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पढ़ें फेसलिफ्टेड करोला ऑल्टिस के साथ देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे का रिव्यू 

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- फोटो : Amit Dwivedi
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जहां रास्ते हैं वहां विकास है और जहां विकास है वहां पर अच्छे रास्ते हैं। इस लाइन से आप समझ गए होंगे कि विकास की रफतार तभी तेज हो सकती है जब आपकी सड़कें अच्छी होंगी। ये बात प्रमा‌णित है और इसे मैं सिर्फ अपने आलेख में इसलिए प्रयोग कर रहा हूं क्योंकि आज एक गाड़ी के साथ एक ऐसे एक्सप्रेसवे की हम बात करने जा रहे हैं जिसने बहुत कुछ बदला है। राजनीति से परे एक हाईवे ने विकास की एक ऐसी गाथा लिखने की आधारशिला रख दी है जो आने वाले समय में हर कोई केस स्टडी के तरह प्रयोग करेगा। अब तक एक्सप्रेसवे का नाम लेने से सिर्फ दो बड़े एक्सप्रेसवे लोगों के जेहन में आते थे जिसमें से एक है ताज एक्सप्रेसवे और दूसरा है मुंबई पुणे एक्सप्रेसवे। लेकिन अब आगरा को दिल्ली से जोड़ता देश का सबसे लंबा 302 किलोमीटर का एक्सप्रेसवे शुरू हो चुका है। लखनऊ से आगरा की यात्रा अब आराम से तीन घंटे में पूरी हो जाती है। तो आइए इस एक्सप्रेसवे पर आपको लिए चलते हैं टोयोटा करोला ऑल्टिस में और बताते हैं कि अगर लखनऊ जाना हो तो इस पर जाना कितना फायदेमंद रहेगा।
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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के बारे में 

- फोटो : Amit Dwivedi
13 हजार 200 करोड़ रुपये में बनकर तैयार हुए इस एक्सप्रेसवे की दूरी 302 किलोमीटर की है जिसे 22 महीने के रिकॉर्ड टाइम में तैयार करके 21 नवंबर 2016 को इसका उद्घाटन किया गया। इसे देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होने का दर्जा हासिल हो चुका है। महज 188 मिनट में आप लखनऊ से आगरा की दूरी तय कर सकते हैं। यह 6 लेन का है जिसे भविष्य में 8 लेन का भी किया जा सकता है ऐसा इसका ढांचा बनाया गया है। इससे आगरा से लखनऊ के बीच की दूरी कम हो गई है। यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, कन्नौज, उन्नाव व लखनऊ को कनेक्ट करता है। इस एक्सप्रेसवे के एक हिस्से को इस तरह से तैयार किया गया है जिस पर जरूरत पड़ने पर फाइटर प्लेन की लैंडिंग भी करवाई जा सकती है। 

 

अभी क्या है हालत

- फोटो : Amit Dwivedi
इस एक्सप्रेसवे को उस समय की मौजूदा सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए पूरा होने से पहले ही शुरू कर दिया। इसका खामियाजा अब बहुत से वाहन चालक भुगत रहे हैं। आधिकारिक तौर पर इस हाईवे को ओपन नहीं किया गया है क्योंकि अभी भी इसके टोल ऑपरेशन को संचालित करने में तीन चार महीने का वक्त लगेगा। ऐसे में अगर आप इस हाईवे पर ड्राइव करते हैं तो 302 किलोमीटर की रिस्क यात्रा आप करते हैं। इस हाईवे पर अभी कई सेक्‍शन पर काम चला रहा है तो कुछ डायवर्जन भी हैं। चारों तरफ से वेरिकेटिंग सही से न होने की वजह से इस पर कभी भी अचानक गाय, भैंसे झुंड में दिख जाती हैं। अभी यहां पर हाईवे बैकअप कुछ नहीं है, पर हां एकाध जगह पुलिस की गाड़ी जरूर दिखती है। बहुत दूर तक इस रास्ते पर कोई अवरोध नहीं है इसलिए लोग आराम से तेज गति में ड्राइव करते हैं। लेकिन जब किसी जानवर के रूप में कोई बाधा सामने नजर आती है तो गाड़ी पर कंट्रोल नहीं कर पाते और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। आपस में टकराकर जल चुकी कारें व एक्सीडेंट के बाद सड़क पर बिखरे अवशेष आपको काफी जगह नजर आएंगे। अभी इस एक्सप्रेसवे पर टाइलेट की कोई सुविधा है और न ही फूड कोर्ट बने हुए हैं। लेकिन इनका निर्माण कार्य तेजी के साथ चल रहा है जिन्हें देखने से लगता है कि आने वाले एक दो सालों में यहां सारी व्यवस्‍था हो जाएगी।

