इसमें कोई संदेह नहीं कि एडवांस्ड बायो सेंसर आने से मनुष्य के शारीरिक संकेतों की निगरानी करना आसान हो गया है। हेल्थ बैंड और स्मार्ट वॉच इनकी मदद से ही काम करते हैं। लेकिन जब उपयोगकर्ता स्थिर अवस्था में अथवा कार या प्लेन के अंदर होता है तो ये सटीक माप नहीं दे पाते हैं। इसके समाधान के लिए सिंगापुर के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय और चीन के सिंघुआ विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक खास बायो सेंसर तैयार किया है, जो सभी अवस्थाओं में एक समान नतीजे देता है। यह उड़ते प्लेन से लेकर चलती कार के अंदर भी शरीर के संकेतों की सटीक माप लेने में सक्षम है। इससे चालक या पायलट के स्वास्थ्य की रियल टाइम निगरानी हो सकेगी, जो कि मोबिलिटी (गतिशीलता) के चलते संभव नहीं हो पाती थी।
वाहनों के शोर और कंपन में
चलते वाहन या उड़ते प्लेन में शारीरिक संकेतों की सटीक माप देने में सामान्य बायो सेंसर के सामने कंपन और शोर की चुनौती होती है। इस वजह से सेंसर संकेतों को सही से नहीं पढ़ पाता है। लेकिन नया बायो सेंसर शरीर के संपर्क में आए बिना ही हृदय और श्वसन की गति को ट्रैक कर सकता है। इस कारण यह कंपन और शोर के बावजूद कारगर है। साथ ही उड़ते विमान के केबिन अथवा चलती कार में मनुष्य के कार्डियोपल्मोनरी संकेतों को भी पढ़ सकता है, जिससे यह यातायात सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
शोध टीम के सदस्य शी तियान के अनुसार, यह ऑटोमोटिव बायो सेंसर गतिशील विमान या वाहन में कंपन और शोर के बावजूद सटीक परिणाम देता है। स्मार्ट वॉच या हेल्थ बैंड की तरह इसको शरीर के संपर्क में आने की जरूरत नहीं होती, बल्कि उनके बिना ही यह बायो सेंसर सटीक माप दे सकता है।
कैसे करेगा काम
यह बायो सेंसर एक खास तरह के मेटामटीरियल्स पर आधारित है, जो जरूरत के मुताबिक इसके गुणों को बदल देता है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने सीट बेल्ट पर कंघी के आकार में संवाहक धागों को बुनाई के रूप में एम्ब्रॉयडर किया। इससे ऐसी सतह तैयार हुई, जिससे रेडियो तरंगें पैदा होती हैं और शरीर से वायरलेस संकेतों का आदान-प्रदान करती हैं।
यह बायो सेंसर कपड़ों के जरिए ही सूक्ष्म शारीरिक गतिविधियों का भी पता लगा लेता है। सिग्नल प्रोसेसिंग पाइप लाइन की मदद से यह सेंसर लगातार चलते हुए वाहन में चालक की हृदय गति और श्वसन की निगरानी करता है।
सुरक्षा की दृष्टि से खास
इसे कार, हवाई जहाज और अन्य वाहनों की सीट बेल्ट में लगाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे चालकों के शारीरिक संकेतों की निगरानी कर शरीर की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा। उनके थकान या तनाव की स्थिति में होने पर यह संकेतों को पढ़कर सतर्क कर देगा। इससे चालक की लापरवाही से होने वाले हादसों को रोका जा सकेगा।
अक्सर हादसों के पीछे चालक की लापरवाही सबसे बड़ा कारण होती है। वैज्ञानिक अब इसके व्यापक उत्पादन और रेडियो घटकों का आकार छोटा करने पर काम कर रहे हैं। इससे इसकी लागत में भी कमी आएगी।