दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को गुरुग्राम स्थित टेस्ला पावर इंडिया को उनके इलेक्ट्रिक वाहन स्कूटरों के स्टॉक और बिक्री का डिटेल्स देते हुए एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसमें डीलरों के नाम, लॉन्च की तारीखें और मौजूदा स्टॉक उपलब्धता देना शामिल है।
यह निर्देश टेस्ला इंक द्वारा टेस्ला पावर इंडिया के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुकदमे में दायर एक याचिका के जवाब में अदालत के निर्देश आए हैं।
हाईकोर्ट अब गुरुवार को टेस्ला पावर के खिलाफ मामले की सुनवाई करेगा।
टेस्ला इंक. ने तर्क दिया कि भारतीय फर्म द्वारा ट्रेडमार्क के इस्तेमाल से न सिर्फ उपभोक्ताओं के बीच भ्रम पैदा हो रहा है। बल्कि उसके व्यावसायिक हितों को भी नुकसान पहुंच रहा है। कंपनी ने कहा है कि टेस्ला पावर बैटरी के खिलाफ शिकायतें अमेरिकी फर्म को निर्देशित की जा रही हैं। क्योंकि उपभोक्ताओं ने माना कि वे टेस्ला इंक से जुड़ी हैं।
एलन मस्क की कंपनी ने दावा किया कि टेस्ला पावर एक ईवी कंपनी के रूप में राष्ट्रीय दैनिक समाचारपत्रों में अपनी बैटरी का विज्ञापन कर रही थी। और उसके लोगो का इस्तेमाल कर रही थी।
टेस्ला इंक. के वकील ने भारत में उनके ब्रांड और व्यावसायिक हितों को संभावित नुकसान का हवाला देते हुए टेस्ला पावर के टेस्ला ट्रेडमार्क के इस्तेमाल और उसकी पैरोडी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की।
टेस्ला पावर ने तर्क दिया कि वह ईवी बैटरी का निर्माण नहीं कर रही है। बल्कि पारंपरिक वाहनों और इनवर्टरों में इस्तेमाल होने वाली लेड एसिड बैटरी बेच रही है।
टेस्ला पावर इंडिया के चेयरमैन कविंदर खुराना ने पहले अदालत को बताया था कि वह टेस्ला ब्रांड के तहत अपने इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण या मार्केटिंग नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि टेस्ला पावर की अमेरिका में एक साझेदारी फर्म है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी की इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में एंट्री करने की कोई योजना नहीं है। और यह कहा कि टेस्ला ट्रेडमार्क वाले विज्ञापन का संबंध ई-अश्व नामक एक अन्य कंपनी से है। जिसके साथ टेस्ला पावर का ब्रांडेड उत्पाद बेचने के लिए रणनीतिक साझेदारी है।
खुराना के अनुसार, टेस्ला पावर पिछले चार वर्षों से कारोबार में है और भारत में उसके 10 लाख से ज्यादा ग्राहक हैं।