क्या अपंजीकृत ई-रिक्शा को भी पंजीकरण का मौका मिलेगा?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि, प्रस्तावित नीति में अपंजीकृत ई-रिक्शा के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश शामिल होंगे। नीति लागू होने के बाद मालिकों को एक निश्चित समयावधि दी जा सकती है, जिसके भीतर वे अपने वाहन का पंजीकरण करा सकें।इस कदम का उद्देश्य नियमों का पालन सुनिश्चित करना है, बिना चालकों की रोजी-रोटी पर अचानक असर डाले।
क्या ड्राइवरों के लिए वर्दी और बैज अनिवार्य होंगे?
नई नीति में ई-रिक्शा चालकों के लिए बैज और वर्दी अनिवार्य करने का प्रस्ताव भी शामिल हो सकता है। इससे यात्रियों की पहचान और सुरक्षा बेहतर करने में मदद मिलेगी।
क्या संचालन क्षेत्रों और रूट्स पर भी नियंत्रण होगा?
विचाराधीन नीति के तहत ई-रिक्शा के संचालन के लिए स्पष्ट रूप से निर्धारित जोन तय किए जा सकते हैं। तेज रफ्तार कॉरिडोर पर इनके संचालन पर प्रतिबंध और पंजीकरण व फिटनेस मानकों के सख्त अनुपालन पर जोर दिया जाएगा।सरकार का उद्देश्य ई-रिक्शा को रोकना नहीं, बल्कि उन्हें शहर की परिवहन व्यवस्था में बेहतर तरीके से एकीकृत करना है।
ट्रैफिक प्रबंधन और नियमों के पालन पर क्या असर होगा?
नई नीति का लक्ष्य ट्रैफिक फ्लो को सुचारु बनाना और सड़क प्रबंधन को बेहतर करना है। वर्ष 2014 में सरकार ने शहर की 236 प्रमुख सड़कों पर ई-रिक्शा के संचालन और पार्किंग पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन इन नियमों का प्रभावी पालन चुनौतीपूर्ण रहा है।
विशेषज्ञ क्या सुझाव दे रहे हैं?
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि ई-रिक्शा बसों और ऑटो के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और ‘पहले व आखिरी मील’ कनेक्टिविटी में अहम भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि नई नीति में ई-रिक्शा को अन्य साझा परिवहन साधनों के साथ जोड़ा जाए और चार्जिंग सुविधाओं की समस्या का समाधान किया जाए। अक्सर ई-रिक्शा अवैध बिजली कनेक्शन से चार्ज किए जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
सरकार की आगामी नीति से उम्मीद है कि ई-रिक्शा संचालन अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनेगा।