राइड कैंसिल होने से यात्रियों की रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या बुरा असर पड़ रहा है?
अंतिम समय में कैब कैंसिल होने का असर महज एक साधारण असुविधा तक सीमित नहीं है। बल्कि इसका यात्रियों के जीवन पर गंभीर आर्थिक और व्यावहारिक प्रभाव पड़ता है:
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फ्लाइट और काम पर देरी:
आखिरी समय पर राइड रद्द होने से लोगों की फ्लाइट छूट जाती है या फिर वे अपने दफ्तर और महत्वपूर्ण बैठकों में समय पर नहीं पहुंच पाते।
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बार-बार बुकिंग से अधिक किराया:
एक राइड कैंसिल होने के बाद जब यूजर दोबारा कैब ढूंढता है, तो उसे अधिक किराया चुकाना पड़ता है।
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इमरजेंसी और देर रात यात्रा में अनिश्चितता:
किसी मेडिकल इमरजेंसी या देर रात सफर करते समय अचानक गाड़ी कैंसिल होने से यात्रियों की सुरक्षा और योजना पर गहरा संकट मंडराने लगता है।
सर्वे में कैब ड्राइवरों पर भारी जुर्माने और सख्त कार्रवाई को लेकर क्या आंकड़े सामने आए हैं?
सर्वे रिपोर्ट में 22,317 लोगों ने अपनी राय दी। सर्वे में यह पूछा गया था कि क्या अन्य राज्यों को भी महाराष्ट्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की तर्ज पर कैब ड्राइवरों पर भारी जुर्माना लगाना चाहिए?
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76 प्रतिशत लोगों का सीधा समर्थन:
76 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा "हां, बिल्कुल"। वे चाहते हैं कि राज्य सरकारें ड्राइवरों द्वारा ऐन मौके पर कैब रद्द करने की आदत पर शिकंजा कसें।
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14 प्रतिशत की सशर्त सहमति:
14 प्रतिशत लोगों का मानना था कि जुर्माना लागू होना चाहिए। लेकिन बशर्ते बिना किसी जायज वजह के राइड कैंसिल करने वाले यात्रियों पर भी इसी तरह की पेनल्टी लगाई जाए।
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कुल 95 प्रतिशत कड़े नियमों के पक्ष में:
केवल 5 प्रतिशत लोगों ने "कह नहीं सकते" का विकल्प चुना। इसका अर्थ यह है कि कुल 95 प्रतिशत लोग (सशर्त या बिना शर्त) ड्राइवरों पर सख्त जुर्माना लगाने के पक्ष में हैं।
महाराष्ट्र सरकार के वर्ष 2025 के एक पिछले सर्वे के आंकड़े दिखाते हैं कि ड्राइवरों द्वारा राइड कैंसिल करने की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है:
| वर्ष |
ड्राइवर द्वारा राइड कैंसिल झेलने वाले यूजर्स |
गलती न होने पर भी कैंसिलेशन चार्ज भरने वाले यूजर्स |
| 2023 |
75% |
23% |
| 2025 |
82% |
45% (लगभग दोगुना) |
इसके अलावा, 2025 के आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि 74% यूजर्स के अनुसार ड्राइवरों ने जैसे ही यह जाना कि पेमेंट डिजिटल होगा या गंतव्य सुविधाजनक नहीं है, उन्होंने तुरंत राइड कैंसिल कर दी।
महाराष्ट्र सरकार की 'एग्रीगेटर कैब्स पॉलिसी' क्या है और इसमें जुर्माने के क्या नियम हैं?
कैब सेवाओं को लेकर बढ़ती उपभोक्ता शिकायतों को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र एग्रीगेटर कैब्स पॉलिसी लागू की थी। इस नीति में यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए कई कड़े नियम और जुर्माने तय किए गए हैं:
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सामान्य मामलों में जुर्माना:
यदि कोई ड्राइवर बिना किसी वैध या जायज कारण के स्वीकार की गई राइड को कैंसिल करता है, तो उसे किराए का 10 प्रतिशत या 100 रुपये (जो भी कम हो) जुर्माने के रूप में देना होगा। यह राशि सीधे प्रभावित यात्री के खाते में जमा की जाएगी।
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इमरजेंसी लोकेशन के लिए भारी पेनल्टी:
अगर कोई ड्राइवर एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या अस्पताल जाने वाली राइड को कैंसिल करता है, तो उस पर मानक जुर्माने का 5 गुना तक या कुल किराए का 50 प्रतिशत तक भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
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सर्ज प्राइसिंग पर लगाम:
इस नीति के तहत मूल किराए से 1.5 गुना से अधिक सर्ज प्राइसिंग वसूलने पर रोक लगा दी गई है।
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शिकायत निवारण प्रणाली:
कैब एग्रीगेटर कंपनियों के लिए यात्रियों के अनुकूल शिकायत निवारण तंत्र बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।
यह नीति केंद्र सरकार के 'मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस' के अनुरूप है। जो बिना कारण राइड रद्द करने पर ड्राइवरों और यात्रियों दोनों पर ही समान रूप से पेनल्टी लगाने की सिफारिश करती है।
अब यह देखना बाकी है कि देश के अन्य राज्यों की सरकारें शहरी यात्रियों के इस बढ़ते असंतोष को देखते हुए अपने-अपने राज्यों में ऐसे ही कड़े नियम लागू करती हैं या नहीं।