भारत में सब-कॉम्पैक्ट एसयूवीज की दीवानगी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इनकी दीवानगी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि भारत सड़कों पर दौड़ने वाली 10 में छह गाड़ियां सब-कॉम्पैक्ट एसयूवीज ही हैं। इनके आगे सेडान और हैचबैक की चमक फीकी पड़ गई है। लोगों की पसंद और बाजार की मांग को देखते हुए मौजूदा समय में तमाम कंपनियां सब-कॉम्पैक्ट एसयूवी मॉडल पेश कर रही हैं। आइए डालते हैं भारत में सब-कॉम्पैक्ट एसयूवीज की खासियतों पर एक नजर...
फोर्ड इकोस्पोर्ट
आज से 10 साल पहले तक सब-कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट में कुछ खास हो-हल्ला नहीं था। प्रीमियर की रियो और फोर्ड फ्यूजन ने बाजार में अपनी पैठ बनाने की कोशिश की थी लेकिन सेडान के प्रति भारतीयों की दीवानगी ने इस कोशिश को नाकाम कर दिया। साल 2013 में फोर्ड ने इकोस्पोर्ट को बाजार में उतारा और उसके बाद बाजार में एकदम से हलचल होने लगी। इसकी लॉन्चिंग ने सात से आठ लाख के बजट वालों को बड़ा तोहफा दिया, फलस्वरूप फोर्ड इकोस्पोर्ट को लोगों ने हाथों-हाथ लिया। खासियतों की बात करें तो इसकी केबिन में ज्यादा काफी है। इसके अलावा हेडरूम भी बढ़िया है और सॉफ्ट सस्पेंशन तो है ही।
सब-कॉम्पैक्ट एसयूवीज की खासियतें
पहली बात तो यही है कि अधिकतर सब-कॉम्पैक्ट एसयूवीज में सेडान का इंजन इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा इनकी बॉडी भी कॉम्पैक्ट होती है। इसके अलावा ये एसयूवीज अब स्मार्ट फीचर्स के साथ भी आने लगी हैं। हाल ही में लॉन्च हुई माइक्रो-एसयूवी ने भी बाजार को और गर्म कर दिया है। इसके अलावा जल्द ही बाजार में सब-कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट को टाटा ''एचबीएक्स'', सिट्रॉन ''सीसी21'', इश्कोडा ''कुशक'' जैसे मॉडल्स और मजबूत बनाने वाले हैं। ऐसे में यही कहा जा सकता है कि सब-कॉम्पैक्ट एसयूवीज की दीवानगी अभी खत्म नहीं होने वाली है।