भारत में अक्सर लोग लाड-प्यार में नाबालिगों को गाड़ी की चाबी थमा देते हैं। हालांकि, बाद में उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ता है। बता दें कि भारतीय मोटर वाहन कानून के मुताबिक, 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति का वाहन चलाना गैरकानूनी है। माता-पिता की लापरवाही का नतिजा ही है कि देश में अंडरएड ड्राइविंग के चलते एक्सिडेंट के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, पिछले दो वर्षों में 1,497 मामलों में ई-चालान जारी किए गए, जिनकी कुल जुर्माने की राशि 48 लाख रुपये से अधिक है।
अंडरएज ड्राइविंग में ये राज्य अव्वल
मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, बिहार में अंडरएज ड्राइविंग के लिए सबसे ज्यादा 1,316 चालान जारी किए गए, जहां कुल 44.3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में 1.4 लाख रुपये और छत्तीसगढ़ में 1.3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। उत्तराखंड में 22 चालानों पर 1 लाख रुपये से अधिक का फाइन लगा, जबकि उत्तर प्रदेश में केवल एक चालान पर 23,150 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
अभिभावकों पर होती है कार्रवाई
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नए नियमों के तहत माता-पिता पर भी होगी कार्रवाई
सड़क परिवहन मंत्रालय के नए नियमों के अनुसार, अगर कोई नाबालिग वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके माता-पिता या अभिभावक पर 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, अगर नाबालिग द्वारा ड्राइविंग के दौरान कोई दुर्घटना होती है, तो माता-पिता को जेल भी हो सकती है। हाल ही में पुणे पोर्श एक्सीडेंट मामले में नाबालिग के पिता को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था, जिससे यह साफ है कि अब इस नियम को सख्ती से लागू किया जा रहा है।
नाबालिगों को वाहन देने पर बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक, नाबालिगों के पास ड्राइविंग का सही अनुभव नहीं होता, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कई माता-पिता भावनाओं में आकर अपने बच्चों को गाड़ी चलाने की इजाजत दे देते हैं, जो कानूनन गलत और जानलेवा साबित हो सकता है।