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Delhi-NCR GRAP Lifted: दिल्ली-एनसीआर की हवा में सुधार, सभी ग्रैप पाबंटियां हटीं, जानें अब क्या-क्या बदलेगा?

Tue, 17 Mar 2026 01:51 PM IST
Jagriti ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Delhi-NCR GRAP Restrictions Lifted: दिल्ली-एनसीआर में एयर क्वालिटी में सुधार के बाद GRAP के तहत लागू सभी पाबंदियां हटा दी गई हैं। एक्यूआई मॉडरेट स्तर पर पहुंचने से ट्रांसपोर्ट, डीजल वाहनों और कमर्शियल गतिविधियों को बड़ी राहत मिली है। इसके बाद आने वाले दिनों में भी हवा की स्थिति स्थिर रहने की संभावना जताई गई है।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : adobe stock
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विस्तार
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दिल्ली-एनसीआर में लंबे समय बाद राहत भरी खबर आई है। खराब हवा की वजह से लागू की गई पाबंदियां अब पूरी तरह से हटा दी गई हैं। कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के अनुसार, एयर क्वालिटी में सुधार के चलते यह फैसला लिया गया है।
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एक्यूआई में सुधार बना वजह
सोमवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 119 दर्ज किया गया, जो  कि मॉडरेट श्रेणी में माना जाता है। इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट और इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी के अनुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में भी एक्यूआई इसी स्तर पर बना रह सकता है।

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ट्रांसपोर्ट और ऑटो सेक्टर को क्या फायदा?
ग्रैप हटने से सबसे ज्यादा राहत ट्रांसपोर्ट और ऑटो सेक्टर को मिली है। इससे डीजल जनरेटर पर लगी सख्त पाबंदी खत्म हो गई हैं। होटल-रेस्टोरेंट में कोयला या लकड़ी के इस्तेमाल की छूट के साथ कमर्शियल वाहनों की आवाजाही आसान हो सकती है। निर्माण और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। यानी अब वाहन संचालन और ट्रांसपोर्ट सिस्टम पहले से ज्यादा सामान्य हो पाएगा।

ग्रैप और इसके चार चरण क्या हैं?
ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP), दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति से निपटने के लिए बनाया गया एक आपातकालीन रोडमैप है। इसे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के विभिन्न स्तरों के आधार पर चरणों में लागू किया गया था। सरल शब्दों में कहें तो, जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ता है, सरकार की पाबंदियां सख्त होती जाती हैं। फिर ग्रैप को एक्यूआई के आधार पर लागू किया जाता है। प्रदूषण के स्तर को मापने और उस पर कार्रवाई करने के लिए इसके चार चरण बनाए गए हैं:
ग्रैप-1, ग्रैप-2, ग्रैप-3, ग्रैप-4

ग्रैप की पाबंदियां कैसे लगीं और अब क्यों हटीं?
ग्रैप के तहत लागू ग्रैप-1 की पाबंदियां 14 अक्तूबर 2025 को आदेश के बाद लागू हुई थी, जिन्हें अब पूरी तरह हटा दिया गया था। इन पाबंदियों के दौरान होटलों, रेस्टोरेंट और खुले फूड स्टॉल्स में कोयला और लकड़ी से चलने वाले तंदूर के इस्तेमाल पर रोक थी, वहीं डीजल जनरेटर केवल आपातकालीन परिस्थितियों में ही इस्तेमाल किए जा सकते थे। अब इन शर्तों के हटने से व्यापार और दैनिक गतिविधियों को राहत मिली है।

ग्रैप चार चरणों में लागू होता है, जो एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) के स्तर पर आधारित है—
  • ग्रैप -1 (खराब): एक्यूआई 201 से 300 के बीच होने पर।
  • ग्रैप -2 (बहुत खराब): एक्यूआई 301 से 400 के बीच होने पर।
  • ग्रैप -3 (गंभीर): एक्यूआई 401 से 500 के बीच होने पर।
  • ग्रैप -4 (अति गंभीर): एक्यूआई 450 से ज्यादा होने पर।
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इस साल प्रदूषण के बढ़ते स्तर के चलते 17 जनवरी को ग्रैप -4 लागू करना पड़ा था। हालांकि, हालात में सुधार के साथ पाबंदियां धीरे-धीरे हटाई गईं।
  • 20 जनवरी को ग्रैप -4 हटाया गया।
  • 22 जनवरी को ग्रैप -3 समाप्त किया गया।
  • 18 फरवरी: ग्रैप -2 हटाया गया था। 
इसके  बाद अब ग्रैप-1 भी खत्म कर दिया गया है। यानी लगातार बेहतर होती हवा की गुणवत्ता के चलते अब दिल्ली-एनसीआर में सभी पाबंदियां हटा दी गई हैं और स्थिति सामान्य हो गई है।
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क्या आगे भी साफ रहेगी हवा?
ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या आगे भी साफ हवा रहेगी। एक्सपर्ट्स के अनुसार मौसम अनुकूल बना हुआ है, हवा की गति और तापमान भी संतुलित हैं। फिलहाल प्रदूषण नियंत्रण में है, लेकिन गर्मियों और ट्रैफिक बढ़ने के साथ स्थिति बदल भी सकती है। इनका यह भी मानना है कि दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप हटना साफ हवा की दिशा में सकारात्मक संकेत है। इससे न सिर्फ आम लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि ऑटो और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी बड़ा फायदा होगा। हालांकि, प्रदूषण नियंत्रण के लिए सतर्कता बनाए रखना अभी भी जरूरी है।
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