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मर्दाना कामों में भी महिलाओं का दबदबा,आॅटोमोबाइल सेक्टर में बढ़ रहीं हैं औरतें

Mon, 27 Aug 2018 02:17 PM IST
ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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चार साल पहले टाटा मोटर्स द्वारा शुरु किया गया ‘वुमन इन ब्लू’ने नया मोड ले लिया है। इस अभियान के तहत पांच महिलाओं के बैच के साथ लड़कियों को फैक्ट्री के कामकाज की ट्रेनिंग दी गई। नतीजा यह रहा कि जुलाई 2018 तक कंपनी के शॉप फ्लोर पर काम करने वाली महिलाओं की संख्या 1,812  तक पहुंच गई है।
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कारखानों में शारीरिक मेहनत वाले कामकाज को ब्लू कॉलर जॉब कहा जाता है। इसलिए इस ब्रिगेड का नाम वुमन इन ब्लू रखा गया। महिलाओं की संख्या सिर्फ कार-स्कूटर कंपनियों तक सीमित नहीं, बल्कि ट्रक और ट्रैक्टर जैसे बड़े वाहन बनाने वाली टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और आयशर मोटर्स के कारखानों में भी अब पहले के मुताबिक बढ़ी है।

महिंद्रा एंड महिंद्रा ने 2016 में 23 महिलाओं को इस काम के लिए नियुक्त किया था। अब इनकी संख्या 630 हो गई है। 2 साल से शॉप फ्लोर में 7.5% नियुक्ति महिलाओं की हुई है। कंपनी की ही कृषि उपकरण बनाने वाली सब्सिडियरी स्वराज में शॉप फ्लोर पर काम करने वाली महिलाओं की संख्या 250 से अधिक है।
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दोपहिया वाहन इकाई रॉयल एनफील्ड में पूरी इंजन असेंबली लाइन को 140 महिलाकर्मी ही संभालती हैं। हीरो मोटोकॉर्प ने भी शॉप फ्लोर पर महिलाओं की मौजूदगी बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट 'तेजस्विनी' शुरू किया था। आज कंपनी में 160 महिलाएं असेंबली लाइन पर काम कर रही हैं।

टाटा मोटर्स के विभिन्न प्लांट के शॉप फ्लोर में 1,812 महिलाएं हैं। यह कुल शॉप फ्लोर वर्कफोर्स का लगभग 4% है। टाटा मोटर्स के सीएचआरओ गजेंद्र चंदेल ने कहा, हमारा मानना है कि जो महिलाओं के लिए अच्छा है वह समाज के लिए भी अच्छा है, और जो समाज के लिए अच्छा है वह कारोबार के लिए भी अच्छा है। 

बजाज ऑटो के मात्र दो प्लांट में वुमन ओनली असेंबली लाइन 2013-14 में 148 महिलाएं थीं जो की 2017-18 में 355 हो गईं है।
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