साल 2002-03 के बाद देश में पहली बार कारों की बिक्री निगेटिव (नकारात्मक) हो सकती है। यह आशंका सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चर्स (सिआम) ने जताई है। पिछले तीन महीने से लगातार गिरती बिक्री और आगे भी बेहतर संभावना न देखते हुए सिआम ने सरकार से तुरंत कदम उठाने की भी मांग की है।
इंडस्ट्री ने सरकार से उत्पाद शुल्क में कमी करने और जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूवल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत स्पेशल स्कीम लाने की भी मांग कर दी है। सिआम के ताजा आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2013 में 1,73,420 कारों की बिक्री हुई है, जबकि साल 2012 में जनवरी महीने में 1,98,079 कारों की घरेलू बाजार में बिक्री हुई थी।
सोमवार को सिआम के डायरेक्टर जनरल विष्णु माथुर ने कहा कि जिस तरह से इस समय कारों की मांग है, उसे देखते हुए हमें घरेलू पैसेंजर कार बाजार में अपने लक्ष्यों को पाने की संभावना काफी कम दिख रही है। सिआम ने चालू वित्त वर्ष के लिए 0-1 फीसदी की विकास दर रहने की उम्मीद जताई थी। ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए ऑटो इंडस्ट्री सरकार से आगामी बजट में उत्पाद शुल्क में कमी करने की मांग कर रही है।
मांग की गई हे कि छोटी कारों पर उत्पाद शुल्क 10 फीसदी और दूसरी कारों पर उत्पाद शुल्क 22 फीसदी करना चाहिए। इसके अलावा सरकार से साल 2008-09 की तरह जेएनएनयूआरएम के तहत स्पेशल स्कीम भी लाने की मांग की गई है। सिआम के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2012 से लेकर जनवरी 2013 के बीच कारों की बिक्री 1.8 फीसदी कम हुई है। इस दौरान 15,56,283 कारों की बिक्री हुई है। सिआम ने इसके पहले जनवरी 2013 में कारों की बिक्री में 1 फीसदी तक की ग्रोथ रहने की उम्मीद जताई थी।