भारत में अधिकतर लोग फेस्टिव सीजन में कार खरीदते हैं। धनतेरश, दिवाली जैसे त्योहारों पर कंपनियां बंपर ऑफर भी देती है, इनमें कैश डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस, कॉर्पोरेट बेनिफिट और फ्री एक्सेसरीज जैसे फायदे शामिल हो सकते हैं। ऐसे ऑफर देखकर नई कार खरीदने का मन बनना स्वाभाविक है, लेकिन यहां पर एक बात समझना जरूरी है कि किसी कार पर बड़ा डिस्काउंट मिलने का मतलब यह नहीं है कि पूरी डील भी आपके लिए सबसे फायदेमंद होगी। कुछ ऑफर खास शर्तों पर मिलते हैं, जबकि दूसरी ओर इंश्योरेंस, एक्सेसरीज या अन्य शुल्कों की वजह कुल खर्च बढ़ सकता है। इसलिए फेस्टिव सीजन में कार खरीदने से पहले केवल डिस्काउंट की रकम नहीं, बल्कि पूरी डील की जांच करना जरूरी है। आइए जानते हैं ऐसी छह बातें, जिनका ध्यान रखकर आप बेहतर फैसला ले सकते हैं।
ऑफर की पूरी जानकारी लिखित में लें
- कार खरीदने से पहले डीलर से पूछें कि आपको मिलने वाले कुल डिस्काउंट में कौन-कौन से फायदे शामिल हैं। कैश डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस, कॉर्पोरेट डिस्काउंट और दूसरे बेनिफिट की रकम अलग-अलग समझें।
- यह भी पता करें कि ऑफर पाने के लिए कोई शर्त तो नहीं है। जैसे मान लीजिए, कुछ छूट पुरानी कार एक्सचेंज करने, किसी खास फाइनेंस स्कीम का विकल्प चुनने या चुनिंदा वेरिएंट खरीदने पर ही मिल सकती है।
- सेल्स एग्जीक्यूटिव से ऑफर की जानकारी लिखित में मांगें। इससे आपको यह समझने में आसानी होगी कि वास्तव में कितनी बचत हो रही है और किन शर्तों को पूरा करना जरूरी है।
एक्स-शोरूम और ऑन-रोड कीमत का अंतर समझें
- यहां पर कार की एक्स-शोरूम कीमत और ऑन-रोड कीमत एक जैसी नहीं होतीं। एक्स-शोरूम कीमत में आमतौर पर वे सभी खर्च शामिल नहीं होते, जो कार खरीदकर सड़क पर चलाने के लिए चुकाने पड़ते हैं।
- ऑन-रोड कीमत में आम तौर पर रजिस्ट्रेशन और लागू टैक्स, इंश्योरेंस तथा अन्य संबंधित शुल्क शामिल होते हैं, इसलिए केवल एक्स-शोरूम कीमत या विज्ञापन में दिखाए गए डिस्काउंट के आधार पर फैसला न करें।
- डीलर से पूरी ऑन-रोड कीमत का ब्रेकअप मांगें। अगर संभव हो, तो दो या तीन डीलर से एक ही वेरिएंट की कीमत और ऑफर की तुलना करें। इससे पता चलेगा कि किस डील में कुल भुगतान कम है और किन मदों में अंतर आ रहा है।
कार इंश्योरेंस पर भी करें मोलभाव
इतना ही नहीं, नई कार खरीदते समय डीलरशिप अक्सर इंश्योरेंस का विकल्प भी देती है। लेकिन जरूरी नहीं कि डीलर से मिलने वाला प्रीमियम ही सबसे किफायती हो। आप दूसरे इंश्योरेंस विकल्पों की कीमत और कवरेज की तुलना भी कर सकते हैं। हालांकि, सिर्फ कम प्रीमियम देखकर पॉलिसी चुनना सही नहीं है। इंश्योरेंस लेते समय इन बातों का जरूर ध्यान दें।
- आईडीवी: चोरी या पूरी तरह नुकसान की स्थिति में वाहन के लिए तय बीमित मूल्य।
- जीरो डेप्रिसिएशन कवर: पात्र क्लेम में डेप्रिसिएशन कटौती से जुड़ी शर्तों के अनुसार अतिरिक्त सुरक्षा।
- इंजन प्रोटेक्शन: पॉलिसी में तय शर्तों के तहत इंजन से जुड़े कुछ नुकसान का कवर।
- एड-ऑन कवर: अतिरिक्त सुरक्षा के लिए मिलने वाले वैकल्पिक कवर।
- क्लेम की शर्तें: कौन-से नुकसान कवर होंगे और किन परिस्थितियों में क्लेम नहीं मिलेगा। इन सभी बातों की तुलना करने के बाद ही इंश्योरेंस का विकल्प चुनें।
एक्सचेंज बोनस के साथ पुरानी कार की कीमत भी जांचें
- अगर आप अपनी पुरानी कार देकर नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो डीलर की ओर से मिलने वाला एक्सचेंज बोनस आकर्षक लग सकता है, लेकिन केवल बोनस की रकम देखकर फैसला करना ठीक नहीं है। सबसे पहले अपनी पुरानी कार की कीमत दो-तीन जगह से पता करें। कार की हालत, मॉडल, निर्माण वर्ष, किलोमीटर और बाजार में उसकी मांग के आधार पर कीमत में अंतर हो सकता है।
- अब डीलर की ओर से दी जा रही एक्सचेंज वैल्यू और बोनस को मिलाकर देखें। अगर डीलर बोनस तो अच्छा दे रहा है, लेकिन पुरानी कार की कीमत कम लगा रहा है, तो कुल फायदा उतना नहीं होगा जितना पहली नजर में दिखता है। जरूरत पड़ने पर पुरानी कार को अलग से बेचने और नई कार पर मिलने वाले ऑफर की तुलना भी करें।
फ्री एक्सेसरीज के नाम पर अतिरिक्त खर्च से बचें
- फेस्टिव सीजन में कुछ डीलर कार के साथ एक्सेसरीज पैकेज लेने का सुझाव देते हैं। इसमें सीट कवर, फ्लोर मैट, सनशेड और बॉडी कवर जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं। कई बार इन चीजों को ऑफर का हिस्सा बताकर पेश किया जाता है, जबकि कुछ पैकेज के लिए अलग से भुगतान करना पड़ सकता है।
- ऐसे में पहले पता करें कि कौन-सी एक्सेसरीज वास्तव में मुफ्त हैं और किनके लिए पैसे देने होंगे। उनकी कीमत और गुणवत्ता की तुलना बाजार में उपलब्ध विकल्पों से भी करें।
- अगर किसी एक्सेसरी को अनिवार्य बताया जा रहा है, तो उसकी कीमत और शर्तें लिखित में मांगें। इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि एक्सेसरीज पैकेज लेना जरूरी है या नहीं और उससे कुल खर्च कितना बढ़ रहा है।
कार का मैन्युफैक्चरिंग मंथ जरूर चेक करें
- फेस्टिव सीजन में डीलर पुरानी इन्वेंट्री पर भी आकर्षक डिस्काउंट दे सकते हैं। इसलिए कार खरीदने से पहले उसका मैन्युफैक्चरिंग मंथ और साल जरूर जांचें। कार का वीआईएन यानी की व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर या चेसिस नंबर वाहन की पहचान से जुड़ा होता है। इससे संबंधित निर्माण जानकारी की पुष्टि डीलर या कंपनी के अधिकृत माध्यम से कराएं। साथ ही, यह भी पूछें कि कार कितने समय से डीलरशिप पर खड़ी है।
- पुराने स्टॉक की कार पर मिलने वाला डिस्काउंट ज्यादा हो सकता है, लेकिन इसे हाल ही में बनी कार के ऑफर से अलग करके देखें। सिर्फ कम कीमत के कारण फैसला न लें। कार की स्थिति, वारंटी की शुरुआत से जुड़ी जानकारी और बाकी शर्तों को भी स्पष्ट कर लें।
कार खरीदते समय इन बातों को भी रखें ध्यान
कार की बुकिंग से पहले ऑफर की वैधता, चुने गए वेरिएंट की उपलब्धता और भुगतान से जुड़ी शर्तें स्पष्ट कर लें। बुकिंग की रसीद और डील से संबंधित दस्तावेज संभालकर रखें। अगर फाइनेंस ले रहे हैं, तो ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और कुल चुकाई जाने वाली रकम की भी तुलना करें।