अपनी कार रखना अभी भी ज्यादातर लोगों के लिए महंगा सौदा साबित होता है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत इसे और अधिक महंगा बना रही हैं। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आप कार से चलें और इसकी लागत भी कम आए तो आप कार-पूलिंग का विकल्प चुन सकते हैं। इसके माध्यम से आपकी यात्रा का खर्च बहुत हद तक कम किया जा सकता है। अगर आप क्विक राइड जैसे विकल्प अपनाते हैं, तो इससे कुछ प्वाइंट्स की कमाई भी कर सकते हैं।
क्विक राइड के सीईओ केएनएम राव ने अमर उजाला को बताया कि ज्यादातर लोग अपने दोस्तों के बीच कार-पूलिंग करते हैं। लेकिन इस कार-पूलिंग में एक व्यक्ति को दूसरे का इंतजार करना पड़ता है। अगर किसी ने अपना काम पहले खत्म कर लिया, तो उसे दूसरे के फ्री होने तक के लिए इंतजार करना पड़ता है या दूसरे पर काम जल्द खत्म करने का दबाव रहता है। लेकिन क्विक राइड की कार-पूलिंग लगभग किराये की कार बुक करने जितना हमेशा उपलब्ध रहने वाला विकल्प है क्योंकि इससे एक बार में ही लाखों लोग जुड़े रहते हैं और आप किसी भी कार का चयन कर सकते हैं।
इस विकल्प में किसी भी स्मार्ट फोन पर क्विक राइड का एप डाउनलोड कर सकते हैं। जब भी आपको कहीं जाना हो, एप पर जाने की जगह सेलेक्ट करनी होगी। कार-पूलिंग करने वाले जितने भी दूसरे राइडर्स उसी दिशा में जा रहे होंगे उनका विकल्प आपके सामने आ जाता है। आप किसी भी विकल्प को चुनकर किसी भी साथी के साथ सफर कर सकते हैं।
दरअसल, इस तरीके में सफर करने पर किराये के रुप में कुछ प्वाइंट्स मिलते हैं। एक प्वाइंट एक रुपये के बराबर होता है। बारह-पंद्रह किलोमीटर तक की यात्रा के लिए लगभग पचास प्वाइंट का किराया आता है, जो 50 रुपये के बराबर होता है। जबकि इतनी ही दूर के लिए ऑटो या ओला का खर्च 200 से 250 रुपये के बीच होता है। इस तरह यह विकल्प काफी सस्ता है।
कार मालिक को प्रति शेयर करने वाले से प्वाइंट्स मिलेंगे। इस तरह औसतन दो या तीन लोगों के कार-पूलिंग में साथ आ जाने से उसे 150 से 200 प्वाइंट्स मिल जाते हैं। दूरी ज्यादा होने पर ये प्वाइंट्स ज्यादा भी हो सकते हैं। इस तरह कार चलाने मूल्य शून्य हो जाता है। ये प्वाइंट्स कार मालिक के खाते में जमा हो जाते हैं। वह किसी दूसरे दिन अपनी कार की बजाय किसी दूसरे कार से जाना चाहे, तो इन्हें दूसरी कार-पूल में किराये के रुप में चुका सकता है। लेकिन अगर वह चाहे तो इन प्वाइंट्स से किसी भी कंपनी के पेट्रोल पंप से पेट्रोल-डीजल भरवा सकता है। इस तरह उसकी कार चलाने की लागत लगभग शून्य हो सकती है।
क्विक राइड की यह सेवा अभी केवल उन लोगों के लिए है, जो किसी नामी कंपनी में काम करते हैं। क्विक राइड के एप पर प्रोफाइल बनाते समय कंपनी इसकी जांच करती है। इस तरह जब कोई क्विक राइड कार लेने के विकल्प में जाता है, तो उसे ड्राइवर का नाम, कार की जानकारी, ड्राइवर की उम्र, लिंग, कंपनी के नाम सहित पूरी जानकारी मिल जाती है। इसी तरह कार मालिक किन ग्राहकों को अपनी कार में लिफ्ट देना चाहता है, उसे उनकी पूरी जानकारी तुरंत ऑनलाइन ही पता चल जाती है। कार-पूलर्स के अच्छी कंपनियों में काम करने वाले वर्ग से होने के नाते यह पूरी तरह सुरक्षित होता है। कंपनी का दावा है कि अभी तक इस तरीके से किसी तरह के फ्रॉड की कोई बात सामने नहीं आई है।
अगर किसी व्यक्ति के पास कार नहीं है, लेकिन वह भी इस कार-पूलिंग का फायदा उठाना चाहता है, तो वह अपने स्मार्ट फोन में इस एप को डाउनलोड कर सकता है। अपना किराया चुकाने के लिए वह ऑन-लाइन विकल्प में ही जितने मूल्य का प्वाइंट्स चाहे, कंपनी से रिचार्ज करवा सकता है। यानी इस तरह से यह पेटीएम या उबर जैसी सेवाओं की तरह लोगों को जोड़ने का विकल्प बन सकता है। लेकिन व्यक्ति का किसी बड़ी कंपनी का कर्मचारी होना जरुरी है। ऐसा न होने पर एप पर कोई अपना प्रोफाइल नहीं बना सकेगा।
क्विक राइड के मुताबिक वह ऑड-ईवन के दौरान दिल्ली के लोगों की समस्या का समाधान बनकर सामने आ सकता है। इस समय पूरे भारत में उसके लगभग 28 लाख रजिस्टर्ड ग्राहक हैं। इनमें आठ लाख कार मालिक हैं जो अपनी कार-पूल करते हैं। दिल्ली-एनसीआर में उसके लगभग चार लाख ग्राहक हैं। बाइक-पूलिंग के लिए भी काफी लोग इस सुविधा का फायदा उठा रहे हैं। यह संख्या तेजी से बढ़ रही है।
क्विक राइड जैसे विकल्पों से शहर की सड़कों से ट्रैफिक का भार कम होता है। इससे पार्किंग की समस्या का भी समाधान होता है और प्रदूषण का स्तर भी कम होता है। कंपनी का दावा है कि वह 2020 तक सड़कों से रोजाना तीस लाख कारों को उतरने से रोकने में सफल रहेगी। इससे कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आएगी और देश को ईंधन की आत्म निर्भरता में भी मदद मिलेगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटो सेक्टर में छाई मंदी के लिए ओला-उबर के प्रति युवाओं के बढ़ते रुझान को जिम्मेदार बताया था। उनके मुताबिक युवा महंगी कार खरीदने की बजाय अपने स्मार्ट फोन से ओला-उबर कारें मंगा रहे हैं और कहीं भी जाकर अपना काम कर दूसरी कार से वापस आ जाते हैं। इसमें उन्हें महंगी कार खरीदने के लिए एक बार में बड़ा निवेश नहीं करना पड़ता। साथ ही वे कार मेंटेनेंस, ड्राइवर, ईंधन, ट्रैफिक और प्रदूषण से भी बच जाते हैं।