जब आप नया टायर खरीदने जाते हैं, तो दुकानदार अक्सर आपको ऊंचे प्रॉफिट वाला टायर थमा देता है। लेकिन आपकी गाड़ी के लिए कौन सा टायर सही है, यह टायर पर लिखे इन प्वांइट्स से तय होता है:
1. टायर की चौड़ाई
टायर पर लिखा पहला तीन अंकों का नंबर (जैसे 195) मिलीमीटर में इसकी चौड़ाई बताता है। इसमें टायर जितना चौड़ा होगा, सड़क पर पकड़ उतनी ही मजबूत होगी। स्पोर्ट्स कारों में इसीलिए चौड़े टायर दिए जाते हैं।
2. एस्पेक्ट रेशियो
स्लैश के बाद वाला नंबर (जैसे /55) टायर की ऊंचाई को चौड़ाई के प्रतिशत में दर्शाता है। इसमें कम एस्पेक्ट रेशियो वाले टायर मोड़ पर गाड़ी को बेहतर कंट्रोल देते हैं और दिखने में स्टाइलिश लगते हैं।
3. बनावट का प्रकार
नंबरों के बीच में R लिखा होना सबसे जरूरी है। इसका मतलब रेडियल टायर है। आजकल 90% कारों में रेडियल टायर ही इस्तेमाल होते हैं क्योंकि ये कम गर्म होते हैं और लंबी दूरी के लिए सुरक्षित हैं।
4. रिम का साइज
आर के ठीक बाद वाला नंबर जैसे 16 या 18 इंच में आपके पहिए के रिम का साइज बताता है। गलत साइज का टायर रिम पर फिट नहीं बैठेगा और दुर्घटना की वजह बन सकता है।
5. लोड इंडेक्स, वजन उठाने की ताकत
रिम साइज के बाद एक नंबर होता है जैसे 87 या 88। यह कोड बताता है कि एक टायर अधिकतम कितना वजन उठा सकता है। जैसे मान लीजिए 87 का मतलब है लगभग 545 किलो। अगर आपकी कार में चार टायर हैं, तो पूरी गाड़ी (समान सहित) लगभग 2180 किलो से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
6. स्पीड रेटिंग
सबसे आखिरी अक्षर जैसे V, H, S टायर की स्पीड लिमिट तय करता है। इसमें:
V: 240 किमी/घंटा तक सुरक्षित।
H: 210 किमी/घंटा तक सुरक्षित।
अपनी टायर रेटिंग से ज्यादा तेज गाड़ी चलाना टायर फटने का सबसे बड़ा कारण है।
7. वाहन का प्रकार और रोटेशन
अगर टायर पर पी लिखा है तो वह पैसेंजर कार के लिए है, और एलटी लाइट ट्रक के लिए। साथ ही, टायर पर बने Arrow (तीर) के निशान को जरूर देखें, यह टायर लगाने की सही दिशा बताता है।
गलत टायर चुनने के खतरे: एक छोटी चूक, बड़ा हादसा
एक्सपर्ट्स के अनुसार, अक्सर लोग दिखावे के लिए अपनी गाड़ी में बड़े या चौड़े टायर डलवा लेते हैं। इससे न केवल गाड़ी का माइलेज गिरता है, बल्कि सस्पेंशन और स्टीयरिंग पर भी बुरा असर पड़ता है।