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CAQM: क्या आप भी खरीदने वाले हैं छोटा मालवाहक वाहन? तो जान लीजिए यह नया नियम, वरना रद्द हो सकता है रजिस्ट्रेशन

Thu, 20 Aug 2026 05:52 PM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

CAQM new rules: दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हवा और वाहनों से फैलते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सीएक्यूएम ने लाइट गुड्स व्हीकल्स के नए रजिस्ट्रेशन पर पेट्रोल, डीजल और CNG पर रोक लगाने की समय-सीमा तय कर दी है। दिल्ली-NCR में छोटे मालवाहक वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन पर चरणबद्ध तरीके से रोक लगेगी। आइए जानते हैं सीएक्यूएम के इस बड़े फैसले के बारे में सबकुछ विस्तार से।
 
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दिल्ली-NCR में मालवाहक वाहनों के लिए बदलीं शर्तें - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
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Delhi NCR vehicle registration: दिल्ली एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने दिल्ली और आस-पास के जिलों में N1 (3.5 टन तक) और N2 (3.5 से 7.5 टन तक) कैटेगरी के मालवाहक वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन को चरणबद्ध तरीके से केवल इलेक्ट्रिक (EV) या क्लीन फ्यूल में बदलने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।  

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किन पेट्रोल-डीजल-CNG वाहनों पर 2027 से रोक

  • CAQM के निर्देशों के अनुसार एन1 कैटेगरी में 3.5 टन तक के लाइट गुड्स व्हीकल्स आते हैं। एक जनवरी 2027 से N1 कैटेगरी के पेट्रोल, डीजल और सीएनजी से चलने वाले नए लाइट गुड्स व्हीकल्स का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा।इस का मतलब है कि इस तारीख के बाद दिल्ली में इस कैटेगरी में नए पारंपरिक ईंधन वाले मालवाहक वाहनों की एंट्री पर रोक रहेगी।
  • दिल्ली के अलावा गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत में भी कुछ नियम एक जुलाई 2027 से लागू होंगे। NCR के बाकी जिलों में N1 कैटेगरी से जुड़े प्रतिबंध 2028 से लागू किए जाएंगे। शुरुआती चरण में मुख्य रूप से पेट्रोल और डीजल वाहनों को प्रतिबंध के दायरे में रखा जाएगा।


N2 कैटेगरी के लिए नई टाइमलाइन क्या है?

  • वहीं अगर एन2 कैटेगरी की बात करें तो CAQM ने अब टाइमलाइन और स्पष्ट कर दी है। एन2 कैटेगरी के लिए नियम चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे।
  • CAQM के मेंबर सेक्रेटरी तरुण कुमार पिथोड़े के अनुसार, दिल्ली में एक जनवरी 2028 से N2 कैटेगरी के सिर्फ EV वाहनों का रजिस्ट्रेशन होगा।
  • यानी इस तारीख से दिल्ली में एन2 कैटेगरी के नए वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक विकल्प को ही रजिस्ट्रेशन की अनुमति मिलेगी।

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ज्यादा वाहन संख्या वाले जिलों में 1 जुलाई 2028 से सिर्फ EV

  • वहीं, जिन दूसरे जिलों में वाहनों की संख्या ज्यादा है, वहां एन2 कैटेगरी का यही नियम एक जुलाई 2028 से लागू होगा। यानी इन जिलों में भी इस तारीख से N2 कैटेगरी के नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिए सिर्फ EV विकल्प की अनुमति होगी।
  • जबकि N2 कैटेगरी के नियमों का अगला चरण एक जनवरी 2029 से लागू होगा। इस तारीख से N2 कैटेगरी में सिर्फ CNG और EV वाहनों के रजिस्ट्रेशन की अनुमति होगी। यानी N2 कैटेगरी में पेट्रोल और डीजल वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन पर रोक बरकरार रहेगी, जबकि CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को अनुमति मिलेगी।


सीएक्यूएम ने क्यों लिया यह फैसला?

  • सीएक्यूएम के अनुसार, लाइट गुड्स व्हीकल्स कुल एक्टिव व्हीकल स्टॉक का सिर्फ 1.2 प्रतिशत हैं, लेकिन PM2.5 यानी पार्टिकुलेट इमिशन में इनकी हिस्सेदारी करीब 3.3 प्रतिशत है।
  • यानी वाहनों की संख्या कम होने के बावजूद प्रदूषण में इनका योगदान अपेक्षाकृत ज्यादा है। इसी वजह से आयोग ने इस कैटेगरी के वाहनों को क्लीन मोबिलिटी की ओर ले जाने के लिए चरणबद्ध नियम बनाए हैं।
  • तरुण कुमार पिथोड़े के अनुसार, ये निर्देश एक्सपर्ट कमिटी की सिफारिशों, सोर्स-अपोर्शनमेंट स्टडीज और अलग-अलग कैटेगरी के वाहनों से होने वाले प्रदूषण के आकलन के आधार पर जारी किए गए हैं।
  • यानी यह फैसला सिर्फ वाहनों की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि उनके प्रदूषण में योगदान और वैज्ञानिक अध्ययनों को ध्यान में रखकर लिया गया है।

क्या फायदा होगा?
CAQM का यह कदम दिल्ली-NCR में पारंपरिक ईंधन वाले कमर्शियल वाहनों की जगह EV और CNG जैसे क्लीनर विकल्पों को बढ़ावा देने की रणनीति का हिस्साद है। खास तौर पर N2 कैटेगरी में पहले EV को प्राथमिकता और बाद में CNG और EV को अनुमति देने का रोडमैप तैयार किया गया है।

एग्रीगेटर्स और ई-कॉमर्स फ्लीट पर पहले से सख्ती

  • सीएक्यूएम पहले ही एग्रीगेटर्स और ई-कॉमर्स कंपनियों के फ्लीट को लेकर निर्देश जारी कर चुका है। जनवरी 2026 से इन कंपनियों को अपने फ्लीट में सिर्फ CNG या इलेक्ट्रिक वाहन शामिल करने का आदेश दिया गया था।
  • अब लाइट गुड्स व्हीकल्स के नए रजिस्ट्रेशन को लेकर नियमों में सख्ती इसी व्यापक प्रदूषण नियंत्रण रणनीति का हिस्सा है।
  • साथ ही सीएक्यूएम ने स्टोन क्रशिंग यूनिट्स से निकलने वाली धूल पर नियंत्रण के लिए CPCB की गाइडलाइंस लागू करने का फैसला किया है। इसके साथ ही प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की निगरानी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए वीडियो, सेंसर और व्हील-वॉशिंग जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जाएगा।
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