GPS जाम करने का हाई-टेक सिस्टम
गाड़ी स्टार्ट होते ही चोर तुरंत GPS (जीपीएस) जैमर का इस्तेमाल करते, जिससे गाड़ी की लोकेशन ट्रैक नहीं हो पाती थी। न गाड़ी मालिक को अलर्ट मिलता और न ही ट्रैकिंग सिस्टम एक्टिव हो पाता। इसके बाद वे आराम से गाड़ी लेकर निकल जाते।
यह भी पढ़ें - Nissan GT-R: निसान जीटी-आर का उत्पादन हुआ बंद, आखिरी मॉडल R35 के साथ विदाई, जानें डिटेल्स
100 किलोमीटर लंबी पीछा करने की कार्रवाई
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी कामयाबी तब मिली, जब पुलिस ने 100 किलोमीटर तक तेजी से पीछा किया। और गिरोह के सरगना अमरीक सिंह (42), अमृतसर को मुरथल (हरियाणा) से पकड़ा। वह चोरी की टोयोटा फॉर्च्यूनर चला रहा था और पुलिस को टक्कर मारकर भागने की कोशिश कर रहा था।
यह भी पढ़ें - FASTag Annual Pass: फास्टैग वार्षिक पास से NHAI पर पड़ सकता है ₹4,500 करोड़ का बोझ, ICRA का अनुमान
यह भी पढ़ें - Expressway: दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए NHAI की 18 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी, जानें डिटेल्स
कई गाड़ियां बरामद
ACP (ऑप्स) सुलखा जागरवार और इंस्पेक्टर रघुवीर की टीम ने अमरीक सिंह को 2 महीने तक ट्रैक किया। इस दौरान रंजीत नगर से चोरी हुई इनोवा की शिकायत के आधार पर टेक्निकल सर्विलांस और लोकल इंटेलिजेंस से सुराग मिले। पुलिस ने उसके पास से कई चोरी की गाड़ियां बरामद कीं, जिनमें फॉर्च्यूनर, दो ह्यूंदै क्रेटा और एक किआ सेल्टोस शामिल हैं।
पेशेवर अपराधी का लंबा इतिहास
रिपोर्ट के मुताबिक, अमरीक सिंह पहले से ही एक आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ वाहन चोरी, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा जैसे 9 पुराने केस दर्ज हैं। यहां तक कि कातिलाना हमले में भी उसका नाम आया है।
यह भी पढ़ें - TVS Raider Super Squad Edition: टीवीएस रेडर सुपर स्क्वाड एडिशन में दो नए मार्वल-थीम वाले वेरिएंट्स लॉन्च, जानें कीमत और फीचर्स
यह भी पढ़ें - Two-Wheelers: भारतीय टू-व्हीलर बाजार में FY26 में 6-9 प्रतिशत उछाल की उम्मीद, ICRA का अनुमान
हाई-टेक गैजेट्स का इस्तेमाल
पुलिस ने बताया कि यह गैंग काफी पेशेवर और संसाधन संपन्न था। चोरी के लिए वे जो जैमर इस्तेमाल करते थे, उनकी कीमत लगभग 1 लाख रुपये थी। सिक्योरिटी कोड डालने वाली प्रोग्रामिंग मशीन करीब 1.8 लाख रुपये की आती है। वहीं चाबी बनाने वाली मशीन भी लगभग 1 लाख रुपये की होती है।
यह भी पढ़ें - E20 Petrol: ई20 पेट्रोल से माइलेज 2-5 प्रतिशत तक हो सकता है कम! क्या है विशेषज्ञों की राय
यह भी पढ़ें - Ethanol: केंद्र की 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल नीति को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई जनहित याचिका
जांच जारी
फिलहाल यह केस सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस संभाल रही है और पूरे नेटवर्क - रिसीवर्स, हैंडलर्स और बाकी सहयोगियों को पकड़ने की कोशिश जारी है। पुलिस का कहना है कि इस पूरे गैंग को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। और आरोपी को बीएनएस की धाराओं में गिरफ्तार किया गया।
यह भी पढ़ें - ABS vs Combi Brakes: ABS ब्रेक क्या है और यह CBS से कैसे अलग है? आपकी बाइक के लिए क्या है सबसे सुरक्षित?
यह भी पढ़ें - FASTag Annual Pass: दिल्ली-चंडीगढ़ हाइवे पर लगभग 30% निजी कारें इस्तेमाल कर रही हैं वार्षिक फास्टैग पास