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Okinawa: उपभोक्ता अदालत का फैसला, ओकिनावा स्कूटर की खराब बैटरी मुफ्त में बदलने का आदेश, ₹15000 का जुर्माना

Wed, 01 Jul 2026 08:24 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले ग्राहकों के अधिकारों से जुड़े एक अहम मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने ओकिनावा स्कूटर्स एंड मोटरसाइकिल्स इंडिया और उसके अधिकृत डीलरों को, वारंटी के तहत खराब बैटरी और स्पीडोमीटर को बिना किसी शुल्क के बदलने का आदेश दिया है। इसके साथ ही ग्राहक को 15,000 रुपये देने का भी निर्देश दिया गया है। जिसमें 10,000 रुपये मानसिक पीड़ा के मुआवजे और 5,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में शामिल हैं।
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Okinawa Electric Scooter Plant - फोटो : Okinawa Scooters
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विस्तार
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अगर आप भी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) खरीदने की सोच रहे हैं या खरीद चुके हैं, तो यह खबर आपके बेहद काम की है। इलेक्ट्रिक स्कूटर कंपनी Okinawa Scooters and Motorcycles India (ओकिनावा स्कूटर्स एंड मोटरसाइकिल्स इंडिया) और उसके डीलर्स को वारंटी के नियमों का उल्लंघन करना और ग्राहक को परेशान करना बहुत भारी पड़ गया है। एक जिला उपभोक्ता फोरम ने कंपनी को फटकार लगाते हुए ग्राहक को मुफ्त में पार्ट्स बदलने और मुआवजा देने का कड़ा आदेश सुनाया है।

कंज्यूमर कमीशन ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब निर्माता और डीलर्स सही आफ्टर-सेल्स सर्विस (बिक्री के बाद की सेवा) देने में नाकाम रहते हैं, तो इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले ग्राहकों को बिना किसी समाधान के बेसहारा नहीं छोड़ा जा सकता। 

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क्या है पूरा मामला?

  • पेशे से वकील, मोहम्मद ओवैसुद्दीन ओवैस नाम के एक ग्राहक ने फरवरी 2022 में 79,845 रुपये में एक 'Okinawa Praise Pro' इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदा था।
  • इस स्कूटर पर कंपनी की तरफ से 36 महीने (3 साल) की वारंटी दी गई थी, और वे नियमित रूप से अधिकृत सर्विस सेंटर्स पर इसकी सर्विसिंग भी करा रहे थे।

स्कूटर में क्या खराबी आई थी?

7 अगस्त 2024 को सर्विसिंग के लिए जाते समय स्कूटर अचानक बंद हो गया। इसके बाद वाहन को टो करके अधिकृत सर्विस सेंटर ले जाया गया।

जांच के दौरान:

  • सर्विस सेंटर ने बैटरी को खराब बताया।

  • शिकायतकर्ता ने स्पीडोमीटर में भी खराबी की जानकारी दी।

उस समय:

  • दोनों पार्ट्स वारंटी के दायरे में थे।

  • स्कूटर की उम्र केवल 31 महीने थी।

  • वाहन 22,475 किलोमीटर चल चुका था।

इसके बावजूद डीलर ने बैटरी या स्पीडोमीटर बदलने के बजाय शिकायतकर्ता को ई-मेल के जरिए सीधे कंपनी से संपर्क करने के लिए कहा।

Okinawa Electric Scooter Manufacturing Plant - फोटो : Okinawa Scooters

क्या कंपनी ने शिकायत का जवाब दिया?

शिकायतकर्ता ने 9 अगस्त और 12 अगस्त 2024 को कंपनी को ई-मेल भेजे, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि:

  • डीलर लगातार खराब स्कूटर वापस ले जाने का दबाव बनाता रहा।

  • बैटरी बदले बिना ही उनसे 550 रुपये अतिरिक्त वसूले गए।

  • इस तरह मरम्मत के नाम पर कुल 1,550 रुपये का भुगतान कराया गया।

चूंकि स्कूटर चलने की स्थिति में नहीं था, इसलिए शिकायतकर्ता को उसे अपने एक रिश्तेदार के घर रखना पड़ा।

आखिरकार उन्होंने सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का आरोप लगाते हुए जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

उपभोक्ता आयोग ने क्या कहा?

संगातारेड्डी स्थित मेदक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष पी कस्तूरी, सदस्य गज्जाला वेंकटेश्वरलू और माक्यम विजय कुमार शामिल थे, ने ओकिनावा और उसके डीलर्स को सेवा में कमी और गलत व्यापार प्रथाओं का दोषी पाया।

आयोग ने कहा कि डीलर ने वाहन मरम्मत के लिए स्वीकार किया था और अग्रिम राशि भी ली थी। इससे स्पष्ट है कि वाहन अधिकृत सर्विस सेंटर में खराबी दूर करने के लिए जमा कराया गया था।

आयोग ने कहा कि:

  • वारंटी की शर्तों के अनुसार खराब बैटरी की जांच, प्रक्रिया पूरी करना और उसे बदलना कंपनी एवं डीलरों की जिम्मेदारी थी।

  • ऐसा नहीं करना वारंटी का उल्लंघन है।

  • यह सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है।

स्पीडोमीटर को लेकर आयोग की क्या टिप्पणी रही?

आयोग ने स्पीडोमीटर में आई खराबी को भी गंभीर माना।

उसने कहा कि:

  • वाहन बंद करने पर हर बार ट्रिप मीटर का शून्य पर रीसेट हो जाना स्पष्ट रूप से डिजाइन दोष, खराब निर्माण गुणवत्ता और कमजोर प्रदर्शन को दर्शाता है।

  • बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद स्पीडोमीटर को ठीक या बदलने में विफल रहना भी सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार है।

डीलर के व्यवहार पर आयोग ने क्या कहा?

आयोग ने डीलर के रवैये पर भी कड़ी टिप्पणी की।

आयोग के अनुसार:

  • खराबी दूर किए बिना शिकायतकर्ता पर स्कूटर वापस ले जाने का दबाव बनाना उचित नहीं था।

  • शिकायतकर्ता को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर लगवाना वारंटी की जिम्मेदारी से बचने का प्रयास था।

  • यह स्पष्ट रूप से अनुचित व्यापारिक व्यवहार को दर्शाता है।

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EV ग्राहकों को लेकर आयोग ने क्या अहम टिप्पणी की?

आयोग ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले उपभोक्ताओं को अक्सर तब भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, जब निर्माता, डीलर और सर्विस सेंटर उचित आफ्टर-सेल्स सर्विस और वारंटी सपोर्ट उपलब्ध नहीं कराते।

आयोग के मुताबिक, ऐसी स्थिति में ग्राहक खुद को असहाय महसूस करते हैं और उन्हें अनावश्यक असुविधा झेलनी पड़ती है। 
 

आयोग ने आखिर क्या आदेश दिए?

आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए ओकिनावा स्कूटर्स एंड मोटरसाइकिल्स इंडिया और उसके दोनों अधिकृत डीलरों को संयुक्त रूप से ये निर्देश दिए:

  • वारंटी के तहत बैटरी को मुफ्त में बदलें।

  • स्पीडोमीटर भी बिना किसी शुल्क के बदलें।

  • शिकायतकर्ता को 10,000 रुपये मानसिक पीड़ा के मुआवजे के रूप में दें।

  • 5,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च के तौर पर अदा करें।

  • आयोग के आदेश का पालन 30 दिनों के भीतर किया जाए।

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