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Delhi EV: दिल्ली में इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए बंपर ऑफर! पहले 1000 ई-ट्रकों को 10 साल तक 'नो एंट्री' से छूट

Tue, 30 Jun 2026 10:39 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली सरकार ने नई ईवी नीति के तहत, राजधानी में पंजीकृत होने वाले पहले 1,000 इलेक्ट्रिक N2 श्रेणी के ट्रकों को 10 वर्षों तक 'नो एंट्री' समय प्रतिबंध से छूट दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से डीजल ट्रकों की जगह इलेक्ट्रिक ट्रकों को अपनाने की रफ्तार तेज होगी और वाणिज्यिक परिवहन से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।

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इलेक्ट्रिक ट्रक - फोटो : AI
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विस्तार
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देश की राजधानी दिल्ली में कमर्शियल ट्रांसपोर्ट (व्यावसायिक परिवहन) को प्रदूषण मुक्त बनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार को तेज करने के लिए सरकार ने एक बेहद आकर्षक दांव खेला है। दिल्ली की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत शहर में पंजीकृत होने वाले पहले 1,000 इलेक्ट्रिक N2 कैटेगरी के ट्रकों को दिल्ली की सीमाओं और सड़कों पर लगने वाले "नो एंट्री" के समय प्रतिबंधों से पूरे 10 साल की भारी छूट दी जाएगी। सरकार का यह कदम माल ढुलाई क्षेत्र में डीजल गाड़ियों की जगह क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा) को बढ़ावा देने के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

इस विशेष छूट का लाभ उठाने के लिए क्या शर्तें तय की गई हैं?

नीति के मुताबिक, इस बेहतरीन इंसेंटिव (प्रोत्साहन) का फायदा उठाने के लिए वाहन मालिकों को कुछ तय समय-सीमा का ध्यान रखना होगा:

  • शुरुआती खरीदारों को मौका: यह खास रियायत केवल उन्हीं पहले 1,000 N2 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों को मिलेगी, जिन्हें नीति के लागू होने के शुरुआती दिनों में खरीदा जाएगा।

  • तीन महीने की समय-सीमा: इन 1,000 ट्रकों की खरीद इस नीति के आधिकारिक नोटिफिकेशन (अधिसूचना) जारी होने के तीन महीने के भीतर की जानी अनिवार्य है।

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'नो एंट्री' से 10 साल की छूट मिलने का व्यावहारिक मतलब क्या है?

आमतौर पर दिल्ली में ट्रैफिक व्यवस्था और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भारी और मध्यम मालवाहकों पर समय-समय पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाते हैं, लेकिन इन भाग्यशाली 1,000 ई-ट्रकों के लिए नियम अलग होंगे:

  • हर पाबंदी से आजादी: इस 10 वर्षीय छूट का मतलब है कि ये इलेक्ट्रिक ट्रक उस प्रतिबंधित समय (नो एंट्री आवर्स) के दौरान भी दिल्ली की सड़कों पर बेधड़क दौड़ सकेंगे, जब सामान्य मालवाहक गाड़ियों के प्रवेश पर रोक होती है।

  • विशेष परिस्थितियों में भी राहत: चाहे शहर में यातायात प्रबंधन के उपाय लागू हों, कोई बड़ा वीआईपी या राष्ट्रीय कार्यक्रम चल रहा हो, या फिर प्रदूषण-नियंत्रण से जुड़ी पाबंदियां लगी हों- इन ट्रकों को हर हाल में परिचालन की अनुमति होगी।

इस नीति में शामिल 'N2 कैटेगरी' के वाहन असल में कौन से हैं?

इस छूट के दायरे में आने वाले वाहनों को उनके वजन और उपयोग के आधार पर वर्गीकृत किया गया है:

  • मीडियम-ड्यूटी ट्रक्स: N2 कैटेगरी के तहत मध्यम-भार वाले मालवाहक वाहन आते हैं, जिनका कुल वजन 3.5 टन से लेकर 12 टन के बीच होता है।

  • रोजमर्रा का कमर्शियल इस्तेमाल: इस श्रेणी के ट्रकों का उपयोग आमतौर पर शहर के भीतर और आसपास के इलाकों में कमर्शियल सामान, औद्योगिक आपूर्ति, कंस्ट्रक्शन मटेरियल (भवन निर्माण सामग्री) और अन्य भारी कार्गो को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया जाता है।

सरकार को इस नए इंसेंटिव से क्या उम्मीदें हैं?

दिल्ली सरकार ने इस कदम के जरिए राजधानी के सबसे बड़े प्रदूषणकारी कारकों में से एक पर सीधा निशाना साधा है:

  • बेड़े का तेजी से बदलाव: सरकार को पूरी उम्मीद है कि इस बड़े प्रोत्साहन को देखने के बाद बड़े-बड़े फ्लीट ऑपरेटर्स (माल ढुलाई कंपनियां) अपने पुराने डीजल से चलने वाले ट्रकों को हटाकर तेजी से इलेक्ट्रिक विकल्पों को अपनाएंगे।

  • व्यावसायिक क्षेत्र में प्रदूषण की छुट्टी: चूंकि कमर्शियल ट्रांसपोर्ट सेगमेंट दिल्ली के प्रदूषण में एक बड़ी भूमिका निभाता है, इसलिए मध्यम-ड्यूटी वाले इलेक्ट्रिक ट्रकों को यह विशेष रियायत देकर सरकार सीधे तौर पर इस सेगमेंट से होने वाले उत्सर्जन को काटना चाहती है।

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नई दिल्ली ईवी नीति कब से लागू हो रही है और इसका अंतिम लक्ष्य क्या है?

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई इस ऐतिहासिक नीति को लेकर सरकार का दृष्टिकोण और टाइमलाइन साझा की है:

  • 1 जुलाई से होगी शुरुआत: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद उपराज्यपाल की अंतिम सहमति मिलते ही यह नीति 1 जुलाई से पूरी तरह लागू हो जाएगी।

  • मिशन 2030: मुख्यमंत्री ने इस नीति को दिल्ली को आगामी 31 मार्च 2030 तक पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी कदम बताया है।

  • फेज-वाइज बदलाव का रोडमैप: यह नीति विशेष रूप से परिवहन क्षेत्र से होने वाले घातक उत्सर्जन को कम करने पर केंद्रित है और पारंपरिक ईंधन (पेट्रोल-डीजल) से चलने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का एक स्पष्ट रोडमैप प्रदान करती है। इसके तहत विभिन्न श्रेणियों के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्रोत्साहनों की एक पूरी श्रृंखला पेश की गई है।

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