वाहन प्रदूषण पर लगाम लगाने की कोशिश
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में PM2.5 और PM10 जैसे खतरनाक प्रदूषक कणों में वाहनों से निकलने वाला धुआं एक बड़ी वजह है। पेट्रोल और डीजल वाहनों की संख्या कम किए बिना हवा की गुणवत्ता में सुधार संभव नहीं है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है, क्योंकि इससे सीधे तौर पर प्रदूषण के स्तर में कमी लाई जा सकती है।
यह भी पढ़ें - Automobile Industry: रिकॉर्ड 2025 के बाद 2026 में कड़ी परीक्षा के दौर में ऑटो इंडस्ट्री, जानें क्या हैं चुनौतियां और आगे की राह
तीन स्तंभों पर आधारित होगी नई ईवी नीति
नई ईवी नीति को तीन मुख्य आधारों पर तैयार किया गया है। पहला, इलेक्ट्रिक वाहनों को किफायती बनाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएंगे, ताकि पेट्रोल-डीजल और ईवी के बीच कीमत का अंतर कम हो सके। दूसरा, पूरे शहर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से विस्तार दिया जाएगा। तीसरा, अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में पहले ही इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस माफ की जा चुकी है, जिससे ईवी खरीदना आसान हुआ है। नई नीति में इन प्रयासों को और मजबूत किया जाएगा।
यह भी पढ़ें - RC Transfer: दिल्ली में सेकेंड-हैंड वाहन की आरसी ट्रांसफर नियमों में सख्ती, अब 15 दिन की समय-सीमा अनिवार्य
स्क्रैपेज से जुड़ा नया प्रोत्साहन
नई नीति में वाहन स्क्रैपेज को भी अहम हिस्सा बनाया गया है। अगर कोई व्यक्ति अपनी पुरानी पेट्रोल या डीजल गाड़ी को स्क्रैप करता है और उसकी जगह इलेक्ट्रिक वाहन खरीदता है, तो उसे अतिरिक्त वित्तीय लाभ दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को जल्दी से जल्दी सड़कों से हटाना है।
यह भी पढ़ें - Fog Driving: सर्दियों में कैसे करें सुरक्षित ड्राइविंग, कोहरे और कम विजिबिलिटी में गाड़ी चलाने के जरूरी टिप्स
चार्जिंग सुविधा घरों तक पहुंचाने की योजना
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर मुख्यमंत्री ने साफ किया कि चार्जिंग स्टेशन केवल मॉल, दफ्तर या प्रमुख सार्वजनिक जगहों तक सीमित नहीं रहेंगे। इन्हें रिहायशी इलाकों के पास भी स्थापित किया जाएगा, ताकि लोगों को चार्जिंग को लेकर किसी तरह की परेशानी न हो। इसके साथ ही बैटरी स्वैपिंग और इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों के वैज्ञानिक तरीके से निपटान को भी नीति में शामिल किया जाएगा।
यह भी पढ़ें - Pollution Certificate: दिल्ली में सख्त प्रदूषण कार्रवाई का असर, तीन दिनों में एक लाख से ज्यादा पीयूसी आवेदन
सभी हितधारकों से होगी सलाह-मशविरा
सरकार ने इस नीति को मजबूत बनाने के लिए बिजली वितरण कंपनियों, वाहन निर्माताओं और स्क्रैप डीलरों के साथ बातचीत शुरू कर दी है। साथ ही नीति का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि आम नागरिक भी अपनी राय और सुझाव दे सकें।
यह भी पढ़ें - Hydrogen Cars: हाइड्रोजन कारें कितनी वाकई ‘ग्रीन’? नए शोध ने स्वच्छ ऊर्जा के दावे पर उठाए सवाल
विशेष मंत्रियों की समिति और विशेषज्ञों की मदद
नई ईवी नीति की निगरानी और दिशा तय करने के लिए बिजली और शिक्षा मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में मंत्रियों का एक समूह बनाया गया है। इस समिति को आईआईटी दिल्ली और अन्य विशेषज्ञों का सहयोग मिल रहा है, जो बैटरी रीसाइक्लिंग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी चुनौतियों पर मार्गदर्शन देंगे।
सरकार का दावा है कि यह नीति दिल्ली को स्वच्छ, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार शहर बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगी।
यह भी पढ़ें - Fuel Level: सर्दियों में गाड़ी या बाइक का टैंक खाली रखना क्यों पड़ सकता है भारी? जानिए इसके बड़े नुकसान
यह भी पढ़ें - Car Features: सर्दियों के घने कोहरे में ड्राइविंग है खतरनाक, जानें ADAS तकनीक इसे कैसे बना सकती है सुरक्षित
यह भी पढ़ें - Upcoming Car Launches 2026: नए साल में नई कारों की आएगी बाढ़, इन एसयूवी और इलेक्ट्रिक वाहनों पर रहेगी नजर