सोशल मीडिया पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही?
व्यवसायी ने जब ड्राइवर के साथ हुई व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट साझा किए, तो इंटरनेट पर आक्रोश फैल गया:
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पुलिस केस की मांग: यूजर्स ने इसे स्पष्ट रूप से चोरी का मामला बताते हुए पुलिस कार्रवाई की सलाह दी।
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कंपनी की आलोचना: लोगों ने उबर को टैग करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। एक यूजर ने तंज कसते हुए कहा कि उबर केवल 5,000 रुपये तक के सामान की जिम्मेदारी की बात कहकर पल्ला झाड़ लेगी।
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तुलना: कुछ लोगों ने इस घटना की तुलना उन ब्रोकरों से की जो गलत जानकारी देकर गायब हो जाते हैं।
क्या उबर ने इस मामले में कोई मदद की?
व्यवसायी के मुताबिक, इतनी बड़ी घटना के बावजूद कंपनी का रवैया निराशाजनक रहा:
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उबर की प्रतिक्रिया: उंझावाला ने बताया कि उबर इंडिया ने उन्हें केवल एक डायरेक्ट मैसेज (DM) भेजने के अलावा और कोई ठोस मदद नहीं की।
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मदद का अभाव: 28 घंटे बीत जाने के बाद भी कंपनी मामले को सुलझाने में नाकाम रही।
पार्सल वापस कैसे मिला और व्यवसायी को क्या नुकसान हुआ?
काफी मशक्कत के बाद, व्यवसायी पुलिस की मदद लेने को मजबूर हुए:
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पुलिस हस्तक्षेप: पुलिस को कॉल करने और दबाव बनाने के बाद, ड्राइवर ने आखिरकार 'अगले दिन' सामान वापस करने की बात मानी और 28 घंटे बाद सामान बरामद हुआ।
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आर्थिक और मानसिक नुकसान: उंझावाला ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें भारी उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि उनके ग्राहक को वह सामान तत्काल चाहिए था, जिसे वे समय पर नहीं दे सके, जिससे उन्हें वित्तीय नुकसान हुआ।
यह घटना ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। व्यवसायी ने चेतावनी दी है कि ऐसे मामलों में केवल कंपनी के भरोसे रहने के बजाय कानूनी रास्ता अपनाना ही सामान की सुरक्षा का एकमात्र तरीका है।