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Budget 2026: बायोगैस मिश्रित सीएनजी को बड़ी राहत, ऑटो इंडस्ट्री और ग्रीन फ्यूल को मिलेगा बूस्ट

Sun, 01 Feb 2026 12:26 PM IST
जागृति ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Automobile Sector Budget Announcements 2026-27: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार 01 फरवरी 2026 को संसद में अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश किया और इसके साथ ही देश के संसदीय इतिहास में एक नया रिकॉर्ड दर्ज किया। इन्होंने ग्रीन एनर्जी और मेक इन इंडिया को नई ऊंचाई देने के लिए सीमा शुल्क के मोर्चे पर दो बड़ी राहतें दी हैं।
 
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लोकसभा में बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : ANI
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विस्तार
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में बायोगैस मिश्रित सीएनजी (Compressed Natural Gas) पर केंद्रीय सीमा शुल्क (Custom Duty) की गणना के तरीके में अहम बदलाव की घोषणा की गई है। इसके तहत अब सीमा शुल्क की गणना करते समय बायोगैस के मूल्य को छूट दी जाएगी। सरकार के इस फैसले से बायोगैस आधारित ईंधन सस्ता होगा, जिसका सीधा असर सीएनजी वाहनों की रनिंग कॉस्ट और पूरे ऑटो सेक्टर पर पड़ेगा।

क्या है पूरा मामला

अब तक बायोगैस मिश्रित सीएनजी पर कस्टम ड्यूटी की गणना कुल ईंधन मूल्य के आधार पर होती थी। वित्त मंत्री की तरफ से पेश  बजट 2026 में कहा गया कि ड्यूटी कैलकुलेशन में बायोगैस के मूल्य को अलग रखा जाएगा, जिससे प्रभावी कर बोझ कम हो सकता है।

ऑटोमोबाइल सेक्टर को क्या फायदा

  • इस कदम से सीएनजी और बायोगैस आधारित वाहनों की ईंधन लागत घट सकती है।
  • सीएनजी कार, टैक्सी और कमर्शियल व्हीकल ज्यादा किफायती बनेंगे।
  • ऑटो कंपनियों को सीएनजी और फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी में निवेश का प्रोत्साहन मिलेगा।
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट और फ्लीट ऑपरेटर्स को राहत भी मिल सकती है।

सीएनजी वाहनों की मांग को मिलेगा सहारा

एक्सपर्ट्स का मानना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच सीएनजी पहले से ही एक पसंदीदा विकल्प बन चुका है। अब बायोगैस मिश्रित सीएनजी को टैक्स राहत मिलने से सीएनजी कारों और बसों की बिक्री को नई रफ्तार मिल सकती है।

ग्रीन एनर्जी और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती

सरकार का ये फैसला केवल ऑटो इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है। इससे बायोगैस प्लांट और वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिलेगा, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ होगा, आयातित फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन घटाने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर राज्य सरकारें भी टैक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर स्तर पर सहयोग करती हैं, तो भारत में बायोगैस मिश्रित सीएनजी वाहनों का नेटवर्क तेजी से फैल सकता है। 

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