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Delhi Pollution Plan 2026: एक नवंबर से माल वाहनों की एंट्री पर सख्ती, केवल BS-VI और EV को इजाजत, जानें नए नियम

Sat, 04 Apr 2026 09:54 AM IST
Jagriti ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Delhi Air Pollution Action Plan 2026: दिल्ली सरकार ने  'एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन एक्शन प्लान-2026' के तहत एक नया फैसला लिया है। 1 नवंबर 2026 से राजधानी में केवल BS-VI, सीएनजी और इलेक्ट्रिक माल वाहन ही प्रवेश कर सकेंगे। प्रदूषण नियंत्रण के लिए टेक्नोलॉजी, सख्त निगरानी और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारों का रोडमैप भी तैयार किया गया है। जानें इसके बारे में विस्तार से...
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एक नवंबर से नियम लागू - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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Goods vehicle ban Delhi Nov 1: दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर 2026 से माल वाहनों के प्रवेश पर सख्त पाबंदी लगाने का फैसला किया है। अब केवल BS-VI मानकों वाले, सीएनजी या इलेक्ट्रिक माल वाहन ही राजधानी की सीमा में प्रवेश कर पाएंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ कहा है कि नो पीयूसी, नो फ्यूल नियमें को अब डिजिटल ट्रैकिंग और एएनपीआर यानी की ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशनकैमरों के जरिए सख्ती से लागू किया जाएगा। इसके साथ ही, सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए 2029 तक 13,760 बसों का लक्ष्य रखा गया है।
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CM Rekha Gupta pollution announcement: योजना के बारे में विस्तार से...

माल वाहनों पर सेंसर का पहरा
ये पाबंदियो कोई पहली बार नहीं है, इसे पिछले वर्ष भी लागू किया गया था, लेकिन उसे टाल दिया गया। अब इस साल उन टाली गई पावंदियों को पूरी सख्ती से लागू किया जाने का फैसला लिया गया है। अब एक नवंबर से  गैर-जरूरी और प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों या माल वाहनों के लिए दिल्ली के दरवाजे बंद हो जाएंगे। केवल स्वच्छ ईंधन वाले (BS-VI, CNG, EV) वाहनों को ही एंट्री मिलेगी। इसकी निगरानी के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल होगा।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
सरकार का फोकस दिल्ली को ईवी कैपिटल बनाना है। इसलिए अगले चार वर्षों में पूरी दिल्ली में करीब 32 हजार नए ईवी चार्जिंग प्वाइंट्स को स्थापित करने का लक्ष्य बनाया गया है। इस नई ईवी पॉलिसी में टू-व्हीलर और कमर्शियल वाहनों को प्राथमिकता दी जाएगी। सार्वजनिक परिवहन बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या को तेजी से बढ़ाया जाएगा।
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धूल और कचरा प्रबंधन के लिए डेडलाइन
यही नहीं सरकार प्रदूषण को रोकने के लिए जरूरी कदम उठा रही है। सड़क की धूल और लैंडफिल साइट्स (कूड़े के पहाड़) को लेकर सख्त समयसीमा तय की गई है। जैसे की ओखला लैंडफिल को जुलाई 2026 तक पूरी तरह साफ करने की बात कही गई है। इसके अलावा भलस्वा लैंडफिल को दिसंबर 2026 तक और गाजियाबाद लैंडफिल को दिसंबर 2027 यानी की अगले वर्ष तक की समयसीमा निर्धारित की गई है। इसी के साथ धूल नियंत्रण के लिए मैकेनिकल स्वीपर्स और एंटी-स्मॉग गन का जाल बिछाया जाएगा।

तकनीक से निगरानी: एआई और स्मार्ट सिस्टम
सरकार का मानना है कि सिर्फ योजनाएं और लक्ष्य बनाने से काम नहीं चलेगा, इसके लिए कड़ी सख्ती के साथ निगरानी की भी आवश्यकता पड़ सकती है, इसीलिए इन्हें पूरा कराने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • सीएंडडी पोर्टल 2.0: निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल की निगरानी अब एआई-इनेबल्ड पोर्टल के जरिए होगी।
  • आईटीएमएस: 62 ट्रैफिक हॉटस्पॉट्स पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और स्मार्ट पार्किंग लागू होगी, जिससे जाम के कारण होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।
  • ग्रीन वॉर रूम: एक सेंट्रलाइज्ड वॉर रूम और ऑनलाइन एमिशन सिस्टम के जरिए औद्योगिक इकाइयों की 24x7 निगरानी की जाएगी।
ऑफिस और वर्क-कल्चर में बदलाव
प्रदूषण के गंभीर स्तर पर पहुंचने की स्थिति में सरकार स्टैगर्ड ऑफिस टाइमिंग और वर्क-फ्रॉम-होम (WFH) जैसे कदम भी उठा सकती है, जिससे सड़कों पर वाहनों का दबाव कम रहे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट कहा है कि यह सिर्फ नीति की घोषणा नहीं है, बल्कि संसाधनों, तकनीक और सख्त निगरानी से चलाया जाने वाला एक एन्फोर्समेंट ड्रिवन अभियान है। 
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