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कार में कैप्टन सीट लगवाने से बढ़ेगा कंफर्ट या घटेगी सुरक्षा?: जगह से सेफ्टी तक, जानें क्या आ सकती है चुनौतियां

Sat, 03 Oct 2026 10:06 AM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लंबी ड्राइव के दौरान बेहतर आराम और प्रीमियम अहसास के लिए कैप्टन सीट्स को ज्यादा पसंद किया जाता है। आमतौर पर ऐसी सीट्स छह या सात सीटर बड़ी और लग्जरी गाड़ियों में मिलती हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या वे अपनी कार की पिछली बेंच सीट हटाकर आफ्टरमार्केट कैप्टन सीट्स लगवा सकते हैं? क्या ऐसा करना सही होगा और अगर इन्हें हैचबैक में लगवाया जाए, तो किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है? आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...
 
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छोटी कार में कैप्टन सीट लगवाना पड़ सकता है भारी - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
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सफर का आरामदायक बनाने के लिए कैप्टन सीट्स एक बढ़िया विकल्प मानी जाती हैं। कैप्टन सीट्स को खासतौर पर ज्यादा कंफर्ट के लिए भी जाना जाता है। आमतौर पर ये सीट्स एमपीवी और बड़ी एसयूवी जैसी गाड़ियों की दूसरी रो में देखने को मिलती है, लेकिन हैचबैक कारों में आमतौर पर पीछे बेंच सीट दी जाती है। ऐसे में कई हैचबैक मालिकों के मन में सवाल आता है कि क्या पीछे की बेंच सीट हटाकर कार में दो कैप्टन सीट्स लगवाई जा सकती हैं? तकनीकी तौर पर ऐसा करना संभव है, लेकिन इसमें कई व्यावहारिक और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां आ सकती है। जानिए क्या...

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क्या हैचबैक में लगवा सकते हैं कैप्टन सीट्स?
हां...मार्केट में किसी भी कार की सीट को मॉडिफाई किया जा सकता है। यह तकनीकी रूप से संभव भी हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसा करना सुरक्षित ही हो। क्योंकि हैचबैक कारों का केबिन और फ्लोर डिजाइन उनकी ओरिजिनल बेंच सीट के हिसाब से तैयार किया जाता है। कैप्टन सीट्स लगाने के लिए इस डिजाइन में बदलाव करने पड़ सकते हैं। यही वजह है कि ऐसी मॉडिफिकेशन में कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं।
इसके अलावा सुरक्षा और कानूनी पहलुओं को देखते हुए भी इस तरह का बदलाव नुकसानदेह साबित हो सकता है, इसलिए एक्सपर्ट्स कहते हैं कि हैचबैक में ओरिजिनल बेंच सीट हटाकर कैप्टन सीट्स लगवाना उचित नहीं माना जाता।
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हैचबैक में कैप्टन सीट्स लगवाने की बड़ी चुनौतियां

छोटी कार में कैप्टन सीट लगवाना पड़ सकता है भारी - फोटो : एआई जनरेटेड
1. केबिन में जगह की कमी
इसकी सबसे बड़ी समस्या स्पेस को लेकर आ सकती है। हैचबैक कारों का केबिन आमतौर पर MPV या बड़ी SUV के मुकाबले छोटा होता है। कैप्टन सीट्स आकार में बड़ी और भारी होती हैं।
अगर पीछे की बेंच सीट हटाकर दो अलग-अलग कैप्टन सीट्स लगाई जाती हैं, तो दोनों सीटों के लिए ज्यादा जगह की जरूरत होगी। इससे पीछे का लेगस्पेस और बूट स्पेस भी प्रभावित हो सकता है और कार का उपलब्ध स्पेस लगभग खत्म हो सकता है।

2. सीट लगाने के लिए जरूरी फिक्सिंग प्वॉइंट्स नहीं होते
कैप्टन सीट्स को मजबूती से लगाने के लिए खास फिक्सिंग प्वॉइंट्स की जरूरत हो सकती है। हैचबैक कारों में आमतौर पर ये प्वॉइंट्स कैप्टन सीट्स के हिसाब से दिए ही नहीं जाते। ऐसे में बाहर से सीट लगाने के लिए कार के मौजूदा फ्लोर और माउंटिंग सिस्टम में बदलाव करना पड़ सकता है।

3. कैप्टन सीट्स के लिए ज्यादा जगह चाहिए
बता दें कि कैप्टन सीट सिर्फ बैठने के लिए नहीं होती। इसमें आर्मरेस्ट और सीट को पीछे की ओर रीक्लाइन करने की सुविधा भी हो सकती है। इसके लिए आसपास पर्याप्त जगह चाहिए। छोटी हैचबैक में ऐसी सीट लगाने के बाद केबिन काफी तंग हो सकता है। इससे सीट लगाने के बाद कंफर्ट बढ़ने के बजाय पीछे बैठने वाले यात्रियों के लिए उपलब्ध जगह कम हो सकती है।

4. कार के फ्लोर और बॉडी में बदलाव का खतरा
हैचबैक का फर्श और सीट माउंटिंग पॉइंट्स कंपनी की ओर से बेंच सीट के हिसाब से डिजाइन किए जाते हैं। कैप्टन सीट लगाने के लिए फ्लोर में कटिंग या वेल्डिंग करनी पड़ सकती है। इस तरह के बदलाव कार की बॉडी और उसके मूल स्ट्रक्चर को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए केवल सीट बदलने के लिए कार के फ्लोर में इस तरह का बदलाव कराना जोखिम भरा हो सकता है।

5. सुरक्षा से समझौता हो सकता है
कार की ओरिजिनल सीटें कंपनी के डिजाइन और सुरक्षा मानकों के हिसाब से तैयार की जाती हैं और क्रैश टेस्टिंग का हिस्सा होती हैं। इसके अलावा जानकार यह भी कहते हैं कि मॉडिफाई करके लगाई गई कैप्टन सीटें दुर्घटना के समय अपनी जगह से उखड़ सकती हैं।  इससे यात्रियों को गंभीर चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है।
साथ ही सीट की स्थिति बदलने से सीट बेल्ट का एंगल भी बिगड़ सकता है। ऐसे में दुर्घटना के दौरान सीट बेल्ट उस तरह काम नहीं कर पाएगी, जिस तरह कार के ओरिजिनल डिजाइन में उसे काम करना था।
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छोटी कार में कैप्टन सीट लगवाना पड़ सकता है भारी - फोटो : एआई जनरेटेड
हैचबैक में ज्यादा कंफर्ट के लिए क्या करें?
अगर आपको अपनी हैचबैक की पिछली सीट पर लंबे सफर के दौरान ज्यादा कंफर्ट चाहिए, तो कैप्टन सीट लगवाने के बजाय ओरिजिनल बेंच सीट में ही कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। जो इस प्रकार हैं...
  • कस्टम कुशनिंग: पीछे की ओरिजिनल बेंच सीट में अतिरिक्त फोम या मेमोरी फोम लगवाकर कुशनिंग को बेहतर किया जा सकता है। इससे सीट का कंफर्ट बढ़ सकता है और लंबे सफर में बैठने का अनुभव बेहतर हो सकता है।
  • आर्मरेस्ट और हेडरेस्ट: पीछे की सीट के लिए अच्छी क्वालिटी का सेंटर आर्मरेस्ट भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा एडजस्टेबल हेडरेस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह के बदलाव कैप्टन सीट लगाने की तुलना में ओरिजिनल सीट सेटअप को बनाए रखते हुए पीछे बैठने वालों के कंफर्ट को बेहतर करने में मदद कर सकते हैं।
कैप्टन सीट के लिए कार बदलना ज्यादा बेहतर विकल्प
विशेषज्ञ तो यह भी कहते हैं कि अगर आपके पास बजट है, और आपको कैप्टन सीट्स का कंफर्ट पसंद है और आप अक्सर लंबे सफर करते हैं, तो ऐसी कार लेना ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है, जिसमें कंपनी की ओर से ही दूसरी रो में कैप्टन सीट्स दी गई हों। क्योंकि कंपनियां एमपीवी और बड़ी एसयूवी में कैप्टन सीट्स के लिए पहले से पर्याप्त जगह, सही फिक्सिंग प्वॉइंट्स और सीट बेल्ट सिस्टम को ध्यान में रखकर डिजाइन तैयार करती हैं। इसलिए किसी हैचबैक को मॉडिफाई करने के बजाय फैक्ट्री-फिटेड कैप्टन सीट वाली कार का विकल्प ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है।
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