दिल्ली के एक उबर यूजर ने हाल ही में राइड-हेलिंग एप के खिलाफ एक केस जीता है। जिसमें उसने समय पर कैब उपलब्ध नहीं कराई, जिसकी वजह से उसकी फ्लाइट छूट गई। दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा संबोधित इस मामले में उबर को शिकायतकर्ता को 54,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया। यह शिकायत 2022 में दर्ज की गई थी, जब बुक की गई उबर कैब न आने की वजह से यूजर की फ्लाइट छूट गई थी। जिसे कोर्ट ने 'सेवा में कमी' करार दिया और कंपनी की जवाबदेही की कमी का हवाला दिया।
नवंबर 2022 की घटना
मीडिया रिपोर्ट के मुताहिक, यह घटना नवंबर 2022 में हुई जब उपेंद्र सिंह ने इंदौर की उड़ान के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के लिए सुबह 3:15 बजे उबर कैब बुक की। लेकिन बुकिंग के बावजूद, कोई भी कैब निर्धारित समय पर नहीं पहुंची। और बार-बार संपर्क करने के सिंह की कोशिश के बावजूद कंपनी से कोई जवाब नहीं मिला।
छूट गई फ्लाइट
देरी का सामना करते हुए, सिंह और उनकी पत्नी ने एक स्थानीय टैक्सी किराए पर लेने का फैसला किया और इतनी देरी के बावजूद वे सुबह 5:15 बजे हवाई अड्डे पर पहुंच गए। हालांकि, तब तक दंपत्ति अपनी उड़ान चूक चुके थे। छूटी हुई उड़ान ने उनकी यात्रा योजनाओं को और भी बाधित कर दिया। जिससे उन्हें इंदौर में परिवार के साथ समय बिताने के लिए सिर्फ कुछ ही समय मिला। क्योंकि दिल्ली के लिए उनकी वापसी की टिकटें पहले से बुक थीं।
लंबा चला कानूनी मामला
उबर की ओर से कोई प्रतिक्रिया न मिलने से निराश सिंह ने 23 नवंबर, 2022 को कंपनी को कानूनी नोटिस भेजकर मामले को आगे बढ़ाया। हालांकि, नोटिस का भी कोई जवाब नहीं मिला, जिसके बाद उन्हें दिल्ली जिला उपभोक्ता आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज करानी पड़ी। रिपोर्ट के अनुसार, जिला आयोग ने अब सिंह के पक्ष में फैसला सुनाया है, जिसमें उबर को "सेवा में कमी" के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
बाद में उबर ने दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में इस फैसले के खिलाफ अपील की। हालांकि, राज्य आयोग ने पहले के फैसले को बरकरार रखा। जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि उबर ने न तो अपनी नाकामी के लिए कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण दिया और न ही चूक को सही ठहराने के लिए सबूत पेश किए।
आयोग ने की कड़ी टिप्पणी
11 नवंबर के अपने आदेश में आयोग ने टिप्पणी की, "परिवहन प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने वाले एक सर्विस प्रोवाइडर (सेवा प्रदाता) के रूप में, अपीलकर्ता (उबर) का यह दायित्व है कि वह यह सुनिश्चित करे कि सेवाएं बिना किसी अनावश्यक देरी या असुविधा के प्रदान की जाएं। इस जिम्मेदारी को पूरा करने में इसकी असमर्थता सेवा में स्पष्ट कमी को दर्शाती है। और अपीलकर्ता को शिकायतकर्ता को होने वाले नुकसान के लिए उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए।"
मुआवजा का आदेश
अदालत ने उबर को सिंह के वित्तीय नुकसान और असुविधा के लिए 24,100 रुपये और मानसिक परेशानी और प्रक्रिया के दौरान हुई कानूनी लागतों को कवर करने के लिए अतिरिक्त 30,000 रुपये सहित मुआवजा देने का आदेश दिया है। हालांकि, उबर ने अभी तक फैसले पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है।