भी वृद्धि दर्ज हुई। आंकड़े बताते हैं कि भारत अब सिर्फ किफायती वाहनों का निर्यातक नहीं, बल्कि वैश्विक ऑटो सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।
अमेरिका, थाईलैंड, ब्राजील में भारतीय गियर बाक्स की मांग में उछाल
ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स में भी भारत की पकड़ मजबूत होती दिखी है। गियर बॉक्स का निर्यात मूल्य 240.7 मिलियन डॉलर से बढ़कर 285.2 मिलियन डॉलर हो गया, यानी करीब 18.5% की वृद्धि हुई है। निर्यात मात्रा 24.4 हजार टन से बढ़कर 29.3 हजार टन हुई। इसमें बढ़ोतरी 20.1% की हुई है। असल में भारत सिर्फ वाहन नहीं, पूरी ऑटो सप्लाई चेन निर्यात कर रहा है। तीनों प्रमुख श्रेणियों के आंकड़े भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र की बदलती वैश्विक भूमिका को उभारते हैं।