काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की ताजा स्टडी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में दिल्ली ईवी पैठ के मामले में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तीसरे स्थान पर रही। दिल्ली में कुल वाहन बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी 11.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो राष्ट्रीय औसत 7.49 प्रतिशत से काफी अधिक है।
पहले, दूसरे स्थान पर कौन?
इस रैंकिंग में चंडीगढ़ पहले स्थान पर रहा। यहां ईवी पैठ 12.1 प्रतिशत दर्ज की गई हैं। वहीं, गोवा 11.9 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में स्पष्ट नीति लक्ष्य और आक्रामक प्रोत्साहन योजनाओं ने ईवी अपनाने को रफ्तार दी है।
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इलेक्ट्रिक बसों में दिल्ली का दबदबा
सार्वजनिक परिवहन के मामले में दिल्ली पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरी है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की सड़कों पर दौड़ने वाली कुल बसों में से लगभग 40 प्रतिशत बसें इलेक्ट्रिक हैं। राष्ट्रीय स्तर पर ईवी पैठ 7.49 प्रतिशत है, जबकि दिल्ली इस औसत से काफी आगे निकल चुकी है। वित्तीय वर्ष के दौरान राजधानी में कुल 83,423 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हुई। इसके बाद दिल्ली ईवी की कुल संख्या और अपनाने की दर दोनों में अग्रणी क्षेत्रों में शामिल हो गई है।
दिल्ली की खास बात ये है कि यहां इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का दायरा केवल तिपहिया तक सीमित नहीं है। दिल्ली में ईवी अपनाने का प्रसार दोपहिया, तिपहिया और सार्वजनिक परिवहन तीनों क्षेत्रों में समान रूप से देखा गया है। ये अध्ययन सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के वाहन पोर्टल के डेटा पर आधारित है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली सरकार के स्थानीय प्रोत्साहन, बेहतर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पष्ट नीतिगत लक्ष्यों ने उपभोक्ताओं का भरोसा जीतने में मदद की है। हालांकि राष्ट्रीय औसत अभी भी 7.49 प्रतिशत पर है, लेकिन चंडीगढ़, गोवा और दिल्ली जैसे राज्य इस आंकड़े को तेजी से ऊपर खींच रहे हैं।