भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने कार सेफ्टी और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। 77-81 GHz फ्रीक्वेंसी बैंड वाले शॉर्ट-रेंज ऑटोमोटिव रडार सिस्टम को अब लाइसेंस की जरूरत से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। संचार मंत्रालय के जरिए इस नियम की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है।
इस फैसले से भारत में कारों, बसों, ट्रकों और यहां तक कि टू-व्हीलर्स में भी बेहतर ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) और आधुनिक सेफ्टी फीचर्स के विस्तार का रास्ता साफ हो गया है। आसान भाषा में समझें तो यह वही रडार तकनीक है जो गाड़ी को अपने आस-पास की चीजों को महसूस करने में मदद करती है, जैसे- आगे चल रही कार के अचानक ब्रेक लगाने पर या कम स्पीड में किसी चीज के बेहद करीब आने पर।
रडार सिस्टम के नियमों में क्या बदला है?
नए नियमों के तहत अब सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ है कि:
- बिना लाइसेंस इस्तेमाल: गाड़ियों में शॉर्ट-रेंज रडार सिस्टम लगाने, उसके रखरखाव या इस्तेमाल के लिए अब रेडियो फ्रीक्वेंसी असाइनमेंट की जरूरत नहीं होगी।
- बिक्री और खरीद आसान: किसी भी व्यक्ति या डीलर को 77-81 GHz रडार उपकरण रखने, बेचने या किराए पर देने के लिए किसी लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी।
इससे कार निर्माता कंपनियों के लिए अनुपालन का एक बड़ा झंझट खत्म हो जाएगा। इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलेगा क्योंकि कंपनियां अब अपनी ज्यादा से ज्यादा कारों के मॉडल्स और ट्रिम्स में ADAS फीचर आसानी से दे सकेंगी।
किन-किन गाड़ियों को मिलेगा इसका फायदा?
DoT ने इस नियम के दायरे में लगभग हर तरह के वाहनों को शामिल किया है, जिससे इसका फायदा बहुत व्यापक होगा:
- पैसेंजर कारें
- बसें और ट्रक
- मोटरसाइकिल और स्कूटर
- कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाले वाहन
- रनवे पर चलते करते हुए हवाई जहाज
- ट्रेन, रेल इंजन, मोनोरेल और ट्राम
- भारतीय जल सीमा के भीतर चलने वाली नावें या जहाज
आम कार खरीदार के लिए यह खबर क्यों मायने रखती है?
ADAS फीचर्स को ठीक से काम करने के लिए रडार की बहुत जरूरत होती है। वर्तमान में कई कारों में सिर्फ कैमरे वाले सिस्टम आते हैं, जो अक्सर खराब मौसम (जैसे बारिश या कोहरे) या कम रोशनी में ठीक से काम नहीं कर पाते।
ऐसे में रडार सिस्टम सेफ्टी की एक एक्स्ट्रा लेयर जोड़ देता है। इससे नीचे दिए गए फीचर्स बिना किसी रुकावट के ज्यादा सटीक तरीके से काम करते हैं:
- ऑटोमैटिक ब्रेकिंग असिस्ट: आपात स्थिति में गाड़ी खुद ब्रेक लगा लेती है।
- एडेप्टिव क्रूज कंट्रोल: आगे चलने वाली गाड़ी के हिसाब से कार अपनी स्पीड खुद एडजस्ट करती है।
- ब्लाइंड स्पॉट अलर्ट: अगल-बगल से आ रही गाड़ी, जो शीशे में नहीं दिख रही, उसकी चेतावनी देना।
- टकराव की चेतावनी: एक्सीडेंट होने से पहले ड्राइवर को अलर्ट करना।
लाइसेंस की तकनीकी शर्तें
लाइसेंस-फ्री होने के बावजूद, सरकार ने कुछ मानक तय किए हैं। जैसे- इसका फ्रीक्वेंसी बैंड 77-81 GHz के बीच होना चाहिए, अधिकतम पीक पावर 55 dBm तक सीमित होनी चाहिए और एमिशन बैंडविड्थ 4 GHz होना चाहिए। कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम भारत की सड़कों को सुरक्षित बनाने और आम गाड़ियों में महंगी प्रीमियम कारों जैसी सेफ्टी तकनीक (ADAS) को बजट में लाने की दिशा में एक बड़ी जीत है।