सोलर सेल की मदद से चलने वाले इलेक्ट्रिक साइकिल का कॉन्सेप्ट नया नहीं है।
लेकिन अब तक बनाए जा रहे ई-साइकिलों पर महंगे फ़ोटोवोल्टाइक पैनल आगे, पीछे, छत पर इस तरह लगाए जाते हैं कि दोपहिया साइकिल नहीं, कोई भारीभरकम अंतरिक्ष यान दिखाई देता है।
लेकिन सोलर बाइक ये सब कुछ बदल देगा। और भारत जैसे देश में तो इसकी संभावनाओं की केवल कल्पना की जा सकती है।
ये बदलाव ला रहे हैं डेनमार्क के सौर ऊर्जा इंजीनियर जेसपर फ्राउसिग। उन्होंने ऐसा सोलर बाइक बनाया है जिसमें फ़ोटोवोल्टाइक उपकरण भी हैं और ये बिल्कुल सामान्य बाइक की तरह ही दिखती है।
जेसपर कोपनहेगन के पास एक सोलर एनर्जी इंटीग्रेशन कंपनी गाइया सोलर के लिए काम करते हैं। उन्होंने कई कॉन्सेप्ट्स का बारीकी से अध्ययन करने के बाद अपनी सोलर बाइक तैयार की है।
इसमें उन्होंने सोलर पैनल और बैटरी को साइकिल के पहिए के सेंट्रल फ्रेम में फ़िट किया है। इस इंटीग्रेटेड डिज़ाइन के कारण जहाँ दूसरी सोलर ई-बाइक का वज़न 31 किलो होता है, वहीं जेसपर की ई-बाइक केवल 16.7 किलो भारी है।
इन्होंने अपनी बाइक में 500 वॉट की इलेक्ट्रिक मोटर लगाई है, जो पेडल से जुड़ी होती है। ट्यूब के आकार के एक कंटेनर में लिथियम आयन बैटरी का पैक होता है। इसके अलावा सोलर पैनल साइकिल के चक्के के स्पोक्स की जगह पर लगा होता है।