बैरियर-फ्री सिस्टम से सरकार और आम लोगों को कितना फायदा होगा?
नितिन गडकरी के अनुसार, जब यह इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम पूरी तरह से काम करने लगेगा, तो केवल इस विभाग के माध्यम से भारत सरकार को सालाना 20,000 करोड़ रुपये से 25,000 करोड़ रुपये तक का वित्तीय लाभ मिलेगा।
इस नई व्यवस्था से होने वाले प्रमुख फायदे ये हैं:
- टोल राजस्व में बढ़ोतरी: फास्टैग के आने से पहले ही टोल कलेक्शन में 10 प्रतिशत (लगभग 7,000 करोड़ रुपये) का इजाफा हुआ है। जिससे कुल टोल राजस्व बढ़कर 82,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। बैरियर-फ्री व्यवस्था से इसमें 7,000 रुपये से 8,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी होगी।
- ऑपरेशनल लागत में भारी कमी: टोल प्लाजा चलाने का खर्च (ऑपरेटिंग कॉस्ट) पहले के 12 प्रतिशत से घटकर अब महज 2 से 3 प्रतिशत रह गया है।
- ईंधन और समय की बचत: टोल प्लाजा पर वाहनों का वेटिंग टाइम कम होने से वाहन चालकों को सालाना 5,250 करोड़ रुपये से अधिक के ईंधन की बचत हो रही है।
'OneTag' पोर्टेबिलिटी फैसिलिटी क्या है और इससे ड्राइवरों को क्या सुविधा मिलेगी?
कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने फास्टैग पोर्टेबिलिटी सुविधा वन टैग (OneTag) का भी शुभारंभ किया।
- आसान बैंक ट्रांसफर: इस नई सुविधा के जरिए वाहन मालिक राजमार्ग यात्रा (Rajmarg Yatra) ऐप का उपयोग करके अपने मौजूदा फास्टैग को बिना नया टैग खरीदे किसी भी नए बैंक खाते से आसानी से जोड़ सकते हैं।
- डिजिटल इंटीग्रेशन: यह कदम ग्राहक केंद्रित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।