 

कितनी बदली है करोला ऑल्टिस

- फोटो : Amit Dwivedi
जिस गाड़ी को मैं इस एक्सप्रेसवे पर चला रहा था वह थी टोयोटा की एग्जीक्यूटिव सेडान करोला ऑल्टिस। हुंडई इलांट्रा और स्कोडा ऑक्‍टेविया के अपडेट को देखते हुए कंपनी ने अपनी इस लोकप्रिय कार के फेसलिफ्ट को भारतीय बाजार में पेश किया। लेकिन इमानदारी से आपको बताएं तो टोयोटा को इस तरह के फेसलिफ्ट की जरूरत नहीं थी। इसके पहले की ऑल्टिस ज्यादा व्यावहारिक लगती थी। सबसे बड़े बदलाव की बात करें तो कंपनी ने इसके चेहरे को पूरी तरह से बदल दिया है। इसका ग्रिल, हेडलाइट और फ्रंट बंपर पूरी तरह से नए हैं। कहीं यह अपने परिवार के अन्य उत्पादों से अलग न दिखे इसलिए इसके ग्रिल को फॉर्चूनर के तरह ट्रीट करने की कोशिश की गई है जिसके चलते यह थोड़ा पतला लगता है। इसके बूट में कोई बदलाव नहीं किया गया है और न ही कार की प्रोफाइल में कोई बड़ा बदलाव हुआ है। पीछे से देखने पर इसकी सिर्फ टेल लाइट ही बदली गई है। लेकिन इसके हेडलैंप की गुणवत्ता में बेहद सुधार हुआ है और रात की ड्राइविंग में यह पूरे रास्ते को रोशन कर देती है। इसके हेडलैंप में अब एलईडी ने अपनी जगह बनाई है। 

 

अब अंदर से झांककर देखते हैं

- फोटो : Amit Dwivedi
गाड़ी के अंदर भी कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखता। सामान्य तौर पर बोलें तो इसका डैशबोर्ड एकदम नहीं बदला है पर अब सेंटर कंसोल के डिजाइन में थोड़ा फर्क दिखता है साथ ही कुछ और उपकरणों की गुणवत्ता में सुधार किया गया है।  इसमें दिया गया नया टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्‍टम अब बड़े स्क्रीन के साथ अच्छा लगता है साथ ही इसके एयर कॉन वेंट पूरी तरह से बदल दिए गए हैं। अब आपको इसमें नए गोलाकार साइड एयरकॉन वेंट व नई तरह से दिए गए स्टीयरिंग माउंटेड कंट्रोल दिए गए हैं साथ ही पीछे दिए गए 12 वोल्ट के सॉकेट की जगह अब यूएसबी पोर्ट ने ले ली है। केबिन में अब जगह ज्यादा लगती है तथा पीछे बैठने वाली सीट ज्यादा आरामदायक बन गई है। इसका इंफोटेनमेंट सिस्टम उतना सटीक नहीं है जितना क्रिस्टा का है पर इसके बावजूद आपको यह निराश नहीं करेगा। 

  

