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V2V Technology: सरकार ला रही है V2V कम्युनिकेशन सिस्टम; अब गाड़ियां खुद बचाएंगी आपकी जान

Fri, 09 Jan 2026 06:01 PM IST
सुयश पांडेय ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में सड़क सुरक्षा को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार 2026 के अंत तक व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी लागू करने की तैयारी कर रही है। 
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व्हीकल-टू-व्हीकल प्रणाली के जरिए गाड़ियां बिना किसी मोबाइल नेटवर्क के एक-दूसरे से सीधे संपर्क साध सकेंगी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Freepik
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विस्तार
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भारत में सड़क हादसों को रोकने के लिए सरकार एक बड़ी और आधुनिक तकनीक लाने की तैयारी कर रही है। भारत सरकार 2026 के अंत तक 'व्हीकल-टू-व्हीकल' (V2V) कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी शुरू करने की योजना बना रही है। यह एक ऐसा सिस्टम होगा जिसमें गाड़ियां बिना किसी मोबाइल नेटवर्क के एक-दूसरे से सीधे संपर्क साध सकेंगी। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यों के परिवहन मंत्रियों के साथ हुई वार्षिक बैठक के बाद इस पहल की जानकारी दी। इस लेख में जानेंगे कि यह तकनीक कैसे काम करेगी और इसके क्या फायदे होंगे।

क्या है व्हीकल-टू-व्हीकल टेक्नोलॉजी?

इस टेक्नोलॉजी का मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है। यह सिस्टम विशेष रूप से उन दुर्घटनाओं को रोकने में कारगर होगा जहां सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों से पीछे से आ रहे तेज रफ्तार वाहन टकरा जाते हैं। इसके अलावा, सर्दियों के मौसम में घने कोहरे के कारण होने वाले बड़े हादसों को रोकने में यह तकनीक वरदान साबित हो सकती है। इस सिस्टम के जरिए गाड़ियां एक-दूसरे को सिग्नल भेजेंगी और ड्राइवर को अलर्ट करेंगी कि कोई दूसरी गाड़ी उनके बेहद करीब आ गई है।

जल्द ही नई तकनीक होगी लागू: नितिन गडकरी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि यह तकनीक जल्द ही लागू की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने बसों की सुरक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बसों की खराब डिजाइन के कारण कई बड़े हादसे हुए हैं। इसलिए अब मौजूदा बसों में भी अतिरिक्त सुरक्षा फीचर्स लगाए जाएंगे, जैसे-

  • फायर एक्सटिंग्विशर (आग बुझाने का यंत्र)
  • ड्राइवर के लिए नींद का पता लगाने वाला सिस्टम (ड्रोसीनेस डिटेक्शन सिस्टम)
  • यात्रियों के लिए इमरजेंसी हथौड़े

सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर ने बताया कि यह प्रोजेक्ट लगभग 5,000 करोड़ रुपये का होगा और ऐसी तकनीक अभी दुनिया के कुछ ही देशों में मौजूद है।

कैसे काम करेगा ये सिस्टम?

यह सिस्टम एक डिवाइस के जरिए काम करेगा जो 'सिम कार्ड' जैसा होगा। इसे गाड़ियों में इंस्टॉल किया जाएगा। जब भी कोई दूसरी गाड़ी किसी भी दिशा से आपकी गाड़ी के बहुत करीब आएगी तो सिस्टम आपको रियल-टाइम अलर्ट भेजेगा। कोहरे के दौरान जब विजिबिलिटी जीरो हो जाती है, तब यह फीचर बहुत काम आएगा। यह तकनीक सुरक्षित दूरी बनाए रखने के साथ-साथ सड़क किनारे खड़ी या रुकी हुई गाड़ियों के बारे में भी ड्राइवर को चेतावनी देगी। यह सिस्टम 360-डिग्री कम्युनिकेशन सुनिश्चित करेगा, यानी गाड़ी के किसी भी तरफ से खतरा होने पर सिग्नल मिलेगा।

यह तकनीक कब से लागू होगी?

परिवहन मंत्रालय 2026 के अंत तक इस तकनीक को नोटिफाई करने पर काम कर रहा है। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। शुरुआत में यह डिवाइस केवल नई गाड़ियों में लगाया जाएगा।

क्या यह ADAS के साथ काम करेगा?

V2V कम्युनिकेशन सिस्टम 'एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम' (ADAS) के साथ मिलकर काम करेगा। अभी कुछ महंगी गाड़ियां सेंसर पर आधारित होती हैं, लेकिन आधिकारिक रोलआउट के बाद उन्हें नए सिस्टम के साथ अलाइन किया जाएगा।

ग्राहक को कितना पैसा देना होगा?

अभी आधिकारिक कीमतें नहीं आई हैं, लेकिन अनुमान है कि गाड़ियों में इस हार्डवेयर से कीमतों में कुछ हजार रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है।

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