भारत में घरेलू टायर उद्योग एक महत्वपूर्ण रोजगार प्रदाता है, जो विनिर्माण, वितरण और संबंधित सेवाओं में सीधे और परोक्ष रूप से पांच लाख से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है। यह उद्योग मुक्त व्यापार समझौते के जरिए टायर आयात को उदार बनाने से बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
उद्योग निकाय ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (एटीएमए) का कहना है कि भारत में टायर बनाने की पर्याप्त क्षमता है और आयात शुल्क में रियायत देकर मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए आयात को उदार नहीं बनाया जाना चाहिए।
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ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एटीएमए) ने केंद्र को सूचित किया है कि ऑटोमोटिव टायर उन क्षेत्रों में सबसे आगे हैं जहां घरेलू मैन्युफेक्चरिंग (विनिर्माण) क्षमताएं आयात को गैर-जरूरी बना सकती हैं।
एटीएमए ने एक बयान में कहा कि यह सरकार द्वारा उन क्षेत्रों के बारे में फीडबैक मांगे जाने के जवाब में था, जिनमें भारत के पास आत्मनिर्भर होने की क्षमता है। ताकि घरेलू उद्योग के हितों की रक्षा करते हुए आगामी एफटीए का मसौदा तैयार किया जा सके। उद्योग निकाय ने बताया है कि शुल्क रियायतों के जरिए एफटीए के माध्यम से आयात को उदार नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का घरेलू टायर उद्योग दुनिया के सबसे बड़े उद्योगों में से एक है। जिसका वार्षिक उत्पादन 200 मिलियन यूनिट्स से ज्यादा है। जिसमें दोपहिया वाहन, यात्री वाहन, वाणिज्यिक वाहन और ऑफ-रोड वाहन शामिल हैं।
एटीएमए ने कहा कि पर्याप्त निर्माण क्षमता के बावजूद, वित्त वर्ष 24 की पहली तीन तिमाहियों में 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य के टायर आयात किए गए। जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
एटीएमए के अध्यक्ष अर्णब बनर्जी ने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में, टायर क्षेत्र में प्रमुख निर्माताओं द्वारा क्षमता विस्तार, टेक्नोलॉजी अपग्रेड और रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर 35,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया गया है। नई क्षमताएं चालू होने के साथ, टायरों का आयात करने के बजाय घरेलू मैन्युफेक्चरिंग से मांग को पूरा करना महत्वपूर्ण है।"
उन्होंने आगे कहा कि घरेलू टायर उद्योग आज देश में निर्मित सभी श्रेणियों और प्रकार के वाहनों के लिए डिजाइन, विकास और टायरों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करके घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ऑटो ओईएम (मूल उपकरण निर्माताओं) की सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है।
बनर्जी ने कहा, "उद्योग सभी प्रकार के टायरों के उत्पादन में मांग से आगे है। जैसे ही कोई वाहन बनता है, टायर कंपनियां फिटमेंट के साथ तैयार हो जाती हैं। नतीजतन, ऑटो ओईएम टायर आयात नहीं कर रहे हैं और घरेलू टायर उद्योग जरूरतों को पूरा कर रहा है।"
एटीएमए ने कहा कि घरेलू टायर उद्योग रोजगार देने में काफी एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। जो मैन्युफेक्चरिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और संबंधित सेवाओं में सीधे और परोक्ष रूप से कार्यरत पांच लाख से ज्यादा लोगों को आजीविका प्रदान करता है।
एटीएमए ने जोर देकर कहा, "टायरों के घरेलू मैन्युफेक्चरिंग को प्राथमिकता देना भी जरूरी है। क्योंकि देश में 10 लाख से ज्यादा रबर उत्पादकों की आजीविका टायर उद्योग पर निर्भर करती है। जो 70 प्रतिशत से ज्यादा घरेलू नेचुरल रबर की खपत करता है।"
एटीएमए ने कहा कि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और तकनीकी प्रगति का लाभ उठाकर भारत टायर उद्योग में वैश्विक नेता के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है। साथ ही रोजगार पैदा कर सकता है, स्थिरता को बढ़ावा दे सकता है और आर्थिक विकास को रफ्तार दे सकता है।