चलाने में है कैसी

- फोटो : Amit Dwivedi
2017 ऑल्टिस मेकैनिकली पूरी तरह से बदल गई है। मैं जो गाड़ी चला रहा था वह थी 1.4 लीटर डीजल। इसमें लगा 1346 डीजल इंजन इतनी बड़ी गाड़ी की क्षमता को पूरी तरह जस्टीफाई नहीं कर पाता। अगर गाड़ी में 4 लोग अच्छे कद काठी वाले बैठ जाएं तो इसको पिकअप लेने में बहुत दिक्कत होती है। इसे चलाने में मजा तब आता है जब आप इसे अकेले ड्राइव कर रहे हों। मुझे लगता है कि इसके डीजल इंजन की क्षमता ज्यादा होनी चाहिए क्योंकि इसका 88 एचपी की शक्ति व 205 एनएम का टॉर्क उस ड्राइविंग फन को नहीं दे पाता जिसके लिए आप इतनी बड़ी गाड़ी पर इतना पैसा खर्चते हैं। हालांकि अगर आप पावर के शौकीन नहीं हैं और गाड़ी का मतलब सिर्फ बढ़िया माइलेज समझते हैं तो फिर जोर से ताली बजा सकते हैं क्योंकि मैंने इसे गाड़ी को 66 लीटर डीजल में 1420 किलोमीटर चलाया।

इसका टैंक सिर्फ 43 लीटर का है। इसका मतलब ये हुआ कि इस गाड़ी से मुझे 21 किमीप्रली से भी ज्यादा माइलेज मिला। लेकिन 100 किमीप्रघं की गति का अनुशासन फॉलो करने के लिए इसमें क्रूज कंट्रोल होता मेरे पैर थकने से बच जाते। ताजएक्सप्रेसवे के ठीक बाद आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे पर जाकर सबसे ज्यादा कमी आपको यही खलेगी। क्योंकि लगभग 500 ‌किलोमीटर की ऐसी सड़क पर आप ड्राइव कर रहे होते हैं जहां पर ब्रेक पर पैर रखने की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती ऐसे में अगर आपकी गाड़ी में क्रूज कंट्रोल हो तो आप उसे एक तय स्पीड पर सेट करके सिर्फ स्टीयरिंग संभाल सकते हैं। इससे आपको अच्छा माइलेज भी मिलेगा और ओवरस्पीडिंग के वजह से पेनाल्टी भी नहीं भरनी पड़ेगी। लगभग 19 लाख रुपये वाली एक कार में आप इतनी ख्वाहिश तो कर ही सकते हैं। 

इसका 6 स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन ऐसे ही एक्सप्रेसवे पर प्रयोग किया जा सकता है शहरी ड्राइविंग में आप कभी यहां तक पहुंच ही नहीं पाएंगे। इंजन छोटा होने के वजह से शिफटिंग मजेदार नहीं रहती और हमेशा शक्ति की कमी महसूस होती रहती है। हालांकि 120 किमीप्रघं की गति पर यह आराम से क्रूज भी होती है। अगर आपको इससे और अच्छा माइलेज चाहिए तो स्पीडो मीटर पर कभी 100 का आंकड़ा पार मत करना। ब्रेकिंग अच्छी है और आपको कठिन परिस्थिति में भी यह निराश नहीं करेगी। इसके बूट में 470 लीटर की ढेर सारी जगह है तो लेकिन अगर इसमें आपने वजनी सामान रखा तो यह गाड़ी हर स्पीड ब्रेकर को किस करती हुई आगे बढ़ेगी। इसलिए इसके बूट में सामान भरते वक्त इस बात की जरूर सावधानी बरतें। 


 
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क्या आपको इसे खरीदना चाहिए

- फोटो : Amit Dwivedi
यह देश की उन लोकप्रिय एक्जीक्यूटिव सेडान में से एक है जो सबसे ज्यादा बिकती है। भले ही इसका डीजल इंजन शक्ति को तरस रहा है इसके बावजूद अभी भी इस वर्ग की यह एक शानदार कार है जिसमें वर्ल्ड क्लास सेफ्टी फीचर दिए गए हैं। इसका डीजल इंजन भले छोटा है पर पेट्रोल इंजन काफी सशक्त है जिसमें 1.8 लीटर का 138 बीएचपी की शक्ति देने वाला इंजन लगा है। डीजल की कीमत लगभग 19 लाख रुपये एक्सशोरूम दिल्ली है जबकि पेट्रोल की कीमत 19.91 लाख रुपये एक्सशोरूम दिल्ली है। 
 
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