ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक को टीजीएसआरटीसी से मिला लेटर ऑफ इंटेंट
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ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक, जो भारत की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहन निर्माता है, अब हैदराबाद में सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह ग्रीन करने की तैयारी में है। इसकी शुरुआत पीएम ई-ड्राइव के तहत हुई है। ये ऑर्डर कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) के माध्यम से संचालित हो रहा है, जिसका उद्देश्य शहरों में ई-बसों को तेजी से अपनाना है। हालांकि हैदराबाद ओलेक्ट्रा का मुख्यालय है, इसलिए यहां इन बसों की तैनाती कंपनी के लिए एक घरेलू जीत की तरह है।
कैसी होंगी ये बसें?
ओलेक्ट्रा की ये नई बसें केवल इलेक्ट्रिक ही नहीं, बल्कि हाई-टेक और आरामदायक भी होंगी। इसमें:
- लो-फ्लोर कॉन्फिगरेशन: 12-मीटर लंबी इन बसों में चढ़ना और उतरना आसान होगा। ये एसी और नॉन एसी दोनों वेरिएंट्स में उपलब्ध होंगी।
- दमदार रेंज: एक बार फुल चार्ज होने पर ये बसें 250 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेंगी।
- सुपरफास्ट चार्जिंग: ऑपर्च्युनिटी चार्जिंग की मदद से ये बसें महज 45 मिनट में चार्ज हो सकेंगी।
- सुरक्षा और आराम: एडवांस फ्रंट और रियर एयर सस्पेंशन सिस्टम से लैस ये बसें भारतीय सड़कों के गड्ढों में भी स्मूथ राइड देंगी।
- समावेशी मोबिलिटी: इसमें व्हीलचेयर की समर्पित सुविधा होगी, ताकि दिव्यांग यात्रियों को कोई परेशानी न हो।
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क्यों खास है यह?
ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक पिछले कई वर्षों से ई-बस सेगमेंट में नंबर 1 स्थान पर रहाहै। कंपनी ने अब तक पूरे देश में 3,600 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन तैनात किए हैं और इसकी कुल ऑर्डर बुक अब 10,000 वाहनों को पार कर चुकी है। इसके साथ ही ओलेक्ट्रा की बसें अब तक भारत में 50 मिलियन किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर चुकी हैं। यह अनुभव कंपनी को स्वदेशी इंजीनियरिंग और ऑपरेशनल रिलायबिलिटी (भरोसेमंद संचालन) में दूसरों से आगे रखता है।
नेट-जीरो लक्ष्य में योगदान
ओलेक्ट्रा के एमडी महेश बाबू ने कहा कि यह ऑर्डर मेक इन इंडिया विजन के प्रति उनके योगदान को दर्शाता है। ये बसें न केवल आरामदायक सफर देंगी, बल्कि भारत के क्लीन एनर्जी और नेट-जीरो (शून्य कार्बन उत्सर्जन) के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इतना ही नहीं ये ओलेक्ट्रा केवल बसें ही नहीं, बल्कि भारी निर्माण कार्यों के लिए इलेक्ट्रिक टिपर्स भी बना रही है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को सस्टेनेबल बनाने में मदद कर रहे हैं।