बैटरी से चलने वाली कारों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच कार चार्जिंग की एक नई तकनीक के आने के बाद यह कारें बेहद मुनाफे का सौदा बनने वाली हैं।
नई तकनीक में कारें बिना किसी खर्च के अपने मालिक के लिए पैसा कमाने और बिजली न होने की स्थिति में घरों को रोशन करने का जरिया भी बन जाएंगी।
अमेरिका की डेलवेयर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विलेट एम. कैंपटन ने क्षेत्रीय पावर ग्रिड ऑपरेटर और एक अन्य इलेक्ट्रिक कंपनी के साथ मिल कर टू वे चार्जिंग यानी दोतरफा ऊर्जा का संचार करने वाली इस तकनीक को तैयार किया है।
इस तकनीक से कारों को चार्ज किया जा सकता है और बिजली न होने की स्थिति में कारों की फुल चार्ज बैटरी का इस्तेमाल घरों को रोशन करने में भी किया जा सकता है।
विदेशों में इस तरह की कारों के लिए पेट्रोल पंप की तर्ज पर चार्जिंग केंद्र बनाए गए हैं। चार्जिंग केंद्रों के नेटवर्क के जरिए बिजली देने वाली कंपनियों के ग्रिड भी इन कारों से जुड़े रहेंगे और मांग बढ़ने की स्थिति में कारों की बैटरियां पावर ग्रिडों को बैकअप मुहैया कराएंगी।
जब यह कारें पावर ग्रिड के लिए काम कर ही होंगी तब कार मालिक को पांच डॉलर प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत फिलहाल 15 कारों का एक बैकअप ग्रिड तैयार किया गया है।
क्या है टू वे चार्जर
टू वे चार्जर यानी दोनों तरफ ऊर्जा देने वाली इस तकनीक के तहत इलेक्ट्रिक कारों में ऐसे चार्जर लगाए जाएंगे जो कार की बैटरी को चार्ज भी करेंगे और जरूरत पड़ने पर चार्जर के आउटपुट टर्मिनल का इस्तेमाल बैटरी की ऊर्जा के अन्य उपयोग के लिए किया जाएगा। इसे घरेलू इनवर्टर के उदाहरण से समझा जा सकता है।