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E20: क्या बारिश में ई20 पेट्रोल हो सकता है दूषित? पेट्रोल पंप संचालकों ने जताई चिंता, FADA और सरकार ने दी सफाई

Thu, 16 Jul 2026 07:49 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत सरकार के महत्वाकांक्षी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल प्रोग्राम के तहत देशभर में E20 ईंधन (20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल) की आपूर्ति अनिवार्य कर दी गई है। लेकिन इसी बीच, तीन पेट्रोल पंप मालिकों ने एक नई और गंभीर चुनौती की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, बारिश के मौसम और तटीय क्षेत्रों में E20 पेट्रोल के पानी से दूषित होने का खतरा सामने आ रहा है। जानें पूरी डिटेल्स।
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Can Monsoon Contaminate E20 Fuel - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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देशभर में E20 पेट्रोल को मानक ईंधन के रूप में लागू किए जाने के बाद इसे लेकर लगातार चर्चा जारी है। अब इस बहस में एक नया पहलू सामने आया है। कुछ पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि मानसून के दौरान और समुद्री तटीय इलाकों में E20 पेट्रोल में पानी की मात्रा बढ़ने का खतरा हो सकता है। जिससे ईंधन की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है।

हालांकि, इस दावे पर ऑटोमोबाइल डीलर्स के संगठन FADA (फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) और केंद्र सरकार ने अलग रुख अपनाया है। उनका कहना है कि इथेनॉल की नमी सोखने की क्षमता पहले से ज्ञात है और इसे ध्यान में रखकर ही ईंधन के मानक तथा वाहन डिजाइन तैयार किए गए हैं। 

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पेट्रोल पंप संचालकों ने E20 को लेकर क्या चिंता जताई है?

मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, तीन पेट्रोल पंप संचालकों ने बताया कि E20 पेट्रोल में मौजूद 20 प्रतिशत इथेनॉल की एक प्राकृतिक विशेषता मानसून के दौरान परेशानी का कारण बन सकती है।

उनके अनुसार, इथेनॉल हाइग्रोस्कोपिक होता है। यानी यह अपने आसपास के वातावरण से नमी या पानी के अणुओं को आकर्षित कर सकता है। उनका कहना है कि इसी गुण के कारण बरसात के मौसम और समुद्री क्षेत्रों में E20 पेट्रोल के दूषित होने की आशंका बढ़ जाती है।


मानसून में E20 पेट्रोल के दूषित होने की आशंका क्यों जताई गई?

रिपोर्ट में एक उद्योग विशेषज्ञ के हवाले से बताया गया कि अधिकांश पेट्रोल पंपों के भूमिगत ईंधन टैंक पारंपरिक पेट्रोल को स्टोर करने के लिए बनाए गए थे, न कि अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए।

विशेषज्ञ के अनुसार, इन टैंकों में कई कारणों से थोड़ी मात्रा में पानी पहुंच सकता है।

पानी पहुंचने के संभावित कारण

  • बारिश के दौरान पानी का रिसाव

  • नमी या संघनन (कंडनसेशन)

  • पेट्रोल लेकर आने वाले टैंकर के जरिए पानी का प्रवेश

उनका कहना है कि यदि पूरे E20 स्टॉक में पानी की मात्रा 0.5 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो इथेनॉल अपने स्वभाव के कारण पानी के साथ मिल जाता है। 

'फेज सेपरेशन' क्या है और इससे क्या असर पड़ सकता है?

विशेषज्ञ के मुताबिक, पानी की मात्रा बढ़ने पर फेज सेपरेशन की स्थिति बन सकती है।

इस प्रक्रिया में-

  • इथेनॉल और पानी मिलकर टैंक के निचले हिस्से में जमा हो जाते हैं।

  • जबकि पेट्रोल ऊपर की परत में अलग रह जाता है।

पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि चूंकि डिस्पेंसिंग यूनिट ईंधन को टैंक के निचले हिस्से से खींचती है, इसलिए कुछ वाहनों में सामान्य E20 की जगह पानी और इथेनॉल का अधिक मिश्रण पहुंच सकता है।


अगर ऐसा हो तो वाहन पर क्या असर पड़ सकता है?

पेट्रोल पंप संचालकों के अनुसार, यदि वाहन में पानी की अधिक मात्रा वाला मिश्रण पहुंचता है, तो कुछ समस्याएं सामने आ सकती हैं।

संभावित दिक्कतें

  • वाहन स्टार्ट नहीं हो सकता।

  • कुछ दूरी चलने के बाद वाहन बंद पड़ सकता है।

  • ऐसी स्थिति की जानकारी अक्सर तब मिलती है, जब ग्राहक शिकायत लेकर वापस पेट्रोल पंप पहुंचते हैं। 

तटीय इलाकों में यह चिंता और क्यों बढ़ जाती है?

कुछ पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि समुद्र के किनारे स्थित क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर हो सकती है।

उनके मुताबिक, यदि भूमिगत टैंकों की सील ठीक से बंद नहीं हो, तो सब-सॉयल वाटर भी E20 स्टॉक को प्रभावित कर सकता है।

एक पेट्रोल पंप संचालक ने यह आशंका भी जताई कि माइल्ड स्टील से बने भूमिगत टैंक और पाइपलाइन, इथेनॉल द्वारा पानी सोखने की प्रवृत्ति के कारण जंग के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। इससे ईंधन के दूषित होने का जोखिम बढ़ सकता है।

हालांकि, कुछ संचालकों ने यह भी बताया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने E20 की तैयारी के तहत पेट्रोल डिस्पेंसिंग यूनिट में लगी सील और वॉशर को नियोप्रीन रबर से बदल दिया है।


FADA ने इन दावों पर क्या कहा?

इससे पहले फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) ने E20 पेट्रोल में पानी मिलने से जुड़े दावों की तथ्य-जांच (फैक्ट-चेकिंग) की थी।

फाडा का कहना था कि यह दावा कि केवल E20 पेट्रोल में ही पानी की समस्या होती है, भ्रामक है।

संस्था के अनुसार-

  • इथेनॉल द्वारा नमी सोखना एक पहले से ज्ञात गुण है।

  • इसी को ध्यान में रखकर ईंधन के मानक, स्टोरेज व्यवस्था और वाहनों का डिजाइन तैयार किया जाता है।

  • भारत में उपलब्ध E20 पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के तय मानकों का पालन करता है।

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सरकार ने इस मुद्दे पर क्या स्पष्टीकरण दिया?

  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भी इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
  • मंत्रालय का कहना है कि किसी भी प्रकार के ईंधन के टैंक में पानी का प्रवेश होना उचित नहीं माना जाता। चाहे वह इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल हो या सामान्य ईंधन।
  • सरकार के अनुसार, आधुनिक वाहनों में ऐसे डिजाइन और सुरक्षा उपाय मौजूद हैं, जो फ्यूल टैंक में पानी जाने की संभावना को कम करने के लिए बनाए गए हैं।



E20 कार्यक्रम को लेकर सरकार पहले क्या कह चुकी है?

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम भारत की प्रमुख ऊर्जा पहलों में से एक है।

इस कार्यक्रम का मकसद-

  • ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना,

  • किसानों को समर्थन देना,

  • और घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले नवीकरणीय ईंधन (रिन्यूएबल फ्यूल) के इस्तेमाल के जरिए पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना है।

देशभर में सभी पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल उपलब्ध कराए जाने के बाद इसे लेकर कई तरह की चिंताएं सामने आई थीं।

इन सवालों के जवाब में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 23 जून 2026 को एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विभिन्न मुद्दों पर स्पष्टीकरण दिया था।

इसके बाद 4 जुलाई 2026 को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाहन निर्माताओं ने भी E20 पेट्रोल से जुड़े सवालों पर अपनी-अपनी सफाई पेश की।

 

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