गियर की समस्या कितनी खतरनाक थी?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीजीत ने बताया कि यह बाइक उन्होंने कामकाज के लिए खरीदी थी। पहली बार जब गियर फंस गया, तब वे अपनी मां के साथ यात्रा कर रहे थे और बाल-बाल हादसे से बचे। इस घटना ने उन्हें डरा दिया और बाइक को असुरक्षित महसूस कराया। गियर का अचानक बदलना चलते वाहन में गंभीर जोखिम पैदा करता है।
सर्विस सेंटर ने समस्या क्यों नहीं सुलझाई?
समस्या सामने आते ही उन्होंने बाइक सर्विस सेंटर में दी। जांच हुई, पर खराबी बार-बार लौट आती। नतीजतन, पहली फ्री सर्विस (12 जून 2025) से पहले ही उन्हें 35 दिनों में पांच बार सर्विस सेंटर जाना पड़ा।
17 जून 2025 को उन्हें एक एसएमएस मिला, जिसमें असुविधा के लिए माफी और समस्या सुलझाने का आश्वासन दिया गया। लेकिन मरम्मत या रिप्लेसमेंट फिर भी नहीं हुआ।
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अंतिम फैसला क्या रहा?
22 जनवरी 2026 को शिकायत आंशिक रूप से स्वीकार की गई। आदेश के अनुसार-
- सर्विस सेंटर को बाइक की खराबी दूर कर उसे सड़क पर चलने लायक बनाना होगा या
- इसके विकल्प के तौर पर 25,000 रुपये मरम्मत लागत देनी होगी
- 20,000 रुपये मुआवजा (सेवा में कमी के लिए) और 5,000 रुपये मुकदमे का खर्च देना होगा
- राशि 45 दिनों में न देने पर 500 रुपये प्रति माह (या उसका भाग) अतिरिक्त देय होगा
यह फैसला खुले न्यायालय में 22 जनवरी 2026 को सुनाया गया।
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