भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग का अब तक का सफर कैसा रहा है?
अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम हमेशा से अचानक फैसले लेने के बजाय व्यापक जांच और धीरे-धीरे (चरणबद्ध तरीके से) आगे बढ़ाया गया है। इसके सफर को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:
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E15 ब्लेंडिंग (अप्रैल 2023 से शुरू):
भारत में अप्रैल 2023 से ही पेट्रोल में 15% इथेनॉल मिश्रण (E15) का संचालन शुरू कर दिया गया था।
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E19 ब्लेंडिंग (अप्रैल 2024 से लागू):
इसके बाद अगले कदम के रूप में अप्रैल 2024 से शुरू हुए पूरे वर्ष के दौरान E19 ब्लेंडिंग को जमीन पर उतारा गया।
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E20 ब्लेंडिंग (अप्रैल 2025 से जारी):
पिछले ढाई साल के चरणबद्ध क्रियान्वयन के बाद, अप्रैल 2025 से देश में E20 (20% इथेनॉल) ब्लेंडिंग का काम चल रहा है। इस ट्रांजिशन से पहले ऑटो निर्माताओं, तेल कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने मिलकर विस्तृत टेस्टिंग की थी ताकि गाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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करोड़ों गाड़ियां सड़क पर मुस्तैद:
मंगलवार को अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में देश भर में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और लगभग 20 लाख चार पहिया वाहन पहले से ही इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल पर सफलतापूर्वक चल रहे हैं।
सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने पर इतना जोर क्यों दे रही है?
भारत सरकार के लिए इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, जिसके पीछे ठोस आर्थिक और पर्यावरणीय कारण हैं:
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कच्चे तेल के आयात बिल में कटौती:
भारत दुनिया में कच्चे तेल के सबसे तेजी से बढ़ते उपभोक्ताओं में से एक है (वैश्विक कच्चे तेल की मांग की वृद्धि में भारत की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है)। इथेनॉल मिलाने से महंगे ईंधन आयात बिल को कम करने में मदद मिलती है।
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किसानों को फायदा और कम कार्बन उत्सर्जन:
भारत में मुख्य रूप से गन्ने और खाद्यान्न (अनाज) से इथेनॉल तैयार किया जाता है। इससे पर्यावरण में कार्बन का उत्सर्जन कम होता है और देश के किसानों को कमाई के अतिरिक्त अवसर मिलते हैं, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है।
क्या इथेनॉल ईंधन के खिलाफ कोई 'अंतरराष्ट्रीय साजिश' चल रही है?
सरकारी सूत्रों ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि इथेनॉल-मिश्रित ईंधन को लेकर सोशल मीडिया और इंटरनेट पर जानबूझकर गलत अफवाहें फैलाई जा रही हैं।
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विदेशी लॉबी का डर:
सूत्रों के मुताबिक, यह उन निहित स्वार्थों की एक "अंतरराष्ट्रीय साजिश" हो सकती है जो नहीं चाहते कि भारत जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यल) के आयात पर अपनी निर्भरता को कम करे और आत्मनिर्भर बने।
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भ्रामक अभियानों को फंडिंग:
अधिकारियों का दावा है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए भारत द्वारा 'E85 ईंधन' के रोलआउट ने वैश्विक कच्चे तेल और बैटरी इकोसिस्टम के कुछ हिस्सों को परेशान कर दिया है। यही कारण है कि विदेशी लॉबियों द्वारा कथित तौर पर भारतीय उपभोक्ताओं के बीच डर का माहौल पैदा करने के लिए भ्रामक अभियानों और फर्जी वीडियो को फंड किया जा रहा है।
हालांकि कुछ वाहन मालिक पुराने वाहनों की अनुकूलता, माइलेज और इंजन के रखरखाव के खर्च को लेकर चिंता जता रहे हैं। लेकिन सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि E20 को पूरी वैज्ञानिक जांच के बाद ही लाया गया था और E25 को लेकर बिना टेस्टिंग पूरे हुए कोई भी कदम नहीं उठाया जाएगा।