चीन तकनीक के मामले में हमेशा दुनिया को हैरान करता आया है और इस बार उसने रेस का मैदान चुना है। चीन में एक बेहद अनोखी रेस होने वाली है। इसमें 100 से ज्यादा 'ह्यूमनॉइड रोबोट्स' की टीम हाफ-मैराथन में हिस्सा लेगी। ह्यूमनॉइड रोबोट्स वे रोबोट्स होते हैं जो इंसानों जैसे दिखते हैं। इस रेस का असल मकसद इन मशीनों को असली दुनिया की मुश्किलों और चुनौतियों के लिए परखना है। यह रेस 19 अप्रैल 2026 को चीन की राजधानी बीजिंग में होने वाली है। इस रेस की खास बात ये है कि इसमें सिर्फ रोबोट्स ही नहीं बल्कि इंसान भी दौड़ेंगे। रोबोट्स और इंसानों के बीच होने वाली इस रेस में 300 से ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट्स हिस्सा लेंगे।
यह 21 किलोमीटर लंबी हाफ-मैराथन बीजिंग के दाक्सिंग जिले में आयोजित की जा रही है। इसका माहौल बिल्कुल किसी आम पब्लिक मैराथन जैसा ही होगा, लेकिन असल में यह इन मशीनों के लिए एक बेहद कड़ा टेस्ट है। इस अनोखी रेस में हिस्सा लेने के लिए एक अहम शर्त यह है कि सभी रोबोट्स का 'ह्यूमनॉइड' होना जरूरी है, जिनकी लंबाई 0.5 मीटर से लेकर 2 मीटर के बीच होगी।
तकनीक के मोर्चे पर भी यह रेस काफी दिलचस्प होने वाली है, क्योंकि इसमें जहां कुछ रोबोट एआई की मदद से खुद फैसले लेकर पूरी तरह से ऑटोनोमस तरीके से दौड़ेंगे, वहीं कुछ को रिमोट कंट्रोल के जरिए कंट्रोल किया जाएगा। दुनिया भर की 20 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज और टेक कंपनियों की टीमें अपने इन खास रोबोट्स के साथ इस शानदार इवेंट का हिस्सा बन रही हैं।
मैराथन के दिलचस्प नियम
चूंकि यह एक हाई-टेक रेस है, इसलिए इसके नियम भी काफी दिलचस्प और अलग बनाए गए हैं। रेस के दौरान अगर किसी रोबोट की बैटरी खत्म हो जाती है या उसमें कोई तकनीकी खराबी आ जाती है तो टीमों को बैटरी बदलने या पूरे रोबोट को ही रिप्लेस करने की छूट दी गई है। हालांकि, ऐसा करने पर टीम को 10 मिनट का जुर्माना झेलना होगी, जिसे रेस खत्म होने पर उनके कुल समय में जोड़ दिया जाएगा।
आखिर क्यों हो रही है यह रेस?
इस इवेंट का मुख्य उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई बड़े तकनीकी कारण छिपे हैं। दरअसल, लैब की चारदीवारी से बाहर निकालकर असल दुनिया के माहौल में रोबोट्स की क्षमताओं को परखने का यह सबसे बेहतरीन तरीका है। 21 किलोमीटर तक दो पैरों पर लगातार चलना और दौड़ना मशीनों के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं होता। ऐसे में यह रेस रोबोट्स की सहनशक्ति, बैटरी लाइफ और उनका बैलेंस बनाए रखने की क्षमता का कड़ा इम्तिहान लेगी।
इसके अलावा, यह भविष्य की एक बड़ी तैयारी का भी हिस्सा है। चीन रोबोटिक्स के क्षेत्र में दुनिया का लीडर बनना चाहता है, क्योंकि वहां तेजी से घटती युवा आबादी और कामगारों की कमी जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए इन्हीं रोबोट्स और ऑटोमेशन को भविष्य के समाधान के रूप में देखा जा रहा है। आपको बता दें कि इससे पहले वर्ष 2025 में भी एक छोटी रोबोट रेस का आयोजन किया गया था, लेकिन 2026 में होने वाली यह हाफ-मैराथन अपने आप में दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे एडवांस इवेंट होने वाली है।
बीजिंग में हुआ टेस्ट रन
चीन में होने वाली यह दूसरी रोबोट हाफ-मैराथन है। 19 अप्रैल को होने वाली मुख्य रेस से पहले, बीजिंग के ई-टाउन डेवलपमेंट जोन में 70 से ज्यादा टीमों ने रात भर अपने रोबोट्स का टेस्ट किया। इन रोबोट्स को पूरे 21 किलोमीटर के ट्रैक पर दौड़ाया गया। इस ट्रायल में रोबोट्स के रास्ता खोजने से लेकर उनके उपकरणों के तालमेल और इमरजेंसी में काम करने के तरीके को अच्छी तरह परखा गया।
खुद रास्ता खोजना है बड़ी चुनौती
चाइनीज इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स के लियांग लियांग के मुताबिक, इस बार लगभग 40% टीमें पूरी तरह से 'ऑटोनॉमस नेविगेशन' पर निर्भर हैं। आयोजकों का मानना है कि यह इन मशीनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।
सिर्फ रेस पूरी करने पर भी मिलेगा इनाम
इस वर्ष रोबोट्स की सहनशक्ति के लिए नए अवॉर्ड भी रखे गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि जो रोबोट सिर्फ फिनिश लाइन तक पहुंच जाएंगे, उन्हें भी इनाम दिया जाएगा। दरअसल, रेस पूरी करना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। पिछले वर्ष जब यह इवेंट पहली बार हुआ था, तब 21 में से सिर्फ 6 रोबोट ही फिनिश लाइन पार कर पाए थे।
5 गुना बढ़ गया क्रेज
भले ही रोबोट्स के सामने कई तकनीकी चुनौतियां हों, लेकिन इस रोबोट हाफ-मैराथन को लेकर लोगों और टेक कंपनियों का क्रेज काफी तेजी से बढ़ा है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार हिस्सा लेने वाली टीमों की संख्या में लगभग 5 गुना का इजाफा हुआ है।
पिछली बार कैसा रहा रोबोट्स का प्रदर्शन?
पिछले वर्ष जब यह रेस पहली बार आयोजित की गई थी तो यह मशीनों के लिए काफी मुश्किल साबित हुई थी। उस वक्त कुल 21 रोबोट्स ने रेस शुरू की थी, लेकिन उनमें से सिर्फ 6 रोबोट ही फिनिश लाइन तक पहुंच पाए थे। हालांकि, उस दौरान 'टियांगोंग' नाम के एक रोबोट ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2 घंटे 40 मिनट में हाफ-मैराथन पूरी कर एक रिकॉर्ड बना दिया था।
इस बार तकनीक पहले से काफी बदल चुकी है। नई और एडवांस एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और ज्यादा मजबूत हार्डवेयर के दम पर इस वर्ष टीमें और भी बेहतर नतीजों की उम्मीद कर रही हैं।
भविष्य में इंसानों के काम आएंगे ये रोबोट्स
यह रेस सिर्फ एक खेल या मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि तकनीक की दुनिया में एक बहुत बड़ा कदम है। इस तरह के टेस्ट से जो शानदार रोबोट्स तैयार होंगे, वे भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं के समय बचाव कार्य करने में बहुत मददगार साबित होंगे। इसके अलावा, खदानों या फैक्ट्रियों की उन खतरनाक जगहों पर भी इन रोबोट्स को आसानी से काम पर लगाया जा सकेगा, जहां इंसानों का जाना सुरक्षित नहीं होता है।