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गलती इंसान की बदनाम होती गाड़ियां, इन 6 अहम बातों पर गौर करें

Fri, 03 Feb 2017 05:21 PM IST
Amit Dwivedi / Amar Ujala /New Delhi
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ध्यान से करें ड्राइव, सुरक्षा जरूरी है।
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इंदिरापुरम में एक ऑडी क्यू 7 ने ऑटो रिक्‍शा को टक्कर मार दी जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। इस घटना को देखते ही पता चल जाता है कि इसमें पूरी लापरवाही ड्राइवर की है। क्योंकि एक ऐसी कार जो सुरक्षा मानकों से पूरी तरह लैश है वो भला कैसे अनियंत्रित हो सकती है। इससे साफ पता चलता है कि ड्राइवर को ड्रा‌इविंग स्किल नहीं आती थी नहीं तो यह हादसा नहीं होता। अगर वो सिर्फ तेज ब्रेकिंग भी करता तो गाड़ी महज कुछ मीटर में रुक जाती जिस स्पीड पर इस घटना के होने का जिक्र किया जा रहा है। ऐसे में एक और लापरवाह ड्राइवर के वजह से एक मशीन फिर बदनाम हो गई। ऐसी बहुत सारी घटनाएं हो रही हैं जिनमें दुर्घटना की मुख्य वजह गाड़ी नहीं बल्कि वो इंसान है जो उसे चला रहा होता है। मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट और हाईवे के मुताबिक बीते कुछ महीनों में लगभग 1 लाख 46 हजार लोगों ने सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवाई है। 2015 में हुई दुर्घटनाओं में लगभग 77.1 फीसदी मामलों में गलती ड्राइवर की पाई गई। आइए आपको बताते हैं किसकी वजह से ये हादसे होते हैं और इन हादसों को कैसे टाला जा सकता है। 
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लाइसेंस बनवाने के नियम बनें सख्त 

ये साइन पहचानने हैं जरूरी।
अभी भी देश के अधिकतर लाइसेंस जारी करने वाले दफतर में लोग जुगाड़ से अपना काम करवा लेते हैं। अगर किसी को गाड़ी चलाना नहीं आता और इसके पास लाइसेंस है इसका मतलब है कि वह गाड़ी लाइसेंस बनवाने के बाद सीख रहा है। ऐसे में न तो उसे गाड़ी चलाने का तकनीकि ज्ञान हो पाता है और न ही यातायात के नियमों के प्रति वह जागरूक बनता है। अगर सरकार लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरते और नियमों कड़ा किया जाए तो सड़क दुर्घटनाओं के वो मामले जो ड्राइवर के गलती से होते हैं उससे बचा जा सकता है।

नाबालिग से न करवाएं ड्राइव

बच्चों को न दें कार की स्टीयरिंग।
बहुत से मां-बाप इस बात को देखकर खुश हो जाते हैं कि उनका बेटा या बेटी वयस्क होने से पहले ही ड्राइविंग कर रहे हैं। वयस्क होने के लिए 18 की उम्र इसलिए रखी गई है जिससे परिपक्वता के साथ कोई फैसला लिया जा सके। ऐसा करके न सिर्फ आप अपने बच्चों की जिंदगी बचा पाएंगे साथ ही सड़क पर चल रहे लोग भी सुरक्षित रहेंगे। भारत में हो रही कई कार दुर्घटनाओं में नाबालिगों का नाम सामने आया है।

ड्राइवर रखते समय बरतें सावधानी 

ड्राइवर रखते समय सावधानी बरतें।
अगर आपके पास हाईएंड कारें हैं तो उनके लिए ड्राइवर रखने में सावधानी बरतें। ड्राइवर का अतीत झांकने के साथ उसका प्रशिक्षण भी लें इसके बाद ही उसे अपनी गाड़ी की चाभी सौंपें। उदाहरण के तौर पर कल तक 1200 सीसी इंजिन वाले कार की ड्राइविंग कर रहे एक ड्राइवर को जब आप ऑडी क्यू 7 की चाभी सौंपते हैं तो मानकर चलिए आप अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी मार रहे हैं। अगर ड्राइवर ट्रेंड न हो तो आप उसे पहले प्रशिक्षित करवाएं या फिर खुद करें तब उसे अपनी कार की चाभी दें। 

क्यों होते हैं छोटी सड़कों पर ये हादसे

ऐसी दुर्घटनाएं बेकसूर इंसानों की जान ले लेती हैं।
गाजियाबाद में ‌हुए हादसे की ही बात करें तो गाड़ी की हालत देखकर साफ पता चलता है कि ड्राइवर लापरवाही से ड्राइव कर रहा था और इसे अपने खुद के ब्रेकिंग पर कांफीडेंस ही नहीं था। सामने मुसीबत देखकर अगर तेज ब्रेकिंग की गई होती तो ऑडी क्यू 7 का एंटी ब्रेकिंग सिस्टम गाड़ी को दुर्घटना से पहले स्टॉप कर लेता। लेकिन अनुभव की कमी के कारण हम ऐसे हादसों का शिकार हो जाते हैं। अगर आप मोहल्ले की सड़कों से निकल रहे हो तो आपकी स्‍पीड 40 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए क्योंकि आप हाईवे पर नहीं हो।
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जब चला रहे हों हाई एंड कारें 

कार का एबीएस कुछ इस तरह से काम करता है।
जब कभी आप ज्यादा शक्ति वाली कार ड्राइव कर रहे हों तो ध्यान रखें कि आप की गति ज्यादा होगी इसलिए आप अपनी नजरें एकदम सामने टिकाकर रखें। क्योंकि हाई एंड कारों की खासियत ये होती है कि 100 व 120 की गति पर भी पता नहीं चलने नहीं देतीं कि आपकी स्पीड ज्यादा है। ऐसी दुर्घटनाओं में गलती गाड़ी की नहीं उस इंसान की होती है जो उसे ड्राइव कर रहा होता है। हाल ही में ऑडी क्यू 7 के ड्राइवर की लापरवाही से 4 लोगों की जान गई उससे साफ पता चलता है कि देश में ड्राइवर प्रशिक्षण की सख्त जरूरत है। तेज ब्रेकिंग से न डरें और आवश्यकता होने पर गाड़ी को ब्रेक करें आपकी गाड़ी कुछ दूर लेकर रुक जाएगी क्योंकि उसमें वो फीचर दिए गए हैं जिससे आप सुरक्षित रह सकें और लोगों को सुरक्षित रख सकें। 
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