हाल ही में स्वीकृत प्रतिबंध के अनुसार, 2035 से यूरोपीय संघ (ईयू) में कोई नई फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) से चलने वाली कारें नहीं बेची जाएंगी। यूरोपीय संसद ने औपचारिक रूप से एक कानून को मंजूरी दे दी है जो 2035 से यूरोपीय संघ में नई पेट्रोल और डीजल कारों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाता है। यह कदम इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
नॉर्वे में 2025 से ही लागू
यूरोपीय संघ में शामिल 27 देशों में यह फैसला लागू होगा। लेकिन इस संघ से बाहर आईसलैंड और इस्राइल जैसे देशों में भी ऐसे ही कदम उठाए गए हैं। इन दोनों देशों में 2030 तक फॉसिल फ्यूल से चलने वाली कारों के बेचने पर पाबंदी लग जाएगी। दिलचस्प बात यह है कि नॉर्वे ने अपने यहां इस फैसले को 2025 से ही लागू करने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया है।
क्या है लक्ष्य
इस ऐतिहासिक कानून के तहत कार निर्माताओं को CO2 उत्सर्जन में 100 प्रतिशत की कटौती करने की जरूरत होगी। बेची गई नई कारों से CO2 उत्सर्जन में 100 प्रतिशत कटौती से 27 देशों के ब्लॉक में पेट्रोल या डीजल से चलने वाली कारों को बेचना असंभव हो जाएगा। यह कानून चरणों में लागू होगा जिसके लिए 2030 से शुरू होने वाली नई कारों के लिए CO2 उत्सर्जन में 55 प्रतिशत की कटौती की आवश्यकता होगी, जो कि मौजूदा 37.5 प्रतिशत की तुलना में बहुत अधिक लक्ष्य है।
नियमों पर संसद के प्रमुख वार्ताकार जान हुइतेमा ने रॉयटर्स के हवाले से कहा, "एक इलेक्ट्रिक वाहन की परिचालन लागत इंनटरल कंब्शन इंजन वाले वाहन की परिचालन लागत से पहले से ही कम है।" उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के लिए ज्यादा किफायती इलेक्ट्रिक वाहन लाना महत्वपूर्ण है।
नई वैन को 2035 तक 100 प्रतिशत CO2 कटौती और 2021 के स्तर की तुलना में 2030 तक 50 प्रतिशत कटौती का अनुपालन करना होगा। यूरोप में कई कार निर्माताओं ने इलेक्ट्रिफिकेशन में निवेश का एलान किया है। उदाहरण के लिए, फॉक्सवैगन ने 2033 से सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन बनाने का वादा किया